जो भी लड़का-लड़की अपने माता-पिता का अपमान करके प्रसिद्ध हो जाए और उसी को अपना हथियार बना ले, उसके गिरने की कोई सीमा नहीं हो सकती। हर युवा को ऐसे युवाओं से सचेत रहने की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों के मुद्दों पर संघर्ष करने के बजाय सस्ती लोकप्रियता और मीडिया की सुर्खियां बटोरने के लिए प्रायोजित ड्रामेबाज़ी करना AISA की पुरानी कार्यशैली रही है।
रांची की घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होती है, जहाँ तथ्यों से अधिक प्रचार को महत्व दिया जा रहा है। साथ ही, अभाविप स्पष्ट रूप से मानता है कि यदि किसी ने भी इस प्रकार की हरकत की है, तो वह निंदनीय है। अभाविप ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करता और न ही उसकी कार्यपद्धति इस प्रकार की रही है।
विद्यार्थी आंदोलनों को राजनीतिक नौटंकी का माध्यम बनाकर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। विद्यार्थी हितों के प्रश्नों का समाधान लोकतांत्रिक, जिम्मेदार और रचनात्मक संघर्ष से होगा न कि प्रायोजित घटनाओं और झूठे और सस्ते नैरेटिव गढ़कर।
जब केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन था तो इनके ऊपर स्याही फेंकने या इनको गाली देने वाले सब बीजेपी और RSS के लोग थे,
लेकिन आज जब झारखंड की कांग्रेस और जेएमएम के खिलाफ इनका भाषण चल रहा है तो भी इन पर स्याही फेंकने वाले बीजेपी और RSS के लोग हैं।
दोगलापन वामपंथियों की पहचान है।
राहुल गांधी की नीचता धूर्तता और दोगलापन देखिये
जो राहुल गांधी उर्फ पप्पू मोदी के घर में जबरदस्ती घुसने की मांग करता है
लेकिन जब राहुल गांधी के घर झारखंड के आंदोलन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर जब कुछ झारखंड के युवक उनसे बात करने के लिए उनके घर पर जाते हैं तब राहुल गांधी दिल्ली पुलिस को फोन करके कहता है कि इनको गिरफ्तार करके मेरे घर के सामने से ले जाओ इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में आने की
अब आप इसी से समझ जाओ कि यह राहुल गांधी उर्फ पप्पू कितना बड़ा धूर्त और दोगला है
अभिजीत दीपके अब खुले तौर पर भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
"Election Commission की जवाबदेही तय करनी होगी और Judiciary को ठीक करना होगा" जैसे बयान उनकी सोच को उजागर करते हैं। CJP का छात्र आंदोलन वाला नैरेटिव अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
और सुनिए, मोदी जी अभी भी समय है। अपनी शक्तियो को पहचानिए और उसका इस्तेमाल कीजिए। देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने वालों को जनता जवाब देना जानती है।
@amitmalviya बड़ा बेशर्म हैं भाजपा का यह IT Cell वाला. यहाँ भाजपा की जमीन खिसकती जा रही हैं और ये पक के दावों की बात कर रहा हैं. In जैसों के कारण @BJP4India का बेड़ा गर्ग होने वाला है.
झारखंड में छात्रों के समर्थन में आयोजित रैली के दौरान Republic TV के रिपोर्टर ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा से पूछा कि वह पिछले 14 दिनों से कहां थीं।
जवाब देने के बजाय नेहा बोरा ने पत्रकार को शेमलेस कहा।
पत्रकार को निशाना बनाया गया और नेहा बोरा की टीम ने यहां भी हंगामा करने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी गैरमौजूदगी और मीडिया के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
קיבלתי שיחת טלפון מראש ממשלת ישראל, בנימין נתניהו. סקרנו את ההתקדמות במגוון היבטים של השותפות האסטרטגית המיוחדת בין הודו לישראל, אשר ממשיכה להתחזק ולהתפתח בהתמדה.
כמו כן, החלפנו דעות בנוגע למצב הנוכחי במערב אסיה.
@netanyahu
LoP राहुल गांधी के आवास के बाहर अपनी मांगों को लेकर पहुंचे छात्रों को सुरक्षा कारणों से डिटेन कर लिया गया।
अगर यही घटना PM आवास के बाहर हुई होती, तो विपक्ष इसे "लोकतंत्र की हत्या", "तानाशाही" और "आवाज़ दबाने" का नाम देकर देशभर में हंगामा खड़ा कर देता।
राहुल जी, छात्रों को अपने घर के अंदर बुलाइए, उनकी बात सुनिए और झारखंड के शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा उनके हाथ में दीजिए। लोकतंत्र और जवाबदेही की बातें सिर्फ दूसरों के लिए नहीं, अपने दरवाजे पर भी लागू होनी चाहिए।
Received a phone call from Prime Minister Benjamin Netanyahu. We reviewed progress on various aspects of the India-Israel Special Strategic Partnership which continues to grow from strength-to-strength.
We also exchanged views on the current situation in West Asia.
@netanyahu
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जंतर मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन पर कहा है कि जेन-जी और जेन-अल्फा, पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने कहा- हमें उनकी बात सुननी चाहिए। उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ। अगर Gen-Z आंदोलन कर रही है, तो वह एंटी-नेशनल नहीं है। वे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनसे हमारा संबंध है। उन्हें हमारी बात समझनी चाहिए और हमें उनकी बात समझनी चाहिए।
संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान संपूर्णता से समझने की मांग करता है। मोहन जी का स्पष्ट संदेश सरकार के लिए है।कहीं भी किंतु परंतु नहीं है।संदेश साफ़ है।
सूचना -
आज 7 अगस्त को वामदल के विधानसभा घेराव से छात्रों का कोई लेना देना नहीं है।
Aisa की नेहा बोरा सिर्फ कांग्रेसियों के कहने पर ही वहां जा रही है, ताकि आंदोलन खराब हो जाए।
गोरखपुर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने देखकर जो बताया, यह सच्चाई अधिकांश स्थानों की है। बेहतर हो कि, यह नियमित तौर पर हो। राज्यपाल महोदय की यह बात कि, मुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के बाद ऐसा हो रहा है, सामान्य टिप्पणी नहीं है