अमन नाश्ता कर रहे थे
रांची पुलिस उन्हें लेकर चली गई।
छात्रों का आंदोलन कवर करना पाप हो गया है क्या इस देश में?
जंतर मंतर पर छात्रों को गाली देते/अश्लील हरकतें करते दिखाना पत्रकारिता था लेकिन झारखंड के शालीन छात्रों की आवाज़ उठाना अपराध है क्या?
लेकिन “तानाशाह” तो मोदी हैं।गजबे है
A Mumbai student's speech goes viral -
"Chehre badalne walon ka itihas lamba hota hai"
"Not cockroaches... Hypocrisy survives every disaster"
"How can we blindly support a party when its entire manifesto is being unemployed?"
"They are taking advantage of the desperation of this generation"
"They call us Andhbhakt because you cannot see your own hypocrisy*
"Neutrality is not something that you declare; it is something that you demonstrate"
"24X7, you question the existing government. But why you undermine the reforms that this government has introduced?"
अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल ने पीएम @narendramodi से मुलाकात कर पंजाब के हालात के बारे में बताया कि “वहाँ लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बहुत ख़राब है और आम आदमी पार्टी की सरकार ने लूट मचा रखा है ।”
अकाली दल बीजेपी के साथ गठबंधन की इच्छुक है लेकिन फैसला बीजेपी को करना है ।
डॉक्टर जितेंद्र सिंह द्वारा IQ लेवल ऐसे ही नापा जाता है।
प्रियंका गांधी: एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान 150 बार पेपर लीक हुए हैं (अपुष्ट दावा), जिससे 750 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया की कुल आबादी लगभग 800 करोड़ है, तो श्रीमती प्रियंका गांधी का यह दावा कि भारत में 750 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं, कैसे संभव है?
प्रियंका वाड्रा जी ने जब बोलना शुरू किया तो मुझे लगा संदेवनशील हैं, लेकिन जिस तरह से गौमूत्र कहकर हंस पड़ीं, उससे स्पष्ट समझ आया कि, उन्हें छात्रों या पेपर लीक से कोई मतलब ही नहीं है। IIT Madras के निदेशक वी कामकोटी जैसे विद्वान व्यक्ति पर ऐसी टिप्पणी करते हिन्दू प्रतीकों का हास्य करके प्रियंका जी ने पुन: स्थापित किया कि, कांग्रेस पार्टी कैसे सोचती है। दुर्भाग्यपूर्ण
आम आदमी पार्टी के एक सांसद के दिल्ली आवास से जंतर मंतर के लिए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।खबर है कि चिकन बिरयानी, मटन बिरयानी के पैकेट सांसद के घर से जंतर मंतर भेजे जा रहे हैं।
जंतर मंतर पर खाने पीने की सामग्री पंजाब से भेजी जा रही है।आम आदमी पार्टी के इस सांसद के पास जंतर मंतर की सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी है।
I hope our govt starts a meaningful dialogue with Sonam Wangchuk and the student bodies so his health does not deteriorate any further ! Please end your fast Sonam. Your health is as important as this fight. You and the students are fighting for the future of India and for our youth. My heartfelt & unwavering support to every student & to Sonam in this fight to uplift & upgrade our educational system . More power to all of you. Jai Hind 🇮🇳
While it’s important to support our students and ask for educational reforms that positively impact the future of our youth, it’s also very important that peaceful protests by students are Not hijacked by anti national elements to create chaos & change the nature of the protest.
Seeing so much hate & divide online makes me wonder if bad elements in & outside our country have already started to work overtime to weaponise the anger & frustration felt by our students.
I have always believed in hard work, equality and excellence & that should never be compromised. I also believe in our democracy, law and order & our government, therefore I sincerely hope that both sides enter into meaningful & constructive dialogue & weed out any nefarious elements & agendas out of this protest & conversation , so the future is bright for our youth and for our democracy ! 🇮🇳 Jai Hind !
वामपंथी मादरचोद होते हैं। और उन्हें जहाँ भी, जो भी पेलता है, मुझे प्रसन्नता होती है। मैं इन लौड़ा-लहसुन वाली दार्शनिक बातों से वर्षों पहले ऊपर उठ चुका हूँ जो तुम हाफ-पैंट पर बेल्ट लगा कर लिख रहे हो।
दूसरी आज़ादी का सीज़न फिर से आ गया है..
ऐसा लगने लगा है कि देश में दूसरी आज़ादी की लड़ाई इतनी बार लड़ी जा चुकी है कि अब उसकी नंबरिंग ही गड़बड़ा गई है..
शाहीन बाग वाली भी दूसरी आज़ादी..
टिकैत आंदोलन के दौरान भी मंचों से दूसरी आज़ादी
अरविंद केजरीवाल के शुरुआती आंदोलन के दौर में भी इसे दूसरी आज़ादी की लड़ाई बताया गया था..
और अब फिर एक नया संस्करण लॉन्च हो गया है।
अब तो हालत ये है कि अगर किसी का ट्रैफिक चालान कट जाए, तो कोई न कोई उसे भी दूसरी आज़ादी की लड़ाई बता देगा।
इस हिसाब से देश में अब तक:
दूसरी आज़ादी,
दूसरी आज़ादी 2.0,
दूसरी आज़ादी रीलोडेड,
दूसरी आज़ादी रिटर्न्स,
दूसरी आज़ादी: द फ़ाइनल चैप्टर,
और शायद दूसरी आज़ादी सीज़न 7 भी रिलीज़ हो चुका है।
बेचारे इतिहासकार भी कन्फ्यूज़ होंगे कि आखिर असली दूसरी कौन सी थी..
हर आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हो सकता है, हर मुद्दे पर बहस भी हो सकती है। लेकिन हर बार उसे 1857, 1942 या 1947 जैसी ऐतिहासिक लड़ाई के बराबर बताना, उन असली बलिदानों की गंभीरता को हल्का कर देता है।
लगता है अब दूसरी आज़ादी कोई ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि आंदोलन लॉन्च करने का स्टैंडर्ड मार्केटिंग पैकेज बन चुकी है..
अब बस इंतज़ार इस बात का है कि अगला प्रेस कॉन्फ़्रेंस शुरू होते ही कोई बोले...नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है… दूसरी आज़ादी के न्यू अपडेट में 😄
श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी हुई, यह स्थापित हो चुका है।
यह व्यवस्था की असफलता है, ट्रस्ट की लापरवाही है।
यह पाप है।
गिनती करने में लगे कर्मचारियों ने इसमें हाथ साफ किया।
गिरफ्तारी हुई और पैसा भी बरामद हुआ।
ट्रस्ट के अधिकारियों के त्यागपत्र हुए और अब व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की बात हो रही है।
लेकिन इसके बाद से जिस तरह से चांदी की ईंटें, काकभुशुण्डि, सोने की रामचरितमानस आदि के बारे में खबरें आईं, उन्होंने इस घटनाक्रम में आग में घी डालने का काम किया।
अब जबकि यह स्पष्ट हो चुका है कि ये सभी चीजें सुरक्षित हैं, कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रस्ट को इन्हें दानदाताओं को वापस कर देना चाहिए क्योंकि उन्होंने अविश्वास व्यक्त किया।
जबकि इन वस्तुओं का दान देने वालों की चिंता स्वाभाविक थी।
वे इस बात से परेशान थे कि उनकी दान की गई वस्तु का कहीं दुरुपयोग तो नहीं हो रहा।
दान लेने और देने, दोनों के ही नियम हैं
दान सुयोग्य लोगों से ही लिया जाना चाहिए।
सनातन परंपरा में 'सत्पात्र' (लेने वाले की योग्यता) के साथ-साथ 'शुद्ध दान' (देने वाले की शुद्धता) पर भी जोर दिया गया है।
भगवद्गीता में सात्विक दान उसे माना गया है जो सही समय पर, सही स्थान पर, किसी सुयोग्य व्यक्ति को बिना किसी बदले की भावना के दिया जाए।
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्विकं स्मृतम्॥
(17वां अध्याय, 20वां श्लोक)
अर्थात् जो दान देना कर्तव्य है, ऐसा मानकर, बिना किसी उपकार की भावना के और बदले में कुछ पाने की इच्छा के बिना, योग्य स्थान, योग्य समय और सुयोग्य पात्र को दिया जाता है, वह दान सात्विक माना गया है।
बोलना होगा अजीत भारती की तरह।
हमारे गले में मटकी बांध दी गई ,झाड़ू बांधा गया, ये सब फर्जी बाते है, वामपंथियों की बकलोली है। जो 70 दशक में गढ़ी गई है।
@AjeetBhartii जैसे पत्रकारों का जमकर समर्थन करें म
The Garhwal Rifles are an infantry regiment of the Indian Army. It was originally raised in 1887 as the 39th (Garhwal) Regiment of the Bengal Army. It then became "The Royal Garhwal Rifles" as part of the British Indian Army, and after the Independence of India.