खबरदार करता @aajtak - राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) ⚡️12 वर्षों से ठेका प्रथा पर
❎️शिक्षकों को 5 से 14 माह हुए वेतन नहीं मिला हैं
📌शिक्षा मंत्री जी बोल रहे हैं आप हमारे कर्मचारी नहीं हो
📃12 वर्षों से कोई स्थाई पॉलिसी नहीं
📑विभाग व शिक्षा मंत्री ठेका प्रथा कंपनियों के साथ मिलकर कर रहें शिक्षकों का शोषण
🤔21 से ज्यादा कंपनियां
आखिर न्याय कब???
@Cockroachisback@AshutoshRanka@abhijeet_dipke@sharatjpr@SauravDassss@pantlp@PMOIndia
सरकार को हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षकों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है।
ज्ञापन, वार्ता, धरना, प्रदर्शन—हर लोकतांत्रिक प्रयास के बाद भी केवल आश्वासन मिले, समाधान नहीं।
इसलिए आगामी नगर निकाय एवं पंचायत चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की गई है।
जब तक स्थायी जॉब पॉलिसी, VTP (प्लेसमेंट एजेंसियों) व्यवस्था समाप्त और हरियाणा मॉडल लागू नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा।
न्याय नहीं तो समर्थन नहीं।
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#हरियाणा_मॉडल
@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@ECISVEEP
व्यावसायिक शिक्षा- 12 वर्षों से शिक्षकों के साथ हो रहें शोषण के खिलाफ स्थाई जॉब पॉलिसी लागू करने के लिए राजस्थान विधानसभा के प्रतिपक्ष नेता टीका राम जूली @TikaRamJullyINC जी से मुलाकात की
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
5 दिनों की भूख हड़ताल के बाद संघर्ष को मिला नया संबल, नेता प्रतिपक्ष श्री टीका राम जूली जी ने महिला व्यावसायिक प्रशिक्षक की भूख हड़ताल तुड़वाकर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया।
✊ न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
🚩एक ही मांग स्थाई जॉब पॉलिसी लागू करो।
राजकीय विद्यालयों में कई साल से विद्यार्थियों को कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक आज भी स्थायी नीति के इंतजार में हैं। हरियाणा, असम, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, दिल्ली जैसे राज्य पहले ही अपने प्रशिक्षकों के लिए स्थायी नीति लागू कर चुके हैं, राजस्थान अब भी बार-बार टेंडर की अनिश्चितता में उलझा है।
साथ ही उन्हीं VTP कंपनियों को नए कार्यादेश देने की तैयारी हो रही है जिन पर प्रशिक्षकों का 6 से 13 महीने तक वेतन बकाया है। यह व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशिक्षकों के भविष्य दोनों के साथ खिलवाड़ है।
भाजपा सरकार को समझना चाहिए कि "कौशल भारत, कुशल भारत" के नारे तभी सार्थक होंगे जब प्रशिक्षकों को सेवा सुरक्षा और समय पर वेतन मिले। 80 से अधिक जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में है। जयपुर में कई दिन से चल रहे इनके अनशन के बावजूद सरकार ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई है जो निंदनीय है।