मस्जिद में एक आदमी नमाज़ पढ़ रहा था , नमाज के दौरान उसकी प्यारी मासूम बच्ची बार बार उस आदमी के ऊपर आकर खेलने लगी ,
एक बाप का बेटी के लिये कितना प्यार होता है वो आप देख सकते है ,
मौलाना अरशद मदनी का बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि एक ऐसे ऐतिहासिक और संस्थागत ढांचे का वर्णन है जिसे भारत के अपने आयोगों, रिपोर्टों और शैक्षणिक अध्ययनों ने बार-बार दर्ज किया है। मुस्लिम प्रतिनिधित्व की वास्तविकता समझने के लिए कुछ मूलभूत तथ्य जानना ज़रूरी है।
स्वतंत्र भारत के इतिहास में मुसलमानों की हिस्सेदारी सरकारी और संस्थागत नेतृत्व में लगातार सीमित रही है। संविधान लागू होने के बाद से लेकर आज तक उच्च प्रशासनिक पदों पर यह प्रतिनिधित्व एक से चार प्रतिशत के बीच रहा है। न्यायपालिका के उच्च पदों पर भी मुस्लिम उपस्थिति इसी दायरे में सिमटी रही। विश्वविद्यालयों में कुल संख्या हजारों में है, लेकिन मुस्लिम वाइस चांसलरों की उपस्थिति हमेशा अपवादों के रूप में दर्ज की गई, न कि एक सामान्य प्रवृत्ति के रूप में। जिस समुदाय की जनसंख्या राष्ट्रीय अनुपात में पंद्रह प्रतिशत है, उसका किसी भी महत्वपूर्ण संस्थान में नेतृत्वकारी पदों पर दो से तीन प्रतिशत तक सिमट जाना स्वयं एक ऐतिहासिक संकेत है।
इस पृष्ठभूमि को समझे बिना केवल कुछ नाम गिनाना उस बड़े सामाजिक ढांचे पर पर्दा डालने जैसा है। नईमा खातून, सैयद ऐनूल हसन या मजहर आसिफ सम्मानित पदों पर हैं, पर ये वे दुर्लभ उदाहरण हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि अवसरों के द्वार खुले तो मुस्लिम समुदाय में नेतृत्व सामर्थ्य की कमी नहीं है। लेकिन अपवादों की उपस्थिति नियम की गवाही नहीं, बल्कि उसकी कमी का पता देती है। यही बात सच्चर कमेटी रिपोर्ट ने भी दर्ज की थी कि मुस्लिम समुदाय को देश के संस्थागत जीवन में समान भागीदारी नहीं मिल रही।
मौलाना अरशद मदनी इसी ऐतिहासिक असंतुलन की ओर संकेत कर रहे हैं। उनका आशय यह नहीं कि कोई भी मुस्लिम वाइस चांसलर नहीं है, बल्कि यह कि जिस अनुपात में होना चाहिए, उस अनुपात में प्रतिनिधित्व बेहद कम है। यह एक तथ्यात्मक और संस्थागत वास्तविकता है, जिसका समाधान तभी संभव है जब इसे स्वीकार किया जाए। किसी समुदाय की शिकायत को झूठ कहने से इतिहास नहीं बदलता। देश का माहौल तभी बेहतर होगा जब हम असमानताओं को पहचानें और उन्हें दूर करने की दिशा में ईमानदार विचार करें।
पाँच मिनट का वक़्त निकालकर वीडियो क्लिप जरूर देखें आदमी कितना गिर गया है !!
जिस माँ ने उसे जन्म दिया वो बुढापे में बोझ बन गयी ये लोग कितने खुदगर्ज है अपनी माँ को बृद्धाश्रम में छोड़ रहे हैं !!
ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिये !!💔
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Pat Cummins realizing that Khawaja had to stand away because of the alcohol so he tells his team to put it away and calls Khawaja back immediately. A very small but a very beautiful gesture❤️
सवाल उठता है कि मौलाना साद का वह फर्जी ऑडियो क्लिप किसने बनाया? चैनलों तक उसे किसने पहुँचाया? चैनलों ने बिना जाँच किए उसे क्यों चलाया?
तबलीग के ख़िलाफ़ वह ऑडियो क्लिप एकमात्र सबूत है। उसके फ़र्ज़ी साबित होने के बाद अब चैनलों की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिये।
भारत के महान वीर योद्धा, मैसूर टाइगर टीपू सुल्तान अंग्रेजों की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ लड़ते लड़ते इसी मिट्टी में कुर्बान हो गए।
टीपू की शहादत दिवस पर शत शत नमन।
मुसलमान इस देश का किरायेदार नहीं, उसे इस मुल्क़ में रहने का आपसे इतना ही अधिकार है। जंग-ए-आज़ादी में अंग्रेजो से लड़ते हुए अपनी गर्दन कटाने के लिए उलेमाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था और आज वो ही मुस्लिम देशद्रोह व UAPA जैसे क़ानून के द्वारा कुचला जा रहा है!👎🏻
#StopTargetingMuslim