मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में सिद्धपीठ श्रीहनुमन्निवास, श्री अयोध्या धाम के महंत आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी ने शिष्टाचार भेंट की।
@idamittham_
रामरावणयोर्युद्धं रामरावणयोरिव।
श्रीराम और रावण का युद्ध श्रीराम और रावण के युद्ध जैसा है।
(इसकी अन्य कोई उपमा नहीं हैं।)
यह कहना है उन गन्धर्वों और अप्सराओं का, जो त्रेता में श्रीरामरावणयुद्ध देखने के लिये एकत्र हुये। कहने की आवश्यकता नहीं है कि वे युद्ध का अंग नहीं थे, बस द्रष्टा थे। परन्तु, उनमें इतना नैतिक बोध दिखाई पड़ता है कि वे नय-अनय को पहचानते हैं और अपना पक्ष चुनते हैं। युद्ध में सम्मिलित हुये बिना भी वे सत्पक्ष का समर्थन करते हैं, उसके पुरुषार्थ की सराहना करते हैं और उसके विजय की शुभकामना भी ‘जयतां राघवः संख्ये।’
वे दर्शक अपने नायक की पीड़ा-उसकी पराजय से एकाकार हैं और चिन्ता करते हैं-‘चिन्तामापेदिरे सर्वे..’
आज जब उन्हीं श्रीराम की भूमि भारत एक बार फिर अपने समय की अभिशप्त मनुष्यता से संघर्षरत है। जब राक्षस हुई मनुष्य जाति के अत्याचार से मनुष्यभाव के प्रति उपजे संशय को कम करने का युद्ध छिड़ा है तो रामायण-प्रसंग की अनेक छवियाँ हमारी चेतना में कौंध जाती हैं। यह यु्द्ध अनूठा है, एक ओर इच्छा पूर्वक लड़ाई छेड़ता हुआ राक्षस है क्योंकि यही उसके अभिशप्त जीवन की अनिवार्य वृत्ति है, जबकि दूसरी ओर धर्मविग्रह पुरुषोत्तम, जो परम क्षमाशील होने पर भी इस थोपी गयी लड़ाई को बाध्य होकर लड़ता है क्योंकि उसकी प्रतिज्ञा उसे अन्याय-अत्याचार के विरूद्ध लड़ने हेतु विवश करती है।
अभी रामायण-कथा और उसके युद्धप्रसंग का यह उल्लेख किसी कथा-प्रवचन भाव से नहीं, अपितु एक गहरी विसंगति को पहचानने के लिये है। यह विसंगति आज के तथाकथित गन्धर्व-अप्सराओं को लेकर है, जो आज छिड़े हुये युद्ध में अपनी बौद्धिक जारवृत्ति से ग्रस्त होने के कारण अपने स्वतःसिद्ध पक्ष की पीड़ाओं से एकाकार नहीं हो पा रहे हैं। नय-अनय की आभासी परिभाषायें रचते ये दुचित्ते दर्शक कहीं कवि, कहीं कलाकार, कहीं नर्त्तक, कहीं विदूषक तो कहीं आलोचक बने बैठे हैं।
पहलगाम की वादी में अपनी आँखों के समक्ष अपने जलते सुहाग पर क्रन्दन करती निरपराधिनी स्त्रियों को देखकर ये नट-नर्त्तक उनके दुःख की स्वाभाविकता को लेकर सन्देहशील थे। उनके व्याकुलता भरे वक्तव्यों की तथ्यात्मक समीक्षा कर रहे थे। पर आज जब उन निर्दोष जनों के हत्यारों को समर्थ सम्प्रभु राष्ट अपनी सैन्यशक्ति से उचित दण्ड देने के दिशा में आगे बढ़ा है तो अचानक इन भाड़े के विमर्शवादियों को मानवता की चिन्ता जाग गयी है। किसी को रक्त की समानता दिख रही है, कोई सैनिकों को सैनिक नहीं मनुष्य मात्र मानने और उनकी जीवनरक्षा की चिन्ता को स्वर दे रहा है। कोई कविता लिख रहा है, कोई गीत गा रहा है, कोई भाषण दे रहा है।
इन मायावादियों को यह ध्यान नहीं है कि रावण मायावी है तो श्रीराम मायापति हैं। हवा में पड़े सूखे पत्ते की भाँति मँडराते हुये जो लोग अपने जीवन की कोई एक दिशा निर्धारित नहीं कर सके हैं, वे भी राष्ट्र को उसके उचित-अनुचित की सीख देने को आतुर हैं।
तो,
ओ गन्धर्वों !
ओ अप्सराओं !
अभी भी समय है सुधर जाओ। अन्यथा जिस रावण के दशमुख होने पर तुम मुग्ध हो, उसके दशों मुण्ड उन्हींके पाँवों से ठोकर खाते कन्दुक बनेंगे, जिन्हे तुम वानर-भालु कहकर प्रसन्न होते हो।
समझ में कम आयेगा, इस विचार से सरलार्थ-
न चाहते हुये भी भारत को अपनी संवैधानिक प्रतिबद्धता के कारण पाकिस्तान को उसकी पात्रता का प्रसाद देना पड़ रहा है। भारतीय सैनिक जल-थल और नभ तीनों में ही असाधारण पुरुषार्थ कर रहे हैं। आवश्यकतानुसार वे अपने किये हुये की सार्वजनिक उद्घोषणा भी कर रहे हैं। प्रधानमन्त्री श्री @narendramodi की सरकार जैसी इच्छाशक्ति, कूटनीति और दृढ़ता का परिचय दे रही है, स्वतन्त्र भारत में उसका दूसरा उदाहरण दुर्लभ होगा। ऐसी परिस्थिति में अपनी दोहरेपन का बाजार स्थगित रखना उचित होगा। तथाकथित मानवतावाद के विषकीटों को अभी बिल में ही बन्द रखना ठीक होगा।
यह निर्णायक समय है, केवल युद्ध को लेकर ही नहीं। बल्कि मनुष्य और राक्षस का पक्ष स्थिर करने को लेकर भी। ध्यान रखो कि पाकिस्तान के सैकड़ों प्रहारों में से एक भी यदि तुम्हारी प्रेम-मड़ैया पर आ पड़ा तो अपनी प्रेम की बाँसुरी के साथ तुम्हारा भी अस्तित्व सड़ान्ध भरे एक टुकड़े से अधिक नहीं मिलेगा।
इस लिये अपनी बौद्धिक जारवृत्ति त्यागकर सम्पूर्ण निष्ठा के साथ राष्ट्र के मंगल की भावना रखो। सारी दुनिया की दाई बनने के स्थान पर उनके सगे बनकर रहो, जिनके साझे में से तुम्हारी रोटी का टुकड़ा भी आता है। छद्म मानवता छोड़कर शुद्ध भारतीयता को स्वीकार करो, क्योंकि बरसती हुई आग से तुम्हारा सर विश्व नहीं भारत के लाल बचा रहे हैं।
@AmitShah@rajnathsingh@DrSJaishankar
शिक्षा, संस्कार और सेवा का ध्येय लिए...
मीरजापुर में निर्माणाधीन यह 'सेवाज्ञ गुरुकुलम् एवं गोकुलम्' हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन-शैली को नए आयाम प्रदान करेगा।
सृजन के इस महायज्ञ में आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।
@MangalSAngadi
सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा हरिद्वार में आयोजित दो दिवसीय ‘युवा धर्म संसद-2024’ में देश के सुविख्यात थिंकर और @RSSorg के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख माननीय श्री @SunilAmbekarM जी का पाथेय प्राप्त होने जा रहा है।
सेवाज्ञ परिवार और हरिद्वार वासियों की ओर से आपका हार्दिक अभिनंदन!
मुख्यमंत्री जी का क्लियर मैसेज, इज्जत से खिलवाड़ करोगे तो छोड़े नहीं तोड़े जाओगे।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ने अयोध्या रेप पीड़िता से मिलकर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, मुख्यमंत्री जी के आदेश पर केस के आरोपी की अवैध संपत्ति को जमींदोज करता बुलडोज़र..
#bulldozer#crimes
सेवा का समाज के हर क्षेत्र में है अत्यधिक महत्व: माननीय सांसद श्री @LalluSinghBJP जी
सेवा का अर्थ है स्वयं को लुटा देना: पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनंदिनीशरण जी महाराज
@idamittham_
श्री हनुमत निवास, अयोध्या धाम में सेवाज्ञ संस्थानम् की राष्ट्रीय कार्यशाला का पूज्य महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी की उपस्थिति में उद्घाटन किया।
@idamittham_
जय श्री सीताराम🚩
जय श्री अयोध्या धाम🚩
आज युवाओं में आत्महीनता की भावना है। उनको छोटी-छोटी कथित असफलताएं विचलित कर रही हैं।
ऐसे समय में सेवाज्ञ संस्थानम् और @Mips2021 के तत्त्वावधान में आगामी 09 फरवरी को आयोजित यह सेमिनार महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
आप सभी का अभिनन्दन!
'आत्मबोध से व्यक्तित्व विकास एवं करियर के तनाव से मुक्ति' विषय पर पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज का व्याख्यान...
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Modern Group of Institutions, इंदौर परिसर में आज ‘आत्मबोध से व्यक्तित्व विकास व करियर के तनाव से मुक्ति’ विषयक संवाद कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि के रूप में पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज ने कहा कि करियर व व्यक्तित्व विकास के लिए आत्मबोध अत्यंत महत्वपूर्ण है।
‘उत्तिष्ठ भारत’ की कड़ी में वीरभूमि राजस्थान के बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित ‘महानता के स्वप्न और आत्मोन्नयन का संघर्ष’ विषयक संगोष्ठी में हार्दिक अभिनंदन!
‘क्या लें-क्या छोड़ें’ के भंवर में डूबते-उतराते युवाओं के लिए यह आयोजन विशेष होने वाला है।
सेवाज्ञ संस्थानम् के संरक्षक पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनीशरण जी महाराज और @MGSU_University के मा. कुलपति प्रो. @imanojdixit जी के मध्य शिष्टाचार भेंट हुई।
इस अवसर पर महाराज जी ने काशी में आयोजित महामना महोत्सव की स्मारिका भी उन्हें भेंट की।
@idamittham_