@Kshivasp_IND भाई आप गलत तरीके से यह वीडियो पोस्ट कर रहे हो। यह वीडियो मेरा है। लेकिन पिछले सत्र है। जब विपक्ष ने महिला विधेयक को पास नहीं होने दिया था तब सत्ता पक्ष के लोगों ने मकरद्वार पर प्रदर्शन किया था
कोई कुख्यात अपराधी, जिसका ज़िंदा रहना, समाज के लिए खतरा बन जाए, उसका एनकाउंटर समझ में आता है। भारत तिवारी कोई हत्यारा, लुटेरा, बलात्कारी नहीं था। दामन दाग़दार नहीं था। सिर्फ 30 साल की उम्र में अपने माँ -बाप और परिवार की चिंता किए बग़ैर ग़रीबों के लिए जान देने वाले को आज के दौर में “विक्षिप्त” ही कह सकते हैं । प्रशासन भी विक्षिप्त कह रहा है।
क्रांति से गाँव के हालात बदलने की आस लगाने वाला एक जुनूनी युवा था भरत तिवारी, जो सिर्फ इसलिए बवाल करता है कि सारा प्रशासन उस गाँव तक चलकर आए और सच्चाई देखें कि कैसे बिलौटी गाँव के कटान पीड़ित गरीबों(ज़्यादातर दलित और पिछड़े) को बसने के लिए गड्ढे की जमीन दी गई है, जहां पानी भर जाता है। भरत की मांग थी कि गड्ढे में आठ-दस फुट मिट्टी भरी जाये। ताकि, कटाव पीड़ित जमीन पर मकान बना सकें। लेकिन, दुर्भाग्य देखिए कि उसी गड्ढे के पास उसका एनकाउंटर हो गया। बेशक, भरत का हथियार उठाने और लड़ने का तरीक़ा ग़लत था, लेकिन उसकी माँग नहीं। यही बात उसे एक अपराधी से अलग करती है और यहीं प्रशासन की ज़िम्मेदारी संतुलित बर्ताव की बढ़ जाती थी।
गड्ढे में मिट्टी भरने की माँग पूरी होती तो शायद यह नौबत न आती।युवक वीडियो में कहता भी है कि “तुम सब यहाँ आकर जाल में फँस गए, यही मैं दिखाना चाहता था।”प्रशासन को गाँव में लाने का लक्ष्य पूरा होते ही असलहा फेंक कर सरेंडर कर देता है। मतलब, उसका लक्ष्य हिंसा का नहीं सिर्फ हालात को दिखाने का था। फिर घेरकर उसे गोलियों से भून डालना सरासर हत्या है।
जिस तरह से भरत तिवारी की अंतिम यात्रा में हर जाति के हज़ारों लोग उमड़ पड़े, वो बताता है कि उस युवक ने अपने इलाक़े के लिए क्या लड़ाई लड़ी था।आज उसके एनकाउंटर पर सबसे ज़्यादा इलाक़े के दलित और पिछड़े आँसू बहा रहे हैं।
राज्यसभा के उपसभापति @harivansh1956 जी सांसद और उपसभापति के तौर पर संसद में 12 साल का लेखा-जोखा उन्होंने लिखित पेश किया है। हर किसी को यह पढ़ना जरूर चाहिए। 12 साल में क्या-क्या उन्होंने काम किए हैं और #कृषि बिल के बारे में भी लिखा है.. सांसद निधि फंड का इस्तेमाल बेमिसाल है..
ये है नोएडा पुलिस. उत्तर प्रदेश पुलिस. असंवेदनशील, आक्रामक, अहंकारी, अक्खड़, असभ्य पुलिस. ये मज़दूरों की आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों को भी नहीं बख़्शती. उनसे ख़राब व्यवहार करती है. नोएडा NSEZ सेक्टर 83 में एक प्रोटेस्ट चल रहा था. फैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूर अपना वेतन बढ़ाने की मांग कर थे. आसमान छूती महंगाई के बीच भी फ़ैक्ट्री मालिक नए श्रम क़ानून नहीं मान रहे. कम पैसों में ज़्यादा काम करा रहे. यानी विशुद्ध शोषण.
इसके ख़िलाफ़ समाज का सबसे कमज़ोर तबका सड़क पर है और हमारी पुलिस से उन्हें मदद या इंसाफ़ तो छोड़िए, हमदर्दी तक नहीं मिल रही. ज़िंगाबाद मज़दूरों की ख़ैर-खबर लेने उनके बीच पहुँचा था और ज़िंगाबाद के एक सवाल पर पुलिस अधिकारी किस तरह भड़क गए ये आप इस वीडियो में देख ही सकते हैं. ये व्यवहार साफ़ तौर पर बदतमीज़ी है.
यूपी पुलिस भले ही अपने फ़र्ज़ से मुँह मोड़ ले, हमें अपना काम अच्छी तरह से मालूम है. ज़िंगाबाद कमज़ोरों की आवाज़ उठाता रहेगा.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैया जी जोशी ने आठवें अयोध्या पर्व में कहा कि अयोध्या पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि भक्ति, अध्यात्म, विचार मंथन का केन्द्र होना चाहिए। अयोध्या राष्ट्र निर्माण की ऊर्जा का केन्द्र बनेगा। लेकिन इसके लिए हम सब को अपने भीतर प्रभु श्रीराम के आदर्श का स्मरण करना होगा।
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