चांदपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: बिना मुकदमा संख्या का नोटिस देकर युवक को किया गया प्रताड़ित।
चांदपुर (बिजनौर):
थाना चांदपुर पुलिस द्वारा पीड़ित योगिंदर सिंह, पिता छत्तर सिंह, ग्राम रुखनपुर, पोस्ट बाहमनशोरा, तहसील चांदपुर, थाना चांदपुर, जिला बिजनौर, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। पीड़ित युवक ने पुलिस प्रशासन पर जबरन परेशान करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उनसे नाम, पता और पिता का नाम (छतर सिंह) पूछकर फॉर्म में भर लिया और हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी 'मुकदमा अपराध संख्या' और 'धारा' का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, BNSS की धारा 35(3) (जो पूर्व में CrPC की धारा 41A थी) के तहत नोटिस तभी जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई विशिष्ट प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो। नोटिस में मुकदमा संख्या, धारा, और उपस्थिति का समय व स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। पीड़ित का कहना है कि बिना एफआईआर संख्या दर्ज किए नोटिस देना और हस्ताक्षर कराना उन्हें गैर-कानूनी तरीके से फंसाने या प्रताड़ित करने की साजिश है।
पीड़ित के लिए इंसाफ के कानूनी मार्ग
यदि किसी व्यक्ति को बिना एफआईआर नंबर के इस प्रकार का अधूरा नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो कानून में इसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत: पीड़ित तत्काल इस पूरे मामले और हस्ताक्षरित नोटिस की प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर और पुलिस महानिरीक्षक (IG/DIG) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें कि बिना मुकदमा संख्या के जबरन हस्ताक्षर कराए गए हैं।
जनसुनवाई पोर्टल (IGRS): उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की जा सकती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क: यदि पुलिस द्वारा बिना किसी वैध अपराध संख्या के अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर से मुफ्त कानूनी मदद ली जा सकती है।
उच्च न्यायालय का रुख: यदि पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारी या प्रताड़ना की आशंका हो, तो पीड़ित अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर राहत और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बिना किसी दर्ज मुकदमे या बिना एफआईआर विवरण के जारी किया गया नोटिस प्रक्रियात्मक त्रुटि का स्पष्ट मामला है और कानून के समक्ष यह मान्य नहीं है, जिसकी गहनता से जांच कर पीड़ित को इंसाफ मिल सके। @dgpup@Uppolice@CBIHeadquarters@acbimeerut@bijnorpolice@UPGovt@myogiadityanath@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia पीड़ित का संपर्क नं: +919927232882
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजे की बिक्री: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
(पूर्वी दिल्ली: राजधानी के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चित्रा विहार रेड लाइट के पास अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़क पर बनी झुग्गियों के सामने सरेआम अवैध गांजे की बिक्री की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध नशीले कारोबार की कमान रईस नामक व्यक्ति के हाथों में है।
कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क किनारे बिना किसी खौफ के हो रही तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों का निकलना भी दूभर हो गया है।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना, फिर भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अध्यक्ष को फोन पर इस अवैध धंधे की विस्तृत सूचना दे दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पूर्व में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य सड़क पर बेखौफ जारी नशीले पदार्थों का यह कारोबार न केवल स्थानीय पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।
नाबालिगों के भविष्य पर मंडराता खतरा
अपराध में नाबालिग बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नशीले पदार्थों के कारोबारी बच्चों को कम उम्र में ही इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह तबाह हो रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) से मांग की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। चित्रा विहार रेड लाइट के पास विशेष अभियान चलाकर मुख्य आरोपी रईस समेत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल हो सके। @DCPEastDelhi@ShoPreet@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@CrimeBranchDP@CPDelhi@JointCP_ER@LtGovDelhi@DelhiPolice@DelhiGovDigital@dgovcbic
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
उत्तर दिल्ली में पुलिस चौकी के पास बेखौफ सट्टेबाजी: प्रशासन की मिलीभगत या अपराधियों के बुलंद हौसले?
नई दिल्ली:
राजधानी में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराध मुक्त दिल्ली के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर दिल्ली के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन के अंतर्गत आने वाली मजनू का टीला पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध सट्टेबाजी और जुए का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
पुलिस चौकी के पास बेखौफ गोरखधंधा
बताया जा रहा है कि अरुणा नगर (मजनू का टीला) स्थित मनोज मेडिकोज के पास वाली गली के एक मकान में सन्नी, सुमित और चेतू नामक व्यक्तियों द्वारा चिड़िया-कबूतर, तितली-कबूतर और मटका जैसे अवैध जुए व सट्टे का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, करन प्रधान के पास भी कुछ ही दूरी पर इसी प्रकार के जुए का अवैध कारोबार सक्रिय है।
SHO की गश्त के बावजूद बेधड़क कारोबार
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ समय-समय पर इलाके में गश्त करते रहते हैं। इसके बावजूद पुलिस की नाक के नीचे बिना किसी डर के यह अवैध धंधा चल रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर स्थानीय पुलिस की सह पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था को सख्त करने और अपराधियों पर लगाम कसने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा यह सट्टेबाजी का खेल न केवल स्थानीय प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे इलाके में अन्य आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर यह मामला भी महज फाइलों में सिमट कर रह जाएगा। @DcpNorthDelhi@shocivillines@ACPCivillines@CrimeBranchDP@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@dgovcbic@HMOIndia@CMODelhi
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
नंदनगरी डी-ब्लॉक में नियमों की धज्जियां: बेखौफ चल रहा अवैध शराब का कारोबार, पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले के थाना नंदनगरी क्षेत्र अंतर्गत डी-ब्लॉक (जिसे स्थानीय स्तर पर 'स्कूल ब्लॉक' भी कहा जाता है) में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां खुलेआम और बेखौफ तरीके से घरों से शराब परोसी जा रही है। इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'सुनीता' नामक महिला द्वारा संचालित किए जाने की खबर है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार को इलाके के बीट ऑफिसर अशोक का संरक्षण (छत्रछाया) प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारा अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और लापरवाह बीट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, नंदनगरी के इस इलाके में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई घरों को मिनी शराब ठेके में तब्दील कर दिया गया है।
स्कूल ब्लॉक में मंडराता खतरा, निवासियों में रोष
जिस क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसे 'स्कूल ब्लॉक' के नाम से जाना जाता है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि आला अधिकारियों के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर पर बीट पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि समाचार संज्ञान में आने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं और आरोपी बीट स्टाफ व अवैध कारोबार चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है। @DCPNEastDelhi@NNagri60662@shonandnagrined@DelhiPolice@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@LtGovDelhi@dgovcbic@DelhiGovDigital
दरियागंज के सर्राफ आंख अस्पताल में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल: टोकन काउंटर पर अभद्रता और मरीजों की परेशानी का आरोप
नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के दरियागंज स्थित प्रसिद्ध 'डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल' (सर्राफ अस्पताल) एक बार फिर अपनी प्रशासनिक अव्यवस्था और कर्मचारियों के कथित दुर्व्यवहार को लेकर चर्चा में है। खुद को मरीजों की सेवा में समर्पित बताने वाले इस संस्थान के टोकन काउंटर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
काउंटर पर अभद्रता और पक्षपात का आरोप
हाल ही में सामने आई जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के अनुसार, अस्पताल के टोकन काउंटर के बाहर कुर्सी पर बैठा एक कर्मचारी मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ अभद्रता भाषा करता नजर आ रहा है।
अस्पताल में लगी लंबी लाइनों को देखकर जब वहां मौजूद एक पत्रकार ने कतार में खड़े बुजुर्गों व मरीजों की स्थिति का हवाला देते हुए थोड़ा सहयोग (कॉर्पोरेट) करने की बात कही, तो कर्मचारी ने सहयोग करने के बजाय सख्त टिप्पणी की कहा कि यहां पर पत्रकार स्टाफ की लाइन नहीं सबसे पीछे जनरल लाइन में लगो "ऐसे पता नहीं कितने पत्रकार यहाँ आते-जाते हैं, लाइन में लगोगे तो टोकन मिलेगा वरना प्राइवेट वार्ड 2 नंबर गेट पर चले जाओ।"
एक तरफ जहाँ आम जनता और पत्रकार घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ काउंटर के आसपास स्टाफ के नाम पर कई अन्य लोग बिना लाइन के खड़े देखे गए। इस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया अस्पताल प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अस्पताल परिसर में जनसमस्याओं को उठाने वाले पत्रकारों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सम्मान देने या जनहित के सुझावों को सुनने के बजाय, अस्पताल का अमला गैर-जिम्मेदाराना जवाब देने में व्यस्त है।
अतीत के विवाद और असफल इलाज के दावे
यह पहली बार नहीं है जब सर्राफ अस्पताल विवादों के घेरे में न आया हो। स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के मुताबिक, विगत कुछ वर्षों में अस्पताल के इलाज को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
चर्चाओं के अनुसार, पूर्व में एक महिला की आंख में इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी असमय मौत हो गई थी।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सर्राफ अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन सफल न होने के कारण उन्हें मजबूरी में आंख के बिगडै हुए मामले दिल्ली के अन्य सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा।
क्या सरकारी अस्पतालों से भी बड़ा है सर्राफ अस्पताल?
दिल्ली में बड़े सरकारी अस्पताल मौजूद हैं, जहाँ रोजाना हजारों मरीजों का पारदर्शी और सम्मानजनक तरीके से इलाज किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एक निजी चैरिटेबल ट्रस्ट से चलने वाला सर्राफ अस्पताल खुद को दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और नियम-कानूनों से भी ऊपर समझने लगा है?
अस्पताल प्रशासन को इस तरह की अव्यवस्थाओं, कर्मचारियों के बदतमीजी भरे रवैये और इलाज में हो रही चूक पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेना चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले असहाय मरीजों को राहत मिल सके। @HelthMinistry @SCEHI @MoHFW_INDIA@healthminister8 @HealthMinisterDL @DelhiMedCouncil @India_NHRC@LtGovDelhi@CMODelhi@MCD_Delhi@DelhiPolice
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी से सुधरी यातायात व्यवस्था, जौहरीपुर व नाला रोड पर लगने वाले जाम से मिली राहत।
दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में यातायात को सुगम बनाने और नागरिकों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस टीम द्वारा किया जा रहा कार्य लगातार सरहाया जा रहा है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर (TI) प्रेम सिंह के कुशल नेतृत्व में जौहरीपुर, नाला रोड तथा आसपास के व्यस्त इलाकों में पुलिस टीम की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और समाधान
जैसे ही किसी क्षेत्र से ट्रैफिक जाम या अव्यवस्था की सूचना सामने आती है, खजूरी सर्कल की टीम बिना किसी देरी के तत्काल मौके पर पहुंचती है। पुलिसकर्मी स्थिति को संभालते हुए समस्या का त्वरित और स्थायी समाधान सुनिश्चित करते हैं, जिससे वाहन चालकों को घंटों जाम में नहीं फंसना पड़ता।
चालकों को नियमों के प्रति किया जा रहा जागरूक
खजूरी सर्कल टीम की कार्यशैली में केवल यातायात नियंत्रण ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता भी प्रमुखता से शामिल है। टीम द्वारा समय-समय पर वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका सीधा सकारात्मक असर सड़कों पर देखने को मिल रहा है—स्थानीय निवासी और चालक न केवल नियमों का महत्व समझ रहे हैं, बल्कि उनका मुस्तैदी से पालन भी कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना
क्षेत्रीय निवासियों ने ट्रैफिक पुलिस प्रशासन की इस तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और उचित मार्गदर्शन से न केवल आम जनता के समय की बचत हो रही है, बल्कि क्षेत्र में सड़क हादसों की संभावना भी काफी हद तक कम हुई है। @dtptraffic@DelhiTrafficPol@TIKhajuriKhas
@VBN_DIGITAL इस सम्बन्ध में पूर्व में भी कई बार खबरें प्रकाशित हुई पर पुलिस द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। जागरूक लोगों का बड़ा सवाल। क्या वजीराबाद पुलिस इस अवैध गतिविधियों से बेखबर है, या सट्टे माफियाओं से मिली हुई है? आखिर स्थानीय पुलिस ठोस कार्यवाही करने में असमर्थ क्यों?
उत्तर पूर्वी दिल्ली: नंदनगरी सर्किल पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर ₹500 की अवैध उगाही का आरोप, पीड़ित चालक ने CCTV जांच की मांग की है।
नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली के अति-व्यस्त नंदनगरी सर्किल (गोल चक्कर फ्लाईओवर से ठीक पहले, कार शोरूम के समीप) से पुलिसिया तंत्र को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पीक आवर्स के दौरान ड्यूटी पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी पर नो-एंट्री का डर दिखाकर एक वाहन चालक से ₹500 की अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है।
पीड़ित वाहन (क्रमांक: DL 1L AE 1544) के चालक के अनुसार, कार शोरूम के पास लगभग 5:30, से 6:00, बजे के बीच तैनात ट्रैफिक पुलिस के हेड कांस्टेबल (HC) पंकज बलियान ने उनकी गाड़ी को रोका। हेड कांस्टेबल ने नो-एंट्री का हवाला देते हुए भारी-भरकम चालान काटने की धमकी दी। हालांकि, कोई कानूनी चालान जारी करने के बजाय कथित तौर पर ₹500 की रिश्वत लेकर गाड़ी को जाने दिया गया।
घटना स्थल: नंदनगरी गोल चक्कर फ्लाईओवर से पहले, कार शोरूम के पास।
आरोपी पुलिसकर्मी: हेड कांस्टेबल (HC) पंकज बलियान।
संबंधित वाहन: DL 1L AE 1544।
नो-एंट्री के नाम पर ₹500 की अवैध वसूली (बिना चालान रसीद)
चालक द्वारा बनाई गई वीडियो और इलाके की CCTV फुटेज से निष्पक्ष जांच की मांग।
चालक ने बताया कि उसने डरते-डरते अपने फोन से इस घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया, लेकिन घबराहट के कारण वीडियो पूरी तरह स्पष्ट नहीं बन सका। पीड़ित का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन फ्लाईओवर और आसपास के कार शोरूम पर लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) की गहनता से जांच कराए, तो सच पूरी तरह से बेनकाब हो जाएगा।
पीक टाइम में जब जनता जाम और ट्रैफिक से जूझ रही होती है, तब पुलिसकर्मियों द्वारा उगाही का यह खेल सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। पीड़ित ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने और दोषी कर्मचारी पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। @dtptraffic@DelhiTrafficPol@SplCPTrafficDel@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@govt_delhi
गोकलपुर-नाला रोड पर अवैध पार्किंग और गैरेज व्यवसाय से यातायात ठप, प्रशासन मौन।
गोकलपुर (दिल्ली)
गोकलपुर से नाला रोड (जौहरीपुर मार्ग) पर बड़े वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर मरम्मत (रिपेयरिंग) करने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सड़क किनारे गाड़ियों के जमावड़े और खुलेआम चल रहे अवैध गैरेज व्यवसाय के कारण इस पूरे मार्ग पर दिन-रात यातायात बाधित रहता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर वाहन (छोटा हाथी बोलेरो, कार और कमर्शियल गाड़ियां) खड़े रहते हैं। सड़क पर ही गाड़ियों की रिपेयरिंग, वेल्डिंग और कटाई-छंटाई का काम किया जाता है। संकरी सड़क पर इन वाहनों के अवैध कब्जे के कारण आए दिन घंटों लंबा जाम लगा रहता है, जिससे स्कूली बसों, एम्बुलेंस और राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है।
पुलिस व ट्रैफिक पुलिस की साठगांठ की आशंका
सूत्रों की मानें तो यह अवैध कारोबार स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की कथित 'छत्रछाया' में फल-फूल रहा है। यही वजह है कि बीच सड़क पर खुलेआम नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और संबंधित तंत्र आंखें मूंदे बैठा है।
शिकायतों के बावजूद ढाक के वही तीन पात
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि इस संबंध में पूर्व में भी नगर निगम (MCD) अधिकारियों और वरिष्ठ ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया था। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले पस्त होने के बजाय और बुलंद हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने अब उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त से मांग की है कि इस क्षेत्र में तुरंत विशेष अभियान चलाकर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि जौहरीपुर-नाला रोड की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके। @DCPTrafficER@dtptraffic@DelhiTrafficPol@AddlCPTraffic1@acpnortheasttr@TrafficCP@TIKhajurikhas@TIbhajanpura@TINandNagri@DelhiPolice@bishtmla@UpenderSolanki7@ShoDayalpur@shodayalpur25@AcpKhajuri@Acpgokalpuri@TransportDelhi@ParivahanSewa@MORTHIndia@NHAI_Official@CMODelhi@HMOIndia@PMOIndia जांच कर कार्यवाही हेतु।
वजीराबाद थाने के नाक तले पनप रहा अवैध सट्टा और जुए का काला कारोबार, बीट ऑफिसर पर संरक्षण का आरोप।
नई दिल्ली: राजधानी के वेस्ट संत नगर (वजीराबाद थाना क्षेत्र) स्थित 25 फूटा रोड, सोम बाजार और पैराडाइज पब्लिक स्कूल के आसपास के इलाके में अवैध जुआ, सट्टा और 'तितली-कबूतर' का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह अवैध कारोबार पिछले कई महीनों से खुलेआम संचालित हो रहा है, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है और आम नागरिकों, विशेषकर स्कूली बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लक्ष्मण नाम के दबंग पर संचालन का आरोप
प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, इस पूरे गोरखधंधे का मास्टरमाइंड 'लक्ष्मण' नाम का एक स्थानीय दबंग व्यक्ति है। वह अपने गुर्गों के साथ मिलकर बिना किसी डर के इस अवैध साम्राज्य को चला रहा है। दिन-रात लगने वाले इस सट्टे के अड्डे के कारण इलाके में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
पुलिसिया कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल बीट ऑफिसर की छत्रछाया में फलफूल रहा है। सूत्रों का दावा है कि स्थानीय बीट ऑफिसर नेकी राम की अनदेखी और कथित शह के कारण ही जुआरियों और सटोरियों के हौसले इतने बुलंद हैं।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना
क्षेत्र में लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जागरूक नागरिकों और सूत्रों द्वारा इस पूरे मामले की शिकायत सीधे थाना अध्यक्ष (SHO) को कॉल के माध्यम से दे दी गई है। अब देखना यह होगा कि वजीराबाद थाना पुलिस इस पर क्या सख्त कदम उठाती है।
स्थानीय लोगों की मांग
निवासियों की मांग है कि पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आए, इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करे और संबंधित आरोपियों समेत लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करे। @DcpNorthDelhi@ShoWazirabad@CPDelhi@DelhiPolice@LtGovDelhi@CVCIndia@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiPolice@govt_delhi
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के सामने 'दंगल मैदान': डग्गामार बसों का अवैध अड्डा बनी पार्किंग, कहीं ट्रैफिक पुलिस की सांठगांठ तो नहीं?
राजधानी दिल्ली के अति-व्यस्त कोतवाली सर्कल स्थित पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के ठीक सामने बना 'दंगल मैदान पार्किंग' इन दिनों अवैध और डग्गामार बसों का प्रमुख गढ़ बन चुका है। पार्किंग की आड़ में दिन-रात बेधड़क चल रहे इस अवैध बस अड्डे के कारण पूरा क्षेत्र भयंकर यातायात जाम, अव्यवस्था और आम जनता के लिए भारी परेशानी का सबब बना हुआ है।
पुलिस की छत्रछाया और नियमों की धज्जियां
सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध कारोबार को स्थानीय ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारियों का कथित संरक्षण प्राप्त है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य पड़ोसी राज्यों से आने वाली बिना परमिट, ओवरलोडेड और नियम-कायदों को ताक पर रखने वाली डग्गामार बसें 'सेटअप' के तहत रोजाना दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश करती हैं। दंगल मैदान पार्किंग को इन बसों के स्थाई पिक-अप और ड्रॉप पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्टेशन के आसपास हर समय हजारों यात्रियों और वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में दंगल मैदान के बाहर इन बसों के बेतरतीब खड़े होने, सड़क पर ही सवारियां भरने और उतारने के कारण चांदनी चौक, एसपी मुखर्जी मार्ग और आसपास के तमाम रास्तों पर घंटों लंबा जाम लगा रहता है। इमरजेंसी वाहनों और रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
बिना वैध व्यावसायिक परमिट और टैक्स चुकाए चलने वाली ये बसें दिल्ली सरकार के राजस्व को बड़ा नुकसान पहुंचा रही हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बिना किसी जांच-पड़ताल और रिकॉर्ड के चल रहीं ये बसें किसी बड़ी सुरक्षा चूक का कारण बन सकती हैं।
क्षेत्रीय निवासियों और दैनिक यात्रियों ने उपराज्यपाल, दिल्ली पुलिस आयुक्त और परिवहन विभाग से इस मामले में तुरंत कड़ा संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दंगल मैदान पार्किंग की आड़ में चल रहे इस खेल की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसमें संलिप्त पुलिसकर्मियों व भू-माफियाओं/ट्रैवल ऑपरेटरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। @dtptraffic@SplCPTrafficDel@DelhiPolice@dtchq_delhi@LtGovDelhi@DPCC_Pollution@CPCB_OFFICIAL
@PetroleumMin@MoPNG_eSeva दो बार सोशल मीडिया ट्वीटर X, के माध्यम से जारी अवैध गैस कटिंग और ब्लैकमेलिंग के गिरोह का पर्दाफाश होने के बावजूद संबंधित विभाग और उच्च अधिकारियों द्वारा साधी गई चुप्पी अत्यंत चिंताजनक है।
जनहित और सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर खबर उजागर होने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया, बयान या जांच का आदेश न आना प्रशासनिक उदासीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। गैस कटिंग जैसे खतरनाक कार्य से जहां एक ओर बड़े हादसे का खतरा बना रहता है, वहीं ब्लैकमेलिंग का खेल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजघाट पावर हाउस के पास ‘जसप्रीत गैस सर्विस’ में अवैध गैस कटिंग का खेल बेखौफ जारी, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजघाट पावर हाउस नए कंचनपुरी बस डिपो के पास स्थिति 'जसप्रीत गैस सर्विस' इन दिनों अवैध गतिविधियों और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने को लेकर विवादों में है। क्षेत्रीय चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, गैस एजेंसी परिसर में लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध गैस कटिंग (सिलेंडरों से अवैध रूप से रिफिलिंग और गैस चोरी) का काला कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। इस घोर लापरवाही से किसी बड़े हादसे की आशंका को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अवैध कारोबार को कथित तौर पर गैस एजेंसी के मैनेजर अंकित और गोदाम कीपर राजू का संरक्षण प्राप्त है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस रिफिलिंग और कटिंग के खेल में रोशन, सूरज, मखमेंदर, लालाराम, शमीम, पप्पू और बंटी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। वहीं, स्थानीय सूत्रों का दावा है कि 'पिंटू' नामक व्यक्ति पूरे तंत्र का वित्तीय लेनदेन और अवैध वसूली संभालने का काम देखता है। घनी आबादी और बस डिपो के पास जारी यह खतरनाक गतिविधि किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में भी दो बार समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं। जनशिकायत के बाद उच्च अधिकारियों की ओर से औपचारिक जवाब तो आया कि "जानकारी संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है और जल्द कार्रवाई की जाएगी", लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों का यह उदासीन रवैया अवैध कारोबारियों के हौसले पस्त करने के बजाय और बुलंद कर रहा है।
आस-पास के नागरिकों और पीड़ितों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कागजी आश्वासनों से हटकर मौके पर निष्पक्ष छापेमारी की जाए। स्थानीय लोगों की मांग है कि:
अवैध रिफिलिंग और कटिंग में शामिल सभी आरोपितों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर एजेंसी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
वित्तीय हेरफेर और अवैध वसूली में शामिल पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार उठ रही आवाजों और औपचारिक बयानों के बाद संबंधित विभाग और आला अधिकारी इस अवैध नेटवर्क पर कब और क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। @MoPNG_eSeva@PetroleumMin@HardeepSPuri@OfficeofHSP@CMODelhi@LtGovDelhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPCentralDelhi@HMOIndia@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@rashtrapatibhvn@VPIndia@loksabhaspeaker@LokSabhaSectt@MCD_Delhi@dtptraffic@IndianOilcl@ArvindKejriwal@AtishiAAP@AAPDelhi@SanjayAzadSln@AamAadmiParty@INCDelhi@BJP4Delhi@RahulGandhi@rajnathsingh@yadavakhilesh
राजघाट पावर हाउस के पास जसप्रीत गैस सर्विस में अवैध गैस कटिंग का खेल जारी, जनहित में कड़ी कार्रवाई की मांग।
नई दिल्ली /राजधानी दिल्ली के दरियागंज थाना क्षेत्र राजघाट पावर हाउस नए कंचनपुरी बस डिपो के समीप स्थित 'जसप्रीत गैस सर्विस' में कथित रूप से चल रही अवैध गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। बताया गया है कि बड़ा गोदाम राजघाट पॉवर हाउस पर, मेन ऑफिस शॉप नंबर 18, आंबेडकर स्टेडियम, दिल्ली गेट पर है। सूत्रों और क्षेत्रीय चर्चाओं के अनुसार, गैस एजेंसी के मैनेजर अंकित और गोदाम कीपर राजू के संरक्षण में गैस कटिंग (सिलेंडरों से अवैध रूप से गैस निकालना) का कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है।
स्थानीय स्तर पर आ रही जानकारी के मुताबिक, इस रिफिलिंग और कटिंग के खेल में रोशन, सूरज, मखमेंदर, लालाराम, शमीम और बंटी की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। वहीं, 'पिंटू' नामक व्यक्ति पर पूरे तंत्र से अवैध वसूली और वित्तीय लेनदेन संभालने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि पूर्व में इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने पर स्थानीय पुलिस ने कुछ हद तक कार्रवाई की थी। लेकिन कुछ भ्रष्टपुलिकर्मियों द्वारा अवैध रकम लेनदेन के चलते दिल्ली पुलिस की साख को गिराने का काम किया है, जिस कारण आरोपी पक्ष बेखौफ होकर अवैध काम को अंजाम दे रहे हैं।
इस गोरखधंधे के कारण आम उपभोक्ताओं को कम वजन (गैस कम) वाले सिलेंडर मिल रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर डाका तो पड़ ही रहा है, साथ ही रिहायशी इलाके में इस तरह की अवैध रिफिलिंग से किसी बड़े हादसे की भी आशंका बनी रहती है।
उपभोक्ताओं को कम गैस की समस्या और सुरक्षा जोखिमों से स्थायी छुटकारा कब मिलेगा?
पूर्व में हुई पुलिस कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क दोबारा कैसे सक्रिय हो गया?
संबंधित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और उच्च पुलिस अधिकारी इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कब करेंगे?
क्षेत्रीय निवासियों ने संबंधित उच्च अधिकारियों से मामले का तुरंत संज्ञान लेने और दोषी पाए जाने वाले मैनेजर, गोदाम कीपर तथा उनके सहयोगियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। @MoPNG_eSeva@DCPCentralDelhi@PetroleumMin@HardeepSPuri@OfficeofHSP@CMODelhi@LtGovDelhi@CPDelhi@DelhiPolice@DCPNEastDelhi@HMOIndia@PMOIndia@AmitShah@AmitShahOffice@rashtrapatibhvn@VPIndia@loksabhaspeaker@LokSabhaSectt@MCD_Delhi@dtptraffic@IndianOilcl@ArvindKejriwal@AtishiAAP@AAPDelhi@SanjayAzadSln@AamAadmiParty@INCDelhi@BJP4Delhi@RahulGandhi@rajnathsingh@yadavakhilesh@SupriyaShrinate@FanPriyankaGV मामले की गहनता से जांच कर उचित कार्यवाही के संदर्भ में।
शाहदरा के निपुण टॉवर स्थित 'हाइपर क्लब' में नियमों की धज्जियां: देर रात तक अवैध हुक्का और अश्लील डांस का आरोप।
शाहदरा (दिल्ली)
आनंद विहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कम्युनिटी सेंटर स्थित निपुण टॉवर (G1, 15/16) में संचालित 'हाइपर क्लब' इन दिनों गंभीर अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस क्लब में आबकारी और सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। चर्चा है कि
नियमों के मुताबिक वाणिज्यिक गतिविधियों और क्लबों के संचालन की समय-सीमा निर्धारित है, लेकिन सूत्रों द्वारा यह क्लब रात 12 बजे के बाद भी बेधड़क चलता रहता है। देर रात 2 बजे तक क्लब के कपाट खुले रहते हैं, जहां आने वाले ग्राहकों को बिना किसी भय के सुविधाएं परोसी जा रही हैं।
सूत्रों का दावा है कि क्लब के भीतर अवैध रूप से हुक्का बार चलाया जा रहा है और अश्लील डांस की गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। स्थानीय निवासियों और सूत्रों की मानें तो यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय बीट अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली और कथित संरक्षण के साए में चल रहा है, जिससे इलाके का माहौल खराब हो रहा है, साथ ही बीटकर्मियों द्वारा दिल्ली पुलिस की छवि को धूमिल किया जा रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने पुलिस प्रशासन एवं उच्च अधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है,कि क्लब के लाइसेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच हो।
देर रात तक चल रही अवैध गतिविधियों और हुक्का बार पर तुरंत रोक लगाई जाए।
यदि स्थानीय पुलिस कर्मियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह होगा कि शाहदरा जिला पुलिस प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर संबंधित क्लब संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कानूनी कार्रवाई करता है। @MCD_Delhi@DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShoAnandvhar@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@LokNiwasDelhi
क्या यूपी पुलिस की छवि को खराब करने के उद्देश्य से कुछ वर्दीधारियो ने दबंगों के साथ मिलकर FIR लिखवाई, जिसमें मारपीट करने वाला घटनास्थल से 2 किमी दूर था। आखिर इतनी दूर से मारपीट कैसे कर सकता है, कहीं यह मामला भ्रष्टाचार से संबंधित तो नही?
मेरठ/दिल्ली:
उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ के थाना प्रशिक्षितगढ़ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां FIR में मारपीट करने वाला व्यक्ति घटना स्थल से 2 किलोमीटर दूर था। जिसमें जो मारपीट करने वाला शख्स अंकुश कुमार नाम का बताया गया है जो दिल्ली पुलिस का जवान हैं, खुद अचंबे में है। उसका दावा है कि जिस समय (सुबह 10:30 बजे) उन पर गांव सोना (थाना परीक्षितगढ़, मेरठ) में मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया गया है, उस समय मैं गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर रास्ते में था।
और उसके खिलाफ एफआईआर करवाने वाले गांव के ही कुछ दबंग व्यक्ति अखिलेश, रॉकी,अरविंद आदि है।
पीड़ित अंकुश कुमार का यह भी आरोप है कि विपक्ष जबरन खड़ी फसल काटकर ले जा रहे थे। इस संबंध में पीड़ित ने 13 और 14 अगस्त को दिल्ली से ही 112 नंबर और परीक्षितगढ़ पुलिस (SO) को सूचित किया था, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इस मामले में जब एक दिल्ली पुलिस के जवान को ही न्याय नहीं मिल पा रहा है तो यहां ऐसी स्थिति में एक आम नागरिक के लिए न्याय मिलना एक मील का पत्थर जैसा साबित होगा, यानी न्याय कोसों दूर रहेगा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना है कि प्रदेश में सबको न्याय मिले लेकिन कुछ वर्दीधारियो के द्वारा उनके सपनों पर पानी फेरा जा रहा है।
विगत, 28 अगस्त की सुबह घटना की सूचना मिलते ही अंकुश कुमार अपनी गाड़ी (DL10CV2286) से दिल्ली से गांव के लिए निकला।
सुबह 10:20 - 10:29 बजे: पीड़ित का दावा है कि वे मेरठ एक्सप्रेसवे से होते हुए गांव से 2 किमी दूर था। इसी दौरान रास्ते में उन्हें 112 नंबर की पीसीआर गाड़ी मिली, जिसे रोककर उन्होंने बातचीत का वीडियो भी बनाया।
सुबह 10:35 बजे: पीड़ित अपने घर पहुंचे, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी वहां आ गई।
पीड़ित ने सवाल उठाया है कि जब वे सुबह 10:30 बजे गांव में मौजूद ही नहीं थे और रास्ते में 112 की गाड़ी के साथ थे, तो वे 2 किलोमीटर दूर से घटना स्थल पर हमला कैसे कर सकता हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी आत्मा ने वहां पहुंचकर मारपीट की हो?
अंकुश कुमार का यह भी सवाल है कि क्या महज 1 घंटे यानी 11:35 सुबह तक झगड़ा और FIR दोनों तय हो गए?
अंकुश कुमार का यह भी आरोप है कि कुछ पुलिस कर्मियों ने शिकायतकर्ता अखिलेश के साथ साठगांठ कर जल्दबाजी में यूपी पुलिस की छवि को खराब करते हुए फर्जी मुकदमा (U/s 351(3)/352/333 BNS) दर्ज करा दिया है।
खास बात यह है कि एफआईआर में शिकायतकर्ता ने स्वयं माना है कि वह खेत से एक गठ्ठड चारा काट कर लाया था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि 112 पर शिकायत करने और दिल्ली पुलिस में होने के कारण, यूपी पुलिस की छवि को खराब करने के उद्देश्य से स्थानीय कुछ पुलिस कर्मियों ने रंजिश रखते हुए यह एकतरफा कार्यवाही की है।
पीड़ित दिल्ली पुलिस दिल्ली पुलिस जवान ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए निम्नलिखित सबूतों की जांच की मांग की है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर गाड़ी (DL10CV2286) की टाइमिंग की जांच की जाए,मोबाइल नंबर (7428323849) की कॉल डिटेल, 112 पर की गई कॉल्स के मैसेज और लोकेशन डेटा और
सुबह 10:00 से 11:15 बजे के बीच 112 पीसीआर गाड़ी, थाना पुलिस की जीपीएस लोकेशन के साक्ष्य और मौके पर पुलिस के पहुंचने और रास्ते में 112 की गाड़ी से हुई बातचीत के वीडियो उपलब्ध कराया जाए।
इस संबंध में पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) पर भी शिकायत दर्ज कराई है और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि झूठी एफआईआर को रद्द कर दोषी पुलिसकर्मियों और साजिशकर्ताओं पर कानूनी कार्यवाही की जाए। @Uppolice@dgpup@UPGovt@CBIHeadquarters@digrangemeerut@adgzonemeerut@meerutpolice@myogiadityanath@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia@ACOUPPolice@VigilanceUP@India_NHRC
वजीराबाद रोड पर 'स्वीट्स' के पास सज रही जाम की महफिल: पुलिसिया 'छत्रछाया' में बेखौफ जारी नशे का काला कारोबार!
उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना भजनपुरा क्षेत्र अंतर्गत वजीराबाद रोड पर स्थित अग्रवाल स्वीट्स के बराबर में खुलेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, चिकन और जूस के स्टॉल की आड़ में लंबे समय से अवैध रूप से शराब पिलाने (आहाता) का काला कारोबार बेधड़क फल-फूल रहा है। पूर्व में भी इस संबंध में कई बार प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस व प्रभावी प्रशासनिक कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।
अरुण नामक व्यक्ति का 'बेखौफ' साम्राज्य
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'अरुण' नामक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि कानून के शिकंजे से बेफिक्र होकर चलाया जा रहा यह गोरखधंधा क्या बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव है? क्षेत्र में चर्चा आम है कि स्थानीय पुलिस की छत्रछाया और कथित सांठगांठ के चलते ही इस अवैध काम पर अब तक आंच नहीं आई है।
नशेड़ियों का जमावड़ा, महिलाओं की सुरक्षा पर सीधा खतरा
शाम ढलते ही इस मुख्य मार्ग पर नशेड़ियों का हुजूम जमा होने लगता है, जिससे पूरे इलाके में असामाजिक माहौल बन जाता है। सबसे बुरा असर क्षेत्र की महिलाओं और बच्चियों की आवाजाही पर पड़ रहा है।
मुख्य मार्ग होने के बावजूद महिलाएं वहां से गुजरने में असहज और भयभीत महसूस करती हैं।
शराबियों द्वारा फब्तियां कसने और हुड़दंग मचाने की आशंका से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
उठते गंभीर सवाल:
क्या थाना अध्यक्ष की मिलीभगत है? लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होना क्या पुलिसिया सांठगांठ की ओर इशारा करता है?
जिम्मेदारी से मुंह क्यों मोड़ा? क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन की महिला सुरक्षा के प्रति कोई नैतिक या कानूनी जवाबदेही नहीं बनती?
हादसे का इंतजार? क्या भजनपुरा पुलिस किसी बड़ी आपराधिक वारदात या अप्रिय घटना के होने के बाद ही नींद से जागेगी?
क्षेत्रीय नागरिकों ने आला पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि इस अवैध शराब के धंधे पर तुरंत कड़ा संज्ञान लिया जाए और संलिप्त लोगों के साथ-साथ अनदेखी करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। @DCPNEastDelhi@ACPBhajanpura@BhajanpuraSho@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiPolice@LtGovDelhi@govt_delhi