The Lost Durga Stuti Of Bengal
Why This Hymn Disappeared?
This Durga Stuti is inspired by the spiritual atmosphere of 1980s Bengali devotion where Sanskrit chants, soulful vocals, and divine emotion came together in pure bhakti.
Experience the timeless presence of Maa Durga through this vintage-style Bengali devotional journey filled with Shakti, nostalgia, and sacred energy.
🔱🙏🏾 Joy Maa Durga 🙏🏾🔱
Credit : Beyond Conscious
Money flows differently when energy shifts ✨
This powerful 11-day ritual attracts stability, abundance & blessings into your life 🌸🙏
Not just quick money… real prosperity energy. Save this for later ❤️
THREAD 🧵👇
त्रैलोक्य मोहिनी मुद्रा: आकर्षण शक्ति को जागृत करने की शास्त्रसम्मत विधि एवं विशिष्ट प्राण प्रतिष्ठा प्रयोग
क्या आपने कभी विचार किया है कि कुछ व्यक्तियों का व्यक्तित्व सहज ही प्रभावशाली एवं आकर्षक प्रतीत होता है, जबकि अन्य व्यक्ति सतत प्रयासरत रहने पर भी अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते? इसका मूल कारण आभामंडल अर्थात ऑरा में निहित आकर्षण ऊर्जा की प्रबलता अथवा न्यूनता है। यह ऊर्जा हमारे दैनिक कर्मों, विचारों, व्यवहार एवं वाणी से निरंतर प्रभावित होती रहती है। त्रैलोक्य मोहिनी मुद्रा, जिसे आकर्षण मुद्रा अथवा जग मोहिनी मुद्रा भी कहा जाता है, इसी आंतरिक आकर्षण शक्ति को जागृत एवं प्रबल करने का एक सनातन विज्ञान है।
इस मुद्रा का मूल सिद्धांत अत्यंत स्पष्ट है - जब स्वयं की आकर्षण शक्ति इतनी सुदृढ़ एवं व्यापक हो जाए तो अन्य व्यक्तियों, परिस्थितियों अथवा वस्तुओं को आकर्षित करने हेतु पृथक से कोई प्रयास करने की आवश्यकता नहीं रह जाती। जिस प्रकार अंधकार को दूर करने हेतु अंधकार से संघर्ष नहीं किया जाता, अपितु मात्र एक दीपक प्रज्वलित कर दिया जाता है, ठीक उसी प्रकार आंतरिक तेज को प्रज्वलित करना ही पर्याप्त होता है। यह मुद्रा मुख मंडल पर दिव्य चमक उत्पन्न करती है, आभामंडल को प्रभावशाली बनाती है, सकारात्मकता में वृद्धि करती है तथा नकारात्मकता का क्षय करती है। देवी-देवताओं की उपासना से पूर्व इस मुद्रा के अभ्यास से आराध्य देवता स्वतः ही साधक की ओर आकर्षित होते हैं।
त्रैलोक्य मोहिनी मुद्रा बनाने की विधि:
दोनों हाथों की चारों अंगुलियों को परस्पर इस प्रकार मिलाएं जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। तत्पश्चात दोनों अंगूठों को ऊपर की ओर उठाकर परस्पर मिला दें। यह मुद्रा बन जाने पर हाथों को हृदय के समक्ष सीने के सामने स्थिर कर लें।
प्रभाव को अनेक गुणा बढ़ाने वाली विशिष्ट प्राणायाम विधि:
यह अभ्यास किसी भी समय, किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठकर किया जा सकता है। समय का कोई बंधन नहीं है, प्रातः अथवा सायंकाल दोनों ही उपयुक्त हैं। मेरुदंड सीधा रखें एवं नेत्र बंद कर लें।
1. प्रारंभिक स्थिति: त्रैलोक्य मोहिनी मुद्रा हृदय के समक्ष धारण करें। अपना संपूर्ण ध्यान आज्ञा चक्र अर्थात दोनों भौहों के मध्य केंद्रित करें।
2. श्वास संयमन: सर्वप्रथम कुछ क्षण तक केवल अपनी स्वाभाविक श्वास प्रश्वास की गति का अवलोकन करें। कुछ ही क्षणों में श्वास की गति स्वतः संतुलित एवं नियमित हो जाएगी।
3. श्वास अवरोध एवं संकल्प: अब श्वास को पूर्ण क्षमतानुसार भरें। यदि किसी विशिष्ट व्यक्ति, वस्तु अथवा परिस्थिति को आकर्षित करने की कामना है तो श्वास भरते समय केवल उसी का चिंतन करें। यदि सर्वांगीण आकर्षण शक्ति में वृद्धि करनी है तो बिना किसी विशेष कामना के केवल श्वास भरें।
4. आज्ञा चक्र पर धारण: भरी हुई श्वास को यथाशक्ति रोकें रखें और कल्पना करें कि यह प्राणवायु आज्ञा चक्र पर स्थिर हो गई है। जितनी देर सहजतापूर्वक रोक सकें, रोकें।
5. श्वास मोचन: तत्पश्चात अत्यंत धीमी गति से श्वास को बाहर निकाल दें।
महत्वपूर्ण अंतर:
· सकाम अभ्यास: यदि श्वास भरते समय किसी विशिष्ट विषय का चिंतन किया गया है तो यह प्रयोग उस विशेष की ओर आकर्षण उत्पन्न करेगा।
· निष्काम अभ्यास: यदि बिना किसी इच्छा अथवा भावना के केवल श्वास को आज्ञा चक्र पर रोका गया है तो यह अभ्यास साधक के समग्र आभामंडल, मानसिक क्षमता, आध्यात्मिक बल एवं शारीरिक तेज में समग्र रूप से वृद्धि करेगा।
यह अभ्यास जितना सरल है, उतना ही प्रभावशाली है। नियमित रूप से इस मुद्रा एवं प्राणायाम विधि का अभ्यास करने से व्यक्तित्व में सहज आकर्षण, कार्यक्षेत्र में सफलता एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। सनातन शास्त्रों में निहित इस गूढ़ ज्ञान का लाभ अवश्य उठाएं।
Nazia Elahi Khan, I'm proud of you! What secular Hindus can’t do you did it! ❤️
Seekho bhai Hindus kaise jiya jata hai! Darpok mat bano. Remember, your ancestors fought the battle, so you can be a proud Hindu don’t waste their struggle!
Brilliant Answer !
In a class, the teacher asked the children, "Which place in the world is called the epitome of love..?" 🥰
The whole class shouted in unison - "Taj Mahal".
Only one student said "RAMSETU"
The teacher asked him to stand up.
"What do you mean…?"
👇
The boy stood up and said,
👉"RamSethu was built by Lord Rama not to bury his wife's dead body on the occupied land, but to bring back his wife!!!
👉Lord Rama remained loyal to only one wife throughout his life and protected the dignity of women, whereas Shah Jahan had many wives, concubines and slave girls.
👉The Ram Setu was built by soldiers in Sri Rama’s army whereas the Taj Mahal was built by people who were kept as slaves by the Mughals during a big famine.
👉Moreover, Lord Rama gave full respect to those who built the bridge.
👉Sri Rama did not cut their hands so that nothing like this would happen again in the world." 👌👌👌👌
The teacher and other students were shocked. Indian history needs to be RE-WRITTEN from a new perspective.
KINDLY SHARE this so as to 👉Rewrite Indian History.
@DGCAIndia
Sir/Madam pnr R2bfuy air india express divert root for conjetion from blr to maa but from 7p.m.
But now 10.43p.m.
No movement till I urge to u take hard action against them.
No food no water also some patients is there.
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*जब जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा अर्जुन कर लेते हैं कि सूर्यास्त तक नहीं मारा तो अग्नि समाधी ले लूंगा!!*
*तो आचार्य द्रोण कमलव्यूह के अंदर जयद्रथ को छुपा देते हैं जिसका आकर 32 कोस का था। जाहिर है वह उस तक कैसे पहुँचते ! जयद्रथ की सुरक्षा में बड़े बड़े वीर तैनात थे।*
*भगवान कृष्ण बोले, अर्जुन तुम रास्ता साफ करो मैं रथ ले चलता हूँ। संध्या हो आई अब भी 12 कोस रह गया ।*
*कृष्ण रथ से उतर गये ! अर्जुन ने पूछा, "केशव यह क्या ?"*
*कृष्ण ने कहा अश्व थक गये हैं। आगे बोलते हुये भगवान कृष्ण जो बोले वह ध्यान देने योग्य है.....*
*"अर्जुन कदाचित तुमने मेरे उपदेश पर ध्यान नहीं दिया था जो युद्ध के शुरू में मैंने दिया था ! तुम प्रतिज्ञा करने वाले होते कौन हो ? तुम तो निमित्त हो, यदि तुम प्रतिज्ञा न किये होते तो अब तक जयद्रथ को मार देते। तुम्हारा ध्यान एक तरफ सूर्य पर है दूसरी तरफ जयद्रथ पर। इसलिये तुम्हारे निशाने चूक रहें हैं। ऐसा लक्ष्य तय कर दिये कि असफल होने पर तुम्हें ही विनष्ट कर देगा.... यह डर ही तुम्हें हरा देगा।"*
*भगवान के वचन बड़े सारगर्भित हैं। मुझे नहीं लगता आज तक किसी ने इतनी सुंदर यथार्थ बात की हो ! कई संदर्भों में बात हो सकती है, लेकिन वर्तमान में देखिये सब प्रतिज्ञाबद्ध हो रहे हैं...*
*धारा 370 हटा दो तभी समर्थन करेंगे !*
*पाकिस्तान पर हमला कर दो... तभी समर्थन करेंगे !*
*राममंदिर बना दो... तभी समर्थन करेंगे !*
*नेतृत्व सक्षम है किसी प्रतिज्ञा की आवश्यकता क्या है ? निश्चित ही दंडात्मक कार्य होगा और हो रहा है। यह ठीक है कि इस समय भावना प्रबल है परंतु इसी समय सुनियोजित तरीके से काम करने की आवश्यकता है। जो विरोधी हैं वह भी यही ढाल बना रहे हैं। फिलहाल उनसे न 370 से मतलब है न राम मंदिर से।*
*स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि।*
*धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते॥2- 31॥*
*अपने खुद के धर्म से तुम्हें हिलना नहीं चाहिये क्योंकि न्याय के लिये किये गये युद्ध से बढकर ऐक क्षत्रीय के लिये कुछ नहीं है||*
*सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।*
*ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥2- 38॥*
*सुख दुख को, लाभ हानि को, जय और हार को ऐक सा देखते हुऐ ही युद्ध करो। ऍसा करते हुऐ तुम्हें पाप नहीं मिलेगा||*
*अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि।*
*ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि॥2- 33॥*
*लेकिन यदि तुम यह न्याय युद्ध नहीं करोगे, को अपने धर्म और यश की हानि करोगे और पाप प्राप्त करोगे||*
*इसलिए बाकी सब चिंतन छोङकर, निस्संकोच योग्य एवं सक्षम नेतृत्व को ही चुनें, यही इस धर्मयुद्ध में आप सभी का आसन्न धर्म है , तथा इसी में राष्ट्र हित एवं धर्म हित सन्निहित है।*
*जय हिंदुत्व जयति हिंदु राष्ट्रम्!!*
@officeofvijay1
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#औ_का