" क्या माडर्न ज़माना था "
मेरे नबी सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम के जमाने में औरतें कारोबार भी करती थीं
कारोबार करने के लिए गुलाम व नौकर रखती थीं
हर क़िस्म के सवाल भी करती थीं
सदक़ा भी देती थीं और मर्द को क़व्वाम (निगहबान) भी मानतीं थीं
पसंद की शादी भी करती थीं
यहां तक कि खुद निकाह का पैगाम भी भेजती थीं
घर के काम के लिए नौकर भी रखती थीं
ज़रा सा मसला होता तो फौरन नबी-ए-अकरम सल्लल्लाहु अ़लैहि वसल्लम से शिकायत करने पहुंच जाती थीं
वह दौर जिस में तलाक बोझ नहीं बनती थी
विधवा होना जुर्म नहीं था
कौन कहता है इस्लाम माडर्न दीन नहीं है ?
ज़रा हमारा शानदार अतीत तो देखिए
ख़ुदा की क़सम ज़ुबान दराजी भूल जाओगे
An old man is remembering the situation of the Muslims of Jalandhar and how they were killed in 1947 in Indian Punjab.
He witnessed the deaths of at least 10k Muslims with his own eyes, in which all Muslim girls, men, children, and the elderly, from a one-day-old baby to a 70-year-old man, were stripped naked, their hands tied, lined up in lines, and one by one their necks were cut and thrown into the Beas River.
If anyone wanted to rape a Muslim girl or woman, they would be taken to the trees, raped, and then killed.
“मैंने उन मौलवियों से कहा-
हम हिंदुओं को तुम सिखाओगे,
कि गोमाता की पूजा कैसे करनी है?”
योगी आदित्यनाथ का आज का हिंदू मुस्लिम डोज़!!
इस बीच—
यूपी में सड़क धंस रही है!
पानी की टंकी फट-फटकर गिर रही है!
गोरखपुर में तलवार से काट कर सरेआम हत्या है!
पेपर लीक का योद्धा जंग जीत चुका निहत्था है!
प्राइमरी टीचर की vacancy 2018 से नहीं आई है!
बदहाल हुई शिक्षा की असंभव भरपाई है!
हिंदुत्व के ठेकेदारों ने राम के मंदिर को भी नहीं छोड़ा है!
जातिवाद के फेवीकोल ने प्रदेश का कोना कोना जोड़ा है!
चुनाव में क्या होगा? ये सोचकर ही सूखे प्राण हैं!
बाबा जी का इकलौता अस्त्र हिंदू और मुस्लिम का बाण है!!
स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अली बंधुओं का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा हुआ है। मौलाना शौकत अली और मौलाना मोहम्मद अली जौहर को अली बंधु कहा जाता है। उनकी माता जी नाम अबादी बानो बेगम था, जिन्हें प्यार से 'बी अम्मा' कहा जाता था। वो भी महान स्वतंत्रता सेनानी थीं। वो दिसंबर 1930 में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में शिरकत करने गए थे। यहां उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दिया था।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने ब्रिटिश शासकों की आंखों में आंख डालकर कहा हमें सलाह/मश्विरों की ज़रूरत नहीं है, और ना ही इस बात की परवाह है कि आप हमारे लिये किस तरह का क़ानून तैयार करते हैं। हमें इंसानों की ज़रूरत है। काश! सारे इंग्लैंड में एक भी शख्स ऐसा होता जो इंसान कहलाने का हक़दार होता। मैं हिंदोस्तान को आज़ाद कराने के लिये लंदन आया हूं, और आज़ादी का परवाना लेकर वापस जाना चाहता हूं। मैं एक आज़ाद मुल्क में तो मरना पसंद करुंगा लेकिन ग़ुलाम मुल्क में वापस नहीं जाऊंगा। चार जनवरी 1931 को गोलमेज कांफ्रेंस की एक कमेटी के सामने बयान देते हुए मौलाना मोहम्मद अली जौहर की दिल की धड़कन बंद थम गई, और वे इस भारत को आज़ाद कराने के तमन्ना अपने सीने में लिये इस दुनिया से कूच कर गए।
ऐसा महान स्वतंत्रता सेनानी भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath की कुंठा से नहीं बच पाया। योगी आदित्यनाथ ने मौलाना जौहर को विभाजन के लिए ज़िम्मेदार बताया है। सोचिए! ऐसी घृणित मानसिकता इस देश को कहाँ ले जाकर दम लेगी। जो स्वतंत्रता सेनानी विभाजन से डेढ़ दशक से ज्यादा समय पहले दुनिया को अलविदा कह चुका हो, उस महान स्वतंत्रता सेनानी को आज़ादी के आठ दशक बीत जाने पर विभाजन का ज़िम्मेदार बताया जा रहा है।
यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नफ़रती कुंठा है, या विकृत मानसिकता कि मौलाना जौहर के चरित्र पर लांछन लगाते वक्त उनकी ज़ुबान तक नही लड़खड़ाई! क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्यायपालिका महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में की गई इस बदज़ुबानी का स्वतः संज्ञान लेगी? इस मानसिक दिव्यांगता का कोई तो विरोध करे! इस देश का कोई संस्थान इस जहालत का संज्ञान लेकर यूपी के मुख्यमंत्री को नसीहत करते हुए कहेगा कि नफ़रत की सियासत में इतने भी अंधे ना बनो कि इस देश के नायकों के खिलाफ बदज़ुबानी करने लगो!
ऐसा कोई कानून Uttar Pradesh विधानसभा में पास नहीं हुआ है
"कि हर साल कांवड़ के 28 दिन Non-veg की दुकानें बंद रहेंगी"
लेकिन फिर भी UP BJP सरकार पुलिस के दम पर जबरदस्ती इसे लागू करवाती है
अगर हर साल लोगों की दुकान एक महीने के लिए बंद रखवानी है
तो Yogi सरकार उन्हें 50-50k रुपए की मदद राशि दे
जिससे वो बिजली का बिल, बच्चों की फीस, रेंट, टोल टैक्स आदि भर सकें
जब सावन में ठेके खुलने की छूट है
तो नानवेज दुकानों पर रोक क्यों
नानवेज के दुकानदार जबरदस्ती किसी के मुंह में ठूंसने नहीं जाते हैं
जब योगी आदित्यनाथ के मुकदमे वापस हो सकते हैं,
जब केशव प्रसाद मौर्या के मुकदमे वापस हो सकते हैं,
जब कुख्यात माफिया ब्रजेश सिंह खुला घूम सकता है,
जब सपा विधायक के हत्यारे उदयभान करवरिया की सजा माफ़ हो सकती है,
जब कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या की साजिश रचने वाले अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी की सजा माफ़ हो सकती है,
...तो आज़म खान साहब तो न माफिया हैं और न ही हत्यारे तो उनके मुकदमे वापस क्यों नहीं हो सकते?
Non-Veg बिरयानी बिक रही थी, हिंदू संगठनों को बुरा लगा, पुलिस आई, दुकान तोड़ दी।
कितनी सस्ती है इस मुल्क में एक मुसलमान की ज़िंदगी। उसकी जान-माल का कोई मोल नहीं? क्या इस देश में कोई जज, कोई अदालत बची है ? क्या अब गुंडागर्दी ही इंसाफ़ है ?
देश के इतिहास में मप्र के कॉलेज ने रिकॉर्ड तोड़ दिया।
उज्जैन की यूनिवर्सिटी के रिजल्ट एक छात्र को कुल 1600 में से 1604 अंक मिले हैं।
100.25% रिजल्ट आया है छात्र का।
राहुल गांधी सही बोलते हैं इस देश का एजुकेशन सिस्टम बुरी तरह से सड़ चुका है।