उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की वीडियो है!
बताया जा रहा है कि कानपुर के राहुल तिवारी पर 8 दिन पहले एक नाबालिग लड़की का अपहरण करने का आरोप है, परिजनों ने तुरंत बिलग्राम थाना में FIR दर्ज कराई,
कथित तौर पर पुलिस ने कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की, जब आखिरकार लड़की को बिलग्राम कोतवाली लाया गया, तो पुलिस ने दावा किया कि "लड़की खुद चलकर आई है !
सबसे बड़ी बात है कि लड़की के सारे कपड़े खून से लथपथ पाए गए !
दीप नारायण पांडे की टीम उसे टॉमा सेंटर हरदोई ले गई, जहां लड़की ने अपनी मां को रोते हुए बताया, "पुलिसवालों ने मुझे मारा-पीटा है,लड़की बुरी तरह सहमी हुई थी और कुछ बोलने को तैयार नहीं थी !!
देशवासियों से संसद में झूठ बोलने वाले बुजुर्ग रक्षा मंत्री को बर्खास्त किया जाय।
ये काठ का घोड़ा हैं देश के किसी काम के नहीं।
देश के वीर शहीदों के बलिदान को शत शत ।
EWS और UPSC स्कैम।
UPSC 2025 में 104 कैंडिडेट EWS कोटा से चुने गए!
उनमे से 67 ऐसे कोचिंग से पढ़े जिसकी फीस लाखों में थी।
14 कैंडिडेट IIT से ग्रेजुएट थे।
28 के माता-पिता का बिजनेस है।
10 MNCs में नौकरी करते थे।
ग़ज़ब खेल चल रहा है।
दलित हिंदू नहीं हैं।
बांदा में ललित वर्मा और शिवानी चौहान ने लव मैरिज की थी, लेकिन फिर भी पुलिस ने उन पर FIR दर्ज की।
पुलिस उन्हें जबरन उठाकर थाने ले आई। यहां जातीय दंभ में लड़की के पिता ने थाने में ही उसकी जघन्य हत्या कर दी।
सवाल यह है कि कोई थाने में चाकू लेकर घुसा कैसे? थाने में SHO से लेकर SI, हेड कांस्टेबल सहित अनेक सिपाही मौजूद थे। सबकी मौजूदगी में बेटी बार-बार अपने मां-बाप से मुकदमा वापस लेने के लिए गिड़गिड़ाती रही। उसने कहा कि मैं बालिग हूं और इस लड़के से बहुत प्रेम करती हूं। मैं इसी लड़के के साथ रहना चाहती हूं और रहूंगी।
लेकिन दो कौड़ी का दरिंदा बाप अपने जातीय अहंकार में ग्रस्त था। वैसे उसकी आर्थिक हालत एकदम तंग थी, बमुश्किल घर वालों को पेट भर खाना दे सकता था, लेकिन वह समाज में अपनी जाति का अहंकार कमतर नहीं होने देना चाहता था। भला उसकी बेटी किसी दलित से शादी कैसे कर सकती थी? लड़का हिंदू है तो क्या हुआ? है तो निचले दर्जे का। "हिंदू-हिंदू एक हैं" वाली लफ्फाजी से जातीय अभिमान थोड़ी तय होता है।
जब उसके बाप को यह लग गया कि लड़की उसकी बात नहीं मानेगी, तो उसने जेब से चाकू निकाला और लड़की पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस तमाशबीन बनकर खड़ी देखती रही। सवाल यह है कि अगर दलित थाने में भी सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस उन्हें थाने में उठाकर लाई ही क्यों? वे दोनों तो इसी भरोसे पर आए थे कि पुलिस की निगरानी में वे सुरक्षित रहेंगे। CO, SHO सहित सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। BJP सरकार समाज को "लाइन हाजिर" वाली लफ्फाजी दिखाकर गुमराह न करे।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इस घटना पर सारे हिंदू संगठन मौन क्यों हैं? हिंदू राष्ट्र में दलितों की स्थिति की झलक साफ दिखाई दे रही है। क्या यह आधिकारिक ऐलान हो चुका है कि दलित हिंदू नहीं हैं? अतः उनकी हत्या एवं जातीय अत्याचार पर कोई मुंह न खोले? हिंदू समाज स्वयं को डायनासोर क्यों समझ रहा है कि दूसरी जाति में विवाह हो गया तो उनकी प्रजाति संकटग्रत हो जाएगी?
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हुए जघन्य केतन लाल हत्याकांड पर ग्राउंड रिपोर्ट के लिए द न्यूज़बीक की टीम ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंच चुकी है। #JusticeForKetan
जातिवाद ने फिर एक दलित की जान ले ली। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 17 साल के दलित लड़के केतन लाल की बर्बर हत्या कर दी गई। जल्द एक ग्राउंड रिपोर्ट #JusticeForKetan
मनमोहन सरकार ने झुका दिया था अमेरिका को,
आखिर अमेरिका को भारत से माफ़ी मांगनी पड़ी थी !
ईंट का जवाब पत्थर से भी मिल सकता है ये अहसास अमेरिका को पहली बार मिला है - अंजना ओम कश्यप (2013)
इतनी ताकतवर थी उस समय कांग्रेस सरकार
तब सिर्फ भारतीय राजदूत से बदसलूकी हुई थी अमेरिका में, अब तो अमेरिकी सेना ने 3 भारतीय नागरिक मार दिए !
सोचो आज मनमोहन सरकार होती तो क्या हाल होता अमेरिका का !
डॉ अंबेडकर जयंती देश भर में धूम धाम से मनाई जा रही है। जनता मना रही है। वीडियो मुंबई के बांद्रा इलाक़े का है। 14 अप्रैल की पूर्व संध्या का। सभी की तरफ़ से सभी को बधाई।
जिसने समाज सेवा में ख़ुद को मिटा दिया,
समता के सूखे पेड़ को फिर से हरा किया।
अम्बेडकर को कीजिए सौ सौ नमन "असर",
जो रोशनी के वास्ते ख़ुद ही जला किया।
अरविन्द असर
क्या सब कुछ UPSC ही है? UPSC में करीब 1000 पद होते हैं, जबकि आवेदन करने वालों की संख्या लगभग दस लाख होती है और परीक्षा में करीब पाँच लाख लोग बैठते हैं। 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में 13.4 लाख प्रतियोगी बैठे थे। जो पास होते हैं, जरूरी नहीं कि उन्हीं में सबसे अधिक प्रतिभा हो इसमें कुछ हद तक chance factor भी होता है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं स्वयं IRS में रहा हूँ।
फाइनल रिजल्ट के बाद हजारों प्रतियोगी ऐसे रह जाते हैं जो उतने ही तेज और बुद्धिमान होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोग परीक्षा देते हैं कि लगभग पचास हजार लोग समान रूप से काबिल हो सकते हैं। UPSC पास न कर पाने पर मैंने हजारों युवाओं को कुंठा, निराशा और डिप्रेशन का शिकार होते देखा है। वे असफल होने से उतना प्रभावित नहीं होते जितना कि सफल होने वालों का मीडिया, कोचिंग सेंटर और समाज द्वारा किया गया महिमामंडन उन्हें प्रभावित करता है। सोशल मीडिया भी ऐसे पोस्टों से भरी रहती है।
जो पास नहीं हो सके उन्हें जीने नहीं दिया जाता। कई सप्ताह तक स्वागत और बधाइयाँ चलती रहती हैं। जाति के लोग अलग से गौरव गाथा गाने लगते हैं। जितनी अधिक पब्लिसिटी होगी, उतना ही असफल युवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और वे सोचने लगेंगे कि उनमें काबिलियत नहीं है। घर वाले भी दबाव डालते हैं। दोस्त और रिश्तेदार कन्नी काटने लगते हैं। सुंदर पत्नी और बड़े दहेज के सपने भी टूट जाते हैं। लोग ताने मारते हैं और जो साथ में तैयारी कर रहे होते हैं उनके व्यवहार में भी बदलाव आने लगता है।
मैंने दर्जनों मामले देखे हैं जहाँ अधिक प्रतिभाशाली साथी UPSC नहीं निकाल पाते, जबकि अपेक्षाकृत औसत लोग सफल हो जाते हैं। इतनी महिमा-मंडन और शोर-शराबे की आवश्यकता नहीं है। इससे असफल युवाओं पर गहरा नकारात्मक असर पड़ता है। UPSC पास करने वाले कौन सा बहुत बड़ा काम कर देते हैं? वे कौन सा नया आविष्कार कर रहे हैं?
डॉक्टर, इंजीनियर और MBA करने वाले भी UPSC के पीछे क्यों भागते हैं? वेतन भी बहुत अधिक नहीं होता। जब उनसे पूछा जाता है तो जवाब लगभग एक जैसा होता है देश की सेवा का मौका मिलेगा। लेकिन कौन सी सेवा करने जा रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।
अगर ब्यूरोक्रेट वास्तव में सेवा करना चाहते तो नेताओं के सामने क्यों झुक जाते हैं? उनकी रीढ़ की हड्डी कहाँ चली जाती है? ज्यादातर लोगों को अच्छी पोस्टिंग चाहिए। अगर दस प्रतिशत अधिकारी और कर्मचारी भी पोस्टिंग के लालच को छोड़ दें तो नेता कुछ नहीं कर सकते।
जब मेरी पहली पोस्टिंग गाजियाबाद में सहायक आयकर आयुक्त के पद पर हुई, तो विभाग के कई कर्मचारियों और अधिकारियों ने सलाह दी कि यहाँ माहौल बहुत खराब है। पंगा लेने से क्या फायदा? जो चल रहा है, उसे चलने दो।लेकिन मैंने सोचा कि सरकार मुझे वेतन, अधिकार और इतना सम्मान देती है, तो उसके बदले मुझे भी कुछ देना चाहिए। उस समय गाजियाबाद में अपराध चरम पर था और इनकम टैक्स अधिकारियों पर हमले भी हो चुके थे। मैंने अपनी पहल पर रेड करना शुरू किया और किसी के दबाव में नहीं आया, भले ही कुछ लोग मुझे “गब्बर सिंह” कहने लगे थे।
असफल युवाओं से मैं यही कहना चाहूँगा कि दुनिया में करने के लिए बहुत कुछ है। जीना जरूरी है और खुद को पहचानना भी जरूरी है। खुश रहने के कई आयाम हैं।समय कभी नहीं रुकता। जो आज सफल हो जाते हैं, वे भी कुछ समय बाद निराशा और हताशा भरी जिंदगी जीने लगते हैं। बीपी, ब्लड शुगर, हार्ट की समस्याएँ और डिप्रेशन का शिकार होना आम बात है।
कहने का अर्थ यह है कि जिंदगी जीने के लिए होती है, कुछ करने के लिए होती है। समाज क्या सोचता है या क्या कहता है, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
"तुम चमार हो तुम सिर्फ पानी भरने लायक हो; पानी भरो"
घटना UP के अलीगढ की है।
ये दर्द exclusive नहीं बन पाता है, क्योंकि ये तो सदियों से आम है!
और उनका एक दर्द, उफ्फ! पूरी मीडिया तांडव करने लगती है!
“तुम चमार हो… तुम सिर्फ टॉयलेट में पानी भरने लायक हो”
अलीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में दलित छात्रा को जबरन शौचालय साफ करने के लिए कहा गया और इंकार करने पर उसे पीटा गया। यह घटना केवल एक छात्रा के साथ अन्याय नहीं, बल्कि समानता, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
कोटद्वार में अब मीडिया की No Entry !
बजरंग दल के लफंगों को जो पुलिस नहीं रोक सकी , वो पुलिस अब कोटद्वार बॉर्डर पर दिल्ली से जाने वाले पत्रकारों को रोक रही है .
गुंडागर्दी नहीं रोक पाए तो पत्रकारों के कवरेज को रोकेंगे .
पूरा वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर .
अमेरिका ने अपना टैरिफ लगभग छह गुना बढ़ा दिया । पहले भारतीय सामानों पर औसतन 3% टैरिफ लगता था । अब 18% ।
भारत औसतन अमेरिकी सामानों पर 12% टैरिफ लेता था । अब ZERO हो जायेगा ।
तो ट्रेड डील किसके हक में ?
अमेरिका या भारत ?