@trailhead It has been an amazing journey. Today completed 2000 Badges.
Thanks a lot for providing a great learning experience.
P.S. - I'm still waiting for my All Star Ranger Swag Kit.
#Trailblazer#AllStarRanger#AgentblazerLegend
नहीं होगा। 25% क्षमता और 75% आरक्षण के कारण देश 2097 तक भी विकसित नहीं होगा। आपकी आत्मा मरने के बाद आपको कचोटेगी कि मेरे पास सब कुछ था, जनसमर्थन था, संख्या थी, विजन था और मैंने दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत के नाम पर सब बर्बाद किया।
आपके अंबेडकर-फुले प्रेम ने इस देश को बर्बादी की राह पर डाल दिया है।
Just a dipstick test.
This guy is a parasite that has stayed for far too long and delivered NOTHING. And, he himself might know that for his below post, people would show affection. Still went ahead and posted it.
That's the rot & intelligence that exists.
An ever-growing number of law-abiding, India-loving, working-class citizens who were once outraged by this kind of anarchy no longer feel anger. On the contrary, there's just calm.
They’ve accepted that the only option is to work hard and leave the country or, if they can't, work hard enough to ensure their children at least have the option to leave. Videos like this only strengthen their silent resolve.
मोदी जी, स्वयं के अभिमान को बगल में रखिए, बोलिए!
गोपाल राय इस पूरे आंदोलन के सूत्रधार हैं। सारा लॉजिस्टिक्स, योजना देख रहे हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन रामलीला मैदान तक पहुँचेगा। उन्हें रामलीला मैदान का अनुभव भी है, वो इसे लम्बा खींच भी लेंगे।
@BJP4India इनका कुछ न बिगाड़ पाई है, न बिगाड़ पाती दिखती है। ये न तो पंजाब में प्रदर्शनकारियों की पिटाई पर कुछ नैरेटिव बना पा रहे हैं, न केरल पर। न ये यह बता पा रहे हैं कि गहलोत और राहुल गाँधी किस मुँह से पेपर लीक पर बोल रहा है?
@narendramodi जी का व्यक्तिगत सम्मान/अहंकार/अकड़ वामपंथियों को अवसर दे रहा है कि वो इस बार शाहीन बाग और किसान आंदोलन के हायब्रिड मॉडल ला कर पूरे देश में ऐसे कॉकरोच पार्क बनवा देंगे। इसमें लोग मरेंगे, यह तय है।
बीच सत्र में मंत्री तो नहीं हटेगा, पर अब कॉन्ग्रेस अड़ गई है कि बिना उसके हम संसद में चर्चा नहीं होने देंगे। जब इनके अपने समर्थकों ने इनसे जनवरी से यही बात कही, तो ये चिढ़ा रहे थे कि गुजरात निकाय चुनाव जीत गए, बंगाल में 208 आ गया।
19 जुलाई तक मुझे विश्वास था कि इसे सरकार नियंत्रित कर लेगी, पर सरकार की नपुंसकता ने पुलिस को लाल किला वाली पिटाई याद दिला दी। हर तरफ पुलिस पर हो रही बर्बरता के चिह्न दिख रहे हैं।
‘@AmitShah भूलते नहीं’, यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है। नक्सली गतिविधियों को, कश्मीर को, NGO गिरोह को साधने में बहुत बड़ा रोल रहा है इनका। परंतु, उसके समानांतर CAA, किसान आंदोलन जैसी विफलताएँ भी हैं।
@PMOIndia में लोग हैं, @anil_baluni जैसे मँजे हुए मीडिया मैनेजर हैं सरकार के, क्या आप लोगों को लगता नहीं कि पीएम का एक ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ इस पूरी व्याधि को समाप्त कर देगा?
“मेरे प्यारे देशवासियो!
पिछले दिनों में विद्यार्थियों के नाम पर जो हो रहा है, उससे मुझे बहुत पीड़ा हुई है। विद्यार्थियों के हितों के लिए मैं उनके परिजन की तरह, पिता की तरह प्रतिबद्ध हूँ। मैं यह मानता हूँ कि पेपर लीक एक बहुत बड़ी समस्या है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है।
हम यह भी जानते हैं कि पेपर लीक की व्यापकता किसी एक सरकार से परे है। अतः हम शीघ्र ही देश के हर शिक्षा मंत्री के साथ, ब्यूरोक्रेसी के साथ एक वृहद चर्चा कर के, इसका समाधान निकालेंगे। प्रधानमंत्री के तौर पर यह मेरा व्यक्तिगत दायित्व है कि हम अपने बच्चों को एक स्वस्थ तंत्र दें।
हमने यह भी तय किया है कि 2024 में लाए पेपर लीक कानून को संशोधित कर, इस माफिया की जड़ तक जाएँगे। अब न केवल कंपनी, बल्कि हर व्यक्ति भी ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
ब्ला ब्ला ब्ला…
नमस्कार!”
तत्पश्चात्, दो-चार बड़े अधिकारियों को (CBSE चेयरमैन, NTA डायरेक्टर आदि) को सेवामुक्त करें, जाँच बिठाएँ। यदि नहीं किया तो, चापलूस आपको ‘मोदी-शाह पुराने नेता हैं’ का सुगम संगीत सुना कर बर्बाद कर देंगे।
बाकी, आप बेहतर जानते हैं।
आइटी सेल के टट्टी टट्टू अब यह बता रहे हैं कि इथेनॉल UPA ले कर आई थी और राजपत्र दिखा रहे हैं!
अरे भड़वों! जब तर्क नहीं है तो लड़चट्टों चुप क्यों नहीं रहते तुम लोग? पिछले बारह वर्षों से सत्ता में तुम हो। नीति पर गंभीरता से कार्य आरम्भ हुआ 2018 में। इंजन बने 2023 में। और तुम दिखा रहे हो कि नीति तो 2007 में आई?
अच्छा तो ये बताओ कि 2001 और 2003 में किस पैर्टी की सरकार थी? क्या वो तब से E20-30-85 बेच रहे थे? तुमने तब भी जनता को कॉन्फिडेंस में नहीं लिया, और तुमने आज भी बिना बताए जनता के EMI पर लिए इंजनों का बलात्कार किया है।
क्या UPA वालों ने गडकरी और हरदीप पुरी से कहा था कि बिना जनता को बताए कि इथेनॉल कितना मिक्स है, पेट्रोल कह कर बेचो। और उन गाड़ियों में भी डलवाओ जो बिलकुल भी इसके लिए नहीं बने हैं।
तुम्हारे पाँव के नीचे से भूमि खिसक रही है, और तुम अभी भी कॉन्ग्रेस और नेहरू को ब्लेम करने की राह देख रहे हो। चुल्लू भर पानी में डूब जाओ हरामखोरों।
कितना PR करोगे @nitin_gadkari का? और ये तुम नहीं करते पर करना पड़ रहा है क्योंकि आँच @narendramodi तक जा रही है। कुछ भी हो जाए, मोदी के कुर्ते का एक धागा हिलना नहीं चाहिए। बाकी देश में आग ही क्यों न लग जाए।
ऐसी भी क्या गुलामी करनी है बे? आत्मा तो मत बेचो दल्लों!
जितने वीडियो देख रहा हूँ लोगों के, जो पेट्रोल पम्प से सीधे बोतलों में पेट्रोल भरवा रहे हैं, उनमें से अधिकांश तो ऐसा दिखता है कि सरकार ने संभवतः E85 को E20 के नाम पर डालना आरम्भ कर दिया है।
फ्यूल और एथनॉल का सेपरेशन दिख रहा है। एक जगह देखा उसका रंग गुलाबी है ना कि डार्क ऑरेंज। कहीं तो लीची के जूस जैसा रंग भी दिखा।
यह अविश्वास इसलिए भी है क्योंकि @nitin_gadkari, @HardeepSPuri और @PMOIndia ने बिना किसी जागरूकता अभियान के, या उपभोक्ता सहमति के, पेट्रोल कह कर E20 हमारी टंकियों में डलवाना चालू कर दिया था, दो साल बाद पता चला कि ये तो पेट्रोल है नहीं और हमारी गाड़ी भी उसके लिए उचित रूप से तैयार नहीं है।
अब @narendramodi बताएँ कि ये क्या बिक रहा है पम्प पर? क्या पेट्रोल पम्प वाले अपनी तरफ़ से भी कुछ घपला कर रहे हैं? स्थानीय पुलिस फिर क्या कर रही है? आप हर बात को चुप्पी या फिर सोरोस का एजेंट कह कर टाल नहीं सकते।
Sarthak Goswami has exposed the ugly truth behind the ethanol narrative.
He travelled to Byrnihat to find out why a town with fewer than one lakh residents is more polluted than Delhi, Ghaziabad, and even Lahore.
What he found was shocking: over 80 factories crammed into a small area, relentlessly pumping pollutants into the air.
The irony? Many of these factories produce ethanol—the very fuel being promoted as a solution to pollution.
Now the question is simple: can Nitin Gadkari answer these concerns with facts, instead of branding critics as anti-national?
Sarthak Goswami has brilliantly exposed how Ethanol production is ruining a beautiful city.
He went to Byrnihat to investigate why a city with less than one lakh people is more polluted than Delhi, Ghaziabad & Lahore.
The reason? There are more than 80 factories in a small area, that are constantly pumping dust particles in the air.
The worst part is that these factories are producing Ethanol, the same product that is being sold as a solution to pollution.
I hope Gadkari can explain this without calling Sarthak a traitor.
Appealing for Work From Home (WFH) won’t change anything. If the govt genuinely wants it, it can strongly push or effectively enforce WFH in sectors where physical presence isn’t essential.
It’s common in the West but not in India because Indian companies still operate on a “presence equals productivity” mindset, where managers feel employees work seriously only when they are physically visible. If an employee isn’t exhausted by traffic, long hours, and physical attendance, they assume no real work is being done. There’s also a deeply ingrained feudal mindset where control, surveillance, and making juniors “feel the grind” is treated as management instead of actual productivity.
Otherwise, WFH can solve many problems for both individuals and the country. It reduces traffic, pollution, fuel consumption, stress, travel time, road accidents, and daily expenses for individuals while improving work-life balance. For India, it cuts crude oil consumption and import bills, reduces pressure on dollars, inflation, and urban infrastructure, while easing overcrowding in metro cities and saving huge amounts of productive time otherwise wasted in commuting.
तो चिंता इस बात की भी है कि मोदी जी के पोस्ट पर कम्यूनिटी नोट्स आ रहे हैं और उसे पाकिस्तानी रेट कर रहे हैं। मान लेते हैं कि पाकिस्तानी उसको रेट कर रहे हैं, तो प्रश्न यह है कि मोदी या भाजपा के अन्य लोग झूठ/प्रपंच लिख/बोल क्यों रहे हैं?
और यदि पाकिस्तानी हैंडल एक्सप्लॉइट कर रहे हैं, यह जानकारी आप सबको है तो, आपके दो मंत्रालय के कार्यालयों में सामूहिक रूप से आपसी हस्तमैथुन चल रहा क्या? वो कर क्या रहे हैं? विरोधियों के अकाउंट सस्पैंड करते हो, वो वापस आ कर मूतता है तुम्हारे ऊपर!
और इसका लोड मैं क्यों लूँ जो साला हर तरफ से सताया
जा रहा है? आप लोगों के तर्क हमने सुन रखे हैं कि हाँ यार, यूजीसी तो गलत है, पर… पर? गलत है, तो गलत है… ‘पर’ का लोड मैं क्यों लूँ? तुम लोग नब्बे दिन से चुप हो इस पर, तो ज्ञान रखो भीतर में!
तुम जानते हो कि सामान्य वर्ग के साथ क्या हो रहा है, तुम जानते हो हर दिन राजनैतिक समीकरणों की आड़ में डबलिंग डाउन ही चल रहा है, तुम जानते हो कि पार्टी को इससे यूपी में सबसे पहले परिणाम झेलना होगा, और फिर भी तुम्हें सोरोस, कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान दिख रहा है, तो धन्य हो तुम!
एक तरफ यह भी ताने कि ये लोग एक पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते, दूसरी तरफ तुम्हारी इसलिए भी फटी हुई है कि ‘इनका टार्गेट यूपी/योगी हैं’, तो पहले तय कर लो कि सवर्णों की औकात है या नहीं है।
यदि औकता नहीं है तो मिमियाना बंद करो। यदि नहीं है तो व्हाट्सएप्प में घुस कर स्वयं को हमजा अली मजारी कहना बंद करो। और यदि औकात है, तो जब सवर्ण समूह तुम्हें पेल रहे हैं, तो पार्टी को हराने का, मोदी के कम्यूनिटी नोट का लोड GC को क्यों दे रहे हो?
जहाँ तक ‘जीसी स्टेट’ और ‘जीसी लहसुन’ की माँग है, इस पर पचास बार मैं अपनी राय दे चुका हूँ: दो कौड़ी की झाँटू और इम्प्रैक्टिकल माँग है। जो यह माँग कर रहे हैं उन्हें न तो राजनीति समझ में आती है, न ही प्रेशर ग्रुप का लक्ष्य।
और जहाँ तक नेहा दास को समर्थन की बात है, तो वह खुल कर दूँगा क्योंकि वो हर दिन सामान्य वर्ग के साथ हो रहे पक्षपात पर लिख-बोल रही है। मैं किसी ग्रुप में नहीं हूँ, न ही किसी व्यवस्थित योजना का हिस्सा रहा हूँ, पर वैचारिक रूप से ऐसे लोगों को जो भी टार्गेट करेगा, मैं उनके विरोध में रहूँगा। उन्हें जो सहयोग चाहिए, दूँगा।
ग्रुप में पचास और लोग होंगे, जिन्हें मैं नहीं जानता, न ही उनकी हर बात का समर्थन करता हूँ, पर जो समूह मुझे ही सोरोस और कॉन्ग्रेस का अजेंट बोल चुका है, जिसने हर तरह की सीमाएँ लाँघी, उन दोगलों द्वारा किसी को एंटी-नेशनल कहने की अथॉरिटी नहीं मानता। तुम्हारा नेता कॉन्ग्रेस की माँग मान ले तो वो ‘मुद्दा छीन लिया’ हो जाता है, हम विरोध करें उसका तो हम एंटी-नेशनल?
मोदी या भाजपा का आपको बचाव करना है तो कहो उनसे कि अम्बेडकर की मूर्ति पूजा बंद करे। नहीं कर सकते तो जो ट्रोल करता है, उसके घर पुलिस न भेजे। उदिता त्यागी के परिजनों को क्यों परेशान किया? मेरे ऊपर मार्च से ही UP IB का सर्विलांस क्यों है?
हाउस अरेस्ट क्यों किया गया मुझे? अभी भी मेरे घर कौन आता-जाता है, इसकी मॉनिटरिंग क्यों है? मुझे यह मानसिक यातना क्यों दी जा रही है? मैं तो फिर भी अपना काम ही कर रहा हूँ, रो तो नहीं रहा हर जगह! तुम साले नेता के टट्टे हो कर भी विक्टिम बने घूमते हो।
मैंने यूजीसी पर नब्बे दिनों से बोला है, और तब तक बोलता रहूँगा, जब तक इनकी नीतियाँ नहीं बदलती। इस बीच, मोदी और भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगा ले, सोशल मीडिया पर तुम्हारी गलत नीतियों का विरोध अकेला भी करता रहूँगा।
डरा लो, अरेस्ट कर लो, छापे मार लो (मन की शांति के लिए), पर मैं यह बंद नहीं करूँगा। इसी तंत्र का हूँ, इसमें रह कर, इसके कल-पुर्जे ठीक भी करूँगा और इंजन में भी घुसना पड़े तो घुस कर पटरी बदलवाऊँगा।
और हाँ, इसके लिए मुझे पाकिस्तानियों की जरूरत नहीं है। आइटीसेलियों, पूर्व आइटीसेलियों और वानाबी आइटीसेलियों की %# मारने के लिए, अकेला ही काफी हूँ।
For all those giving Pravachan on my timeline by saying Kashmiri Pandits should have fought back. Kindly get lost!
You have not been a victim of terrorism.
You have not suffered silence from Govt and Injustice from courts!
You have not seen genocide!
We have! So kindly get lost!
Toilets Coverage in India
2014 :: 32%
2024 :: 99%
12 Crore Toilets were built by Modi Govt in first 5 years alone.
This is 2010 video during UPA time, when Manmohan Singh was the PM
उत्तम नगर में भाजपा के प्रिय ‘दलित-वंचित-शोषित-पीड़ित’ समाज के तरुण खटीक की हत्या के तीन दिन बाद, एक ट्वीट करके खानापूर्ति करने वाली भाजपा से क्षुब्ध हिन्दुओं ने स्वयं न्याय करने का निर्णय लिया और हत्यारे के घर को तोड़ रहे हैं।
@KapilMishra_IND चाहते तो कैमरा के साथ, रेखा गुप्ता के पीछे चलते हुए थोड़ा क्रेडिट ले सकते थे, पर पार्टी से आदेश होगा कि भाजपा हिन्दू-मुस्लिम नहीं करना चाहती। मोदी जी की रैली है, वहाँ के लिए समर्थन जुटाओ।
During 26/11, Pakistani terrorists entered & massacred Indians inside India for 3 long days
CONgress regime didn’t even had the balls to question Pakistan that time
Today they want an answer from the govt for an Iranian Vessel shot down by a US govt 440 Kms away from India
Wow 🤩
Let’s give slow clap to these useless clowns of the world
आपकी जानकारी के लिए 1984 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की हत्या हुई थी तो ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता खुमेनी साहब ने भी किसी प्रकार का बयान नहीं जारी किया था ।क्या करें आपको भूलने की बीमारी है