Tamil Nadu
Governors are agents of BJP
They maul the constitution to serve BJP’s interests
Call Vijay (leader of single largest
party)
Swear him in as CM
Let him prove his majority on the floor of the House
No post poll alliance in majority
Sarkaria Commission
Settled law
But who listens !
A woman is allegedly seen losing her cool on Maharashtra cabinet minister Girish Mahajan, over the traffic snarl caused by the BJP morcha in Mumbai on Tuesday evening. This was during a protest march on the issue of the Women's Reservation Bill. She was heard asking the minister to protest on a ground, and not hold up the traffic by marching on the streets. The opposition hit out at the BJP while appreciating the woman.
- @vinivdvc reports
Video: Special Arrangement
हमारे यहाँ अपराध से ज्यादा अपराधी की सामाजिक पहचान देखी जाती है। ऊँची चौखटों के भीतर वही काम “सिस्टम” कहलाता है और झोंपड़ी, बस्ती, दलित मोहल्ले, आदिवासी परिवार या किसी पहली पीढ़ी की अफ़सर के साथ वही काम “चरित्र” बन जाता है। लोग कहते नहीं, लेकिन उनके वाक्यों के नीचे लिखा रहता है; देखो, इन्हें मौका मिला और ये ऐसे निकले। यह बात वे उन लोगों के बारे में नहीं कहते जिनके बाप-दादा अवसरों को ऐसे खाते रहे जैसे वह वंशानुगत भोजन हो। वहाँ चोरी भी खानदानी शिष्टाचार की तरह पेश की जाती है।
और महिला हो तो समाज की निर्दयता में एक अतिरिक्त चमक आ जाती है। “खा गई” यह वाक्य सिर्फ आरोप का शोर नहीं होता, यह उस गहरी स्त्री-विरोधी संस्कृति की खड़खड़ाहट होती है जो औरत को ऊँचे पद पर देखकर पहले ही असहज रहती है। पुरुष पर आरोप लगे तो लोग कहते हैं : चलो, निकल गया तेज़। महिला पर आरोप लगे तो कहते हैं : देखा, औरतों को यही होता है, या फिर —इतनी जल्दी! मानो उसे ईमानदार होने का प्रमाण हर घंटे देना था; क्योंकि वह महिला है; क्योंकि वह वंचित वर्ग से है; क्योंकि उसकी सफलता उन्हें शुरू से संदिग्ध लगती थी।
सच यह है कि हमारा समाज भ्रष्टाचार से उतना परेशान नहीं है, जितना प्रतिनिधित्व से। उसे यह नहीं सालता कि कौन खा रहा है; उसे यह सालता है कि अब खाने वालों की मेज़ पर वे लोग भी दिखने लगे हैं जिन्हें सदियों तक रसोई के बाहर रखा गया था। इसलिए हर खबर के भीतर एक छिपा हुआ सामाजिक अभियोग भी चलता है। कानून अपना काम करे, आरोप सिद्ध हों तो दंड मिले; इस पर किसी को एतराज़ नहीं होना चाहिए। लेकिन समाज का चेहरा तभी पकड़ा जाता है जब वह न्याय की भाषा में पूर्वग्रह बोलने लगता है। और हमारे यहाँ यही सबसे पुरानी, सबसे चालाक और सबसे सम्मानित बेईमानी है!
@tribalvoice99 यही हमारे था फर्स्ट ईयर में कंप्यूटर साइंस और मैथ्स में 60-70% का फेल होना कन्फर्म था और पास होने वाले सभी केटेगरी और फेल होने वालों में भी सभी केटेगरी के ।
मीणाओ को बहुत एडवांस बताया जा रहा था और यहाँ ऐसी तरीके अपनाये जा रहे है की राजस्थान में किसी भी एसटी को एक भी नौकरी न दी जाए, इनकी नफरत का कोई अंत नहीं है.
सारे बड़े पदों पर मीणा और अन्य लोग बैठे होंगे, हमारे ब्राह्मण, बनिया के बच्चों को नौकरी नहीं मिलेगी: विराट हिंदू के नाम पर गांव गांव में जहर फैला रहे जातिवादी लोग
ब्राह्मण बनियों की नजर में SC ST OBC कितनी हिंदू है ये इस विराट हिंदू सम्मेलन से समझ सकते हैं, ये विराट हिंदू सम्मेलन सिर्फ इस जगह ही नहीं हो रहा है बल्कि लगभग हर तहसील के हर बड़े गांव में हो रहा है जहां इसी प्रकार से हिंदू के नाम पर ब्राह्मण और बनिया वर्ग को फायदा पहुंचाने वाले एजेंडे चलाए जाएंगे।
चित्तौड़गढ़ में SC ST OBC वर्ग के खिलाफ बोल रहे इस विराट हिंदू सम्मेलन के वक्ता को सुनकर आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन ऐसे सम्मेलन पार्क से लेकर बंद कमरों और सोशल मीडिया में खुले से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक में हर साल होते रहे हैं जहां हिंदू के नाम पर ब्राह्मण और बनिया समाज अपने वर्ग के फायदे के लिए एजेंडे चलाए जाते हैं और इन वर्गों के एजेंडों में रोड़ा अटकाने वाली सब से बड़ी या शिक्षित जाति को टारगेट पर लिया जाता है।
आज मैं अपनी प्रोफाइल पिक्चर (DP) बदलकर #SaveAravalli अभियान का हिस्सा बन रहा हूँ। यह सिर्फ एक फोटो नहीं, एक विरोध है उस नई परिभाषा के खिलाफ जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को 'अरावली' मानने से इंकार किया जा रहा है। मेरा आपसे अनुरोध है कि अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर इस अभियान से जुड़ें:
अरावली के संरक्षण को लेकर आए इन बदलावों ने उत्तर भारत के भविष्य पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह निर्णय हमारे अस्तित्व के लिए खतरनाक है क्योंकि:
1️⃣ मरुस्थल एवं लू के खिलाफ दीवार: अरावली कोई मामूली पहाड़ नहीं, बल्कि कुदरत की बनाई 'ग्रीन वॉल' (Green Wall) है। यह थार रेगिस्तान की रेत और गर्म हवाओं (लू) को दिल्ली, हरियाणा और यूपी के उपजाऊ मैदानों की ओर बढ़ने से रोकती है। अगर छोटी पहाड़ियाँ (Gaping Areas) खनन के लिए खुल गईं, तो रेगिस्तान हमारे दरवाज़े तक आ जाएगा और गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा देंगी।
2️⃣ प्रदूषण से रक्षा: ये पहाड़ियाँ और यहाँ के जंगल NCR और आसपास के शहरों के 'फेफड़ों' (Lungs) की तरह काम करते हैं। ये धूल भरी आंधियों (Dust Storms) को रोकते हैं और जानलेवा प्रदूषण को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। दिल्ली और आसपास के इलाके में अरावली के बावजूद इतनी गंभीर स्थिति है तो अरावली के बिना कैसी स्थिति होगी, उसकी कल्पना करना भी वीभत्स है।
3️⃣ भूजल (Groundwater): अरावली हमारे लिए पानी का मुख्य रिचार्ज ज़ोन है। अरावली की चट्टानें बारिश के पानी को ज़मीन के भीतर भेजकर भूजल रिचार्ज करती हैं। अगर पहाड़ खत्म हुए, तो भविष्य में पीने के पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा,जिससे वन्यजीव लुप्त होने की कगार पर आ जाएंगे तथा इकोलॉजी को खतरा होगा।
वैज्ञानिक सच यह है कि अरावली एक निरंतर शृंखला (Continuous Chain) है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बड़ी चोटियाँ। अगर दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो सुरक्षा टूट जाएगी।
📢 हमारी अपील:
हम केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से विनम्र निवेदन करते हैं कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस परिभाषा पर पुनर्विचार (Reconsider) करें। अरावली को 'फीते' या 'ऊंचाई' से नहीं, बल्कि इसके 'पर्यावरणीय योगदान' (Ecological Impact) से आंका जाए।
#SaveAravalli
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The Tatas have made a windfall at the cost of public exchequer.
No wonder the crony tycoons continue to side with the corrupt regime.
Tata Group donated Rs 758 cr to BJP in April 2024 - largest donation ahead of LS polls
In Feb, Modi government had cleared Tata's semiconductor units with 50% central subsidy which comes to Rs 44,203 cr
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