भाजपा राज में सुबह पुल गिरने की ख़बर आती है, दोपहर में रेलवे स्टेशन के शेड गिरने की, शाम होते-होते गंगा एक्सप्रेसवे की दरारें ख़बरों की सुर्ख़ियाँ बन जाती हैं।
बेईमानी की चाशनी में डूबी भाजपा के भ्रष्टाचार की कड़वी जलेबी अब और नहीं सही जा सकती।
जनता भाजपा से उकता चुकी है।
काशी के प्रतीक चिन्हों को विकास के नाम पर तोड़कर भाजपा सरकार क्या वाराणसी की विरासत को ही खंडित कर देना चाहती है। अब रोहनिया में 55 साल पहले 1968 में बने गांधी चबूतरा व भारत माता मंदिर को चौड़ीकरण के नाम पर तोड़ दिया गया है।
अगर ‘क्योटो’ इतिहास की धरोहर को धूल में मिलाकर बनना है तो परंपरा प्रेमी काशीवासियों के बीच इसके लिए एक सार्वजनिक जनमत करा लेना चाहिए।
बीएचयू दरिंदगी की घटना में तीनो मुख्य आरोपी बीजेपी IT सेल से जुड़े हैं। तीनों ही बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के करीबी हैं और ऐसे ही बीजेपी कार्यकर्ता "मोदी की गारंटी" वाले सिपाही हैं। इन्हे तो पता ही होगा हमें तो मोदी जी बचा ही लेंगे जैसे चिन्मयानंद का मुकदमा सरकार ने वापस ले लिया?
पंजाब के अग्निवीर शहीद अमृतपाल सिंह के पार्थिव शरीर को न तो सैन्य-सम्मान मिला न राजकीय-सम्मान। ये एक त्रुटिपूर्ण सैन्य-भर्ती का दुष्परिणाम है। सैनिकों को उनका यथोचित सम्मान हर दशा-अवस्था में मिलना ही चाहिए। हम इस शहादत को शत-शत नमन करते हैं।
जय हिंद!