The world has normalized the killing of Palestinian children.
Every day, more lives are lost in Gaza, yet the outrage fades and the headlines disappear.
Silence in the face of dead children is not neutrality it is moral failure. 😞
#Gaza#CeasefireNow
Delhi: Dr Shujaat Ali Quadri, Chairman of the Muslim Students Organization of India says, "Badruddin Ajmal has been given a notice by the Jamaat-e-Ulema-e-Hind. One thing that is not clear in the notice is that it seems he has been issued it regarding his association with Asaduddin Owaisi. The notable aspect is that Owaisi’s party has been called communal. You may disagree with his politics or strategies, but calling his party communal is disappointing and worrying. The Jamaat-e-Ulema-e-Hind should clarify the basis for this..."
What Happened on 8th of Shawwal 1344 (21 April 1926) in Jannat al Baqi?
A tragedy the Muslim will Never forget. Jannat al-Baqi was destroyed by Al Saud Family.
A sacred cemetery with centuries of visible sacred history was erased.
A Thread🧵:
A Delegation of #MSO under its National President Maulana Ariful Qadri and Dr. Shujaat Ali Quadri had the honor of visiting Markaz Ahle Sunnat, Dargah Aala Hazrat, Bareilly, where they met with the Grand Mufti of India Hazrat Asjad Raza Khan @MuftiAsjadRaza and also with Vice president of Jamat Raza E Mustafa Hazrat Farman Raza Khan.
During this significant meeting, various important Milli issues concerning the Muslim community were discussed.
Such engagements strengthen our connection with esteemed religious leadership and pave the way for collective efforts towards the betterment of Sunni Community.
#MSO #Bareilly #DargahAlaHazrat
21 मार्च 2013 का दिन पूरी उम्मत के लिए बहुत दुख का दिन है। इसी दिन सीरिया के बड़े आलिम शैख़ मुहम्मद सईद रमज़ान अल-बूती को वहाबी दहशत गर्दो ने उस वक्त शहीद कर दिया गया, जब वह दमिश्क की एक मस्जिद में बैठकर लोगों को कुरआन पढ़ा रहे थे।
शैख़ बूती सिर्फ एक आलिम नहीं थे, बल्कि एक रहनुमा थे उनकी बातें, उनकी तालीम और उनकी किताबें आज भी लोगों के लिए राह दिखाने का काम कर रही हैं।
उनकी शहादत हमें यह याद दिलाती है कि सच और इल्म की आवाज़ को दबाने की कोशिशें हमेशा होती रही हैं, लेकिन ऐसे लोग अपने काम और अपनी बातों से हमेशा जिंदा रहते हैं।
आज उनके इंतकाल के दिन हम उन्हें दिल से याद करते हैं और दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें जन्नत में ऊँचा मकाम दे और हमें भी उनकी तरह सही रास्ते पर चलने की तौफीक दे।
अल-फ़ातिहा 🤲
#RamadanAlBouti
मस्जिद अल-अक़्सा में नमाज़ अदा करने जा रहे बेगुनाह फ़िलिस्तीनियों पर इज़राइली पुलिस की फायरिंग न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। इबादत करने वालों पर गोलियां चलाना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म की बात है।
पिछले कई दशकों में पहली बार मस्जिद अल-अक़्सा के दरवाज़े बंद कर दिए गए और ईद की नमाज़ तक नहीं होने दी गई यह इज़राइल की नीतियों की सबसे शर्मनाक तस्वीर है।
यह घटना साफ दर्शाती है कि धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। दुनिया को इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।
#Aqsa #AlAqsa
यौम-ए-बद्र: सब्र, आत्मरक्षा, अमन और ईमान की ऐतिहासिक जीत
Battle of Badr इस्लामी इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है जब सीमित साधनों, कम संख्या और कठिन परिस्थितियों के बावजूद हक़, सब्र और ईमान की ताकत ने बड़ी शक्ति पर विजय प्राप्त की। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब किसी समुदाय पर अन्याय, अत्याचार और अस्तित्व का संकट हो, तब आत्मरक्षा का अधिकार केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक और मानवीय सिद्धांत भी है।
यौम-ए-बद्र का सबसे बड़ा संदेश यह है कि इस्लाम युद्ध को पसंद नहीं करता, लेकिन जब अमन, इंसाफ और जीवन की रक्षा का प्रश्न सामने हो, तब धैर्य, अनुशासन और नैतिक साहस के साथ खड़े होना आवश्यक होता है। बद्र की लड़ाई आक्रामकता का प्रतीक नहीं थी, बल्कि यह आत्मरक्षा, अस्तित्व और न्याय की रक्षा की लड़ाई थी, जिसमें अल्लाह पर भरोसा, एकता और सच्चाई की जीत हुई।
यह ऐतिहासिक अवसर हमें यह भी सिखाता है कि वास्तविक विजय केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि नीयत की पवित्रता, नेतृत्व की ईमानदारी और सामूहिक धैर्य से प्राप्त होती है। बद्र के मैदान में मिली सफलता ने यह सिद्ध किया कि जब उद्देश्य शांति, न्याय और सत्य की रक्षा हो, तो कमज़ोर समझे जाने वाले लोग भी इतिहास बदल सकते हैं।
आज के दौर में यौम-ए-बद्र हमें यह संदेश देता है कि मुसलमान अमन, भाईचारे और सामाजिक न्याय के पक्षधर रहें, लेकिन अपने अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा के प्रश्न पर सजग भी रहें। इस दिन की याद हमें संयम, आत्मविश्वास और नैतिक दृढ़ता के साथ समाज और राष्ट्र में सकारात्मक भूमिका निभाने की प्रेरणा देती है।
यौम-ए-बद्र केवल एक ऐतिहासिक विजय नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सब्र, आत्मरक्षा, अमन और ईमान मिलकर हर कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
#Badr #battleofbadr
Pl do read this Article Published in @DFRAC_org on How Pakistan linked social media accounts are intensifying and amplifying the local ethnic conflict in #Manipur by spreading coordinated narratives that shape perceptions far beyond the region’s actual dynamics.
जो अपने नबी का नहीं हुआ वो किसी और का किया होगा..
ये वहाबी इस्लाम मुसलमानों के ईमान के लिए सबसे बड़ा खतरा है
الفوزان: "كثرة التردد على قبر النبي ﷺ من وسائل الشرك حتي لو كان التردد من أجل الصلاة والسلام عليه"
हुजूर के रौज़े पे जाने को शिर्क कह रहे हैं
मुस्लिम यूथ आर्गेनाइज़शन ऑफ़ इंडिया (MYO) के संयोजक डॉ शुजाअत अली क़ादरी और MSO के वाइस चेयरमैन मुदस्सर अशरफी ने कुआलालंपुर-मलेशिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फ़िलिस्तीन कॉन्फ़्रेंस में भाग लिया।
डॉ. क़ादरी ने फ़िलिस्तीन के मानवीय संकट, शांति, न्याय और मानवाधिकारों के मुद्दों पर अपने विचार रखे तथा वैश्विक समुदाय से फ़िलिस्तीनी जनता के लिए ठोस मानवीय सहायता और स्थायी समाधान की अपील की।
मुस्लिम यूथ आर्गेनाइज़शन ऑफ़ इंडिया (MYO) के संयोजक और @msoofindia के चेयरमैन @shujaatQuadri कुआलालमपुर मलेशिया मे आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिलिस्तीन कांफ्रेंस मे हिस्सा लेते हूए
शबे मेराज वह मुक़द्दस रात है जब रहमतुल्लिल आलमीन, पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ को अल्लाह तआला ने अपने खास क़ुरब से नवाज़ा। यह रात न सिर्फ़ इस्लामी इतिहास की सबसे अज़ीम रातों में से एक है, बल्कि इंसानियत के लिए हिदायत, सब्र और इबादत का बे-मिसाल पैग़ाम भी है।
नबी-ए-करीम ﷺ तमाम इंसानों के लिए रहमत बनकर आए। आपका किरदार, आपकी सादगी, आपका सब्र और आपकी इंसाफ़ पसंदी पूरी मानवता के लिए मशाल-ए-राह है। आपने अंधेरे में डूबी दुनिया को तौहीद, इंसाफ़ और अख़लाक़ की रौशनी दिखाई। शबे मेराज पर नमाज़ का तोहफ़ा मिलना, उम्मत-ए-मुस्लिमा पर अल्लाह का सबसे बड़ा करम है और यह करम हमें सीधे नबी ﷺ के वसीले से मिला।
इस मुक़द्दस सफ़र का अहम मरकज़ रही मस्जिद अल-अक्सा, वह पाक सरज़मीन जहाँ तमाम अंबिया (अलैहिमुस्सलाम) ने इकट्ठा होकर नबी ﷺ की इमामत में नमाज़ अदा की। मस्जिद अल-अक्सा इस्लाम का तीसरा हरम है और यह मुसलमानों की अकीदत, इतिहास और पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है।
मस्जिद अल-अक्सा सिर्फ़ एक इमारत नहीं, बल्कि यह ईमान, सब्र और मुक़ावमत की निशानी है। यह वह जगह है जहाँ से मेराज की शुरुआत हुई और जहाँ से इंसानियत को यह पैग़ाम मिला कि इबादत, इंसाफ़ और अख़लाक़ के बिना कोई क़ौम बुलंदी हासिल नहीं कर सकती।
शबे मेराज हमें याद दिलाती है कि नबी ﷺ की तालीमात पर अमल ही कामयाबी की कुंजी है नफ़रत की जगह मोहब्बत, ज़ुल्म की जगह इंसाफ़, और मायूसी की जगह उम्मीद। साथ ही, मस्जिद अल-अक्सा की हिफ़ाज़त और उसकी मुक़द्दस हैसियत को समझना हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है।
आइए, इस मुक़द्दस रात में हम दुआ करें कि
अल्लाह तआला हमें नबी ﷺ की सुन्नत पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए, मस्जिद अल-अक्सा की हिफ़ाज़त फ़रमाए, और पूरी दुनिया में अमन, इंसाफ़ और भाईचारा क़ायम करे।
🤍 दुरूद-ओ-सलाम हों नबी-ए-करीम ﷺ पर और सलामती हो मस्जिद अल-अक्सा पर। 🤍
हज़रत शहीद सैय्यद अब्दुल गनी शाह बाबा की पाक मजार पर बुलडोज़र चलाकर उसे ध्वस्त करना अत्यंत शर्मनाक, अमानवीय और घोर निंदनीय अपराध है।
यह केवल देवरिया की एक ऐतिहासिक मजार को गिराने का मामला नहीं है, बल्कि लाखों की गहरी आस्था, सदियों पुरानी गंगा–जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सौहार्द पर किया गया सुनियोजित हमला है।
ऐसी कायरतापूर्ण कार्रवाइयों से न तो सच दबाया जा सकता है और न ही जनता की आस्था को मिटाया जा सकता है। यह ज़ुल्म इतिहास के काले पन्नों में दर्ज होगा और अवाम इसे कभी माफ नहीं करेगी।