@nehraji778 हर झूठी या सच्ची घटना या अफवाह को तोड़ मरोड़ कर किसी ना किसी तरह से भाजपा की तारीफ में कसीदे पढ़ कर लोगोँ को गुमराह करना ही आई टी सेल का काम है।
@akrititrip93018 समानता का अधिकार संविधान तो देता है लेकिन इसको लेना भी पड़ता है। अपने आप नहीं मिला करता। सवर्णों के साथ अत्याचार बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है। वोट बैंक की घटिया राजनीति सवर्णों का समूल नाश कर रही है।
@BRAHMAN_BR28 समझ में ये नहीं आ रहा कि इस से दिक्कत क्या है?
खाने वाले की आजादी वो मुह से निकाल कर खाए या कहीं और से। बीमारी होगी तो खाने वाले को होगी।
@upwalegaurav पहली बात कि वर्दी न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, ये न्यायपालिका का दायित्व है कि वो निष्पक्ष रहे। दूसरी बात कि हर वर्दी के अंदर हाड़ मांस और सम्वेदना वाला इंसान ही होता है।
@surya_samajwadi संविधान समानता का अधिकार देता है। अगर कुछ वर्गों को आरक्षण मिल सकता है तो बाकी वर्गों को क्यूँ नहीं। सभी का समान हक है आरक्षण पर। सभी धर्मों और जातियों को आरक्षण मिलना चाहिये।
@satya_1766 अम्बेडकर जी ने सभी को समान अधिकार देने की पूरी कोशिश की थी। हम सभी को अपने अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर वोटों के लिये स्वार्थी राजनीतिज्ञों को नहीं करने देना चाहिये। हक सभी का बराबर है उसे मार कर दूसरे को देने का अधिकार संविधान ने किसी को नहीं दिया है।
@mktyaggi पुलिस की निरंकुशता की घटनायें रोज हो रही है। आये दिन ये लोगोँ के साथ गली के गुंडों की तरह पेश आ रहे हैं।
क्या इन्हे लोगोँ को बेइज्जत, लाचार, असुरक्षित करने के लिये लगाया जाता है? सवाल यह है कि इनसे पीड़ित आदमी जाये तो कहां जाये और इनकी रपट कहाँ लिखवाये ?
कब होगा इनका सुधार?
@khuchrep बस ये बता दो तुम्हारे गुंडागर्दी और गैरकानूनी हरकतों से परेशान आम जन कहाँ जायें? कौन लिखेगा तुम्हारे खिलाफ एफआईआर? कैसे निबटे आम लोग इन गुंडों से जो सुरक्षा देने के नाम पर आम आदमी की सपरिवार ऐसी तैसी कर देते हैं ??
@FarmerRightIND ड्रामा है सब। ऐसी नौबत आती ही क्यूँ है कि दौरा करने के बाद सस्पेंड करना पड़े कईयों को। सिस्टम होना चाहिये रोज सुपरवाईज करने का ताकि ऐसी स्थिति ही ना बने और दौरा करने पर होंसला बढ़ाना चाहिये टीम का, न कि उन्हें सस्पेंड करके उनका मनोबल गिराना चाहिये।
@MrMishra@vishnudsai सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस से पीड़ित आदमी कहां जाये? कौन से थाने में इनकी रपट लिखवाये ? आये दिन ये आम जनों के साथ गली के गुंडों की तरह पेश आते हैं।
सुरक्षा देने की जगह ये आम जनों को और भी ज्यादा असहज, असहाय और असुरक्षित महसूस करवाते हैं।
कब होगा इनका सुधार?
@pitamaha_b52862 ये देश के लिये शहीद होने वालों के नाम नहीं है। ये नाम अंग्रेजों की सेना के शहीद हुए लोगों के हैं। नफरत की आंधी ने दिमाग बंद कर दिया है , उसे कम करो तभी दिमाग खुलेगा और सच का ज्ञान होगा।