मुस्कुराहट कठिन वक्त की श्रेष्ठ प्रतिक्रिया है और खामोशी गलत प्रश्न का बेहतरीन जवाब..…!!!
కష్ట సమయాలకు చిరునవ్వు ఉత్తమ ప్రతిస్పందన మరియు తప్పు ప్రశ్నకు మౌనమే ఉ
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मार्गदर्शन तथा कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण एवं योजना निदेशक प्रो. मधुकेश्वर भट्ट के प्रयासों से पालि–प्राकृत योजना के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के संचालन हेतु GIAC की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
इसके अंतर्गत शोध परियोजनाओं, संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे पालि–प्राकृत भाषा एवं साहित्य के अध्ययन और अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
इच्छुक संस्थान, विद्वान एवं शोधकर्ता निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार अपने प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।
🌐 https://t.co/nBpqDAtXMl
📧 [email protected]@shrivarakhedi@ragamuki
#CentralSanskritUniversity #PaliPrakrit #AcademicResearch #IndianKnowledgeTradition
जब किसी के ‘जीत के गीत’ लोकगायक गाने लगें तो समझ लेना चाहिए जन-जन उसके साथ है।
एमएलसी सीट में जीत के लिए हर शिक्षक-स्नातक का आभार-धन्यवाद और ये वचन कि हम आदरणीय गुरुओं की समस्याओं-अपेक्षाओं का मान रखेंगे और स्नातकों के लिए रोज़गार व आगे की पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
ये पीडीए की एकता की जीत है।
#जो_पीड़ित_वो_पीडीए
#लोकगायक_हरनामसिंह_नरवरिया
@jitupatwari वैसे मैं ये मानता हूँ कि हरदीप पुरी का विरोध करते हुए जीतू पटवारी को चुनाव लड़ना चाहिए हार जीत अपनी जगह लेकिन नैतिकता यही कहती है कि आप चुनाव लड़े और एक नैतिक संदेश दें अन्याय के खिलाफ इससे बढ़िया राजनीतिक अवसर नहीं हो सकता
If Prasar Bharati can spend ₹15 crore a year on a DD News show featuring a star anchor, while the ISRO Chairman’s basic pay is about ₹27 lakh a year, shouldn’t we rethink our priorities? If India wants to conquer space and attract our finest scientific minds, our rewards must match our ambitions.
🚨कांग्रेस की रैली 1 नवंबर को ही क्यों?
1 नवंबर 1948 को भारत ने पाक के खिलाफ़ Zojila Pass में जीत दर्ज की।
1 नवंबर 1954, पोंडिचेरी को फ़्रांसीसी नियंत्रण से छुड़ाया।
1 नवंबर 1956, State Reorganisation से कई राज्यों को पहचान मिली।
1 नवंबर 1973, Karnataka was named as state
अच्छी ख़बर है !
टनल बोरिंग मशीन से मेरा पहला वास्ता दिल्ली मेट्रो कवरेज के दौरान हुआ था जब अंडरग्राउंड मेट्रो दिल्ली में बनने शुरू हुए, उसके बाद रेलवे के कई प्रोजेक्ट्स में इसकी अहम भूमिका देखी खासकर कटरा लाइन पर, नॉर्थ ईस्ट के कई प्रोजेक्ट्स में,
हाल के वर्षों में आर्मी के कई स्ट्रेटजिक प्रोजेक्ट्स में टनल बोरिंग मशीन ने अहम भूमिका निभायी चाहे अरुणाचल में सेला पास हो या फिर कश्मीर में जोजिला पास हो.
जहां भी जाते ब्रीफिंग में बताया जाता है कि इस प्रोजेक्ट्स की सबसे बड़ी निर्भरता टनल बोरिंग मशीन है और यह मेड इन चाइना है।
📍अब यह मशीन मेड इन इंडिया हो रही है तो खुश होने की अपनी वजह है !
राम मंदिर पर आज ज्ञान बांटने वाली BJP ने 1993 में इसी मुद्दे पर विरोध क्यों किया था?
नेहरू जी ने रामलला की मूर्तियां रखवाई थीं! संसद में BJP सांसद शाहनवाज़ हुसैन का पुराना बयान सुनिए!
अपने आर्काइव से निकाला एक और धमाकेदार वीडियो, जिसे देखने के बाद आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे!
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
7 जनवरी 1993 को नरसिम्हा राव सरकार अयोध्या में 67.7 एकड़ ज़मीन के अधिग्रहण का अध्यादेश लाई। योजना में राम मंदिर के साथ मस्जिद, पुस्तकालय, संग्रहालय और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव था।
तब BJP के तत्कालीन उपाध्यक्ष एस.एस. भंडारी ने इस अध्यादेश को “पक्षपातपूर्ण, तुच्छ और विकृत” करार दिया था!
आज राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाली BJP से सवाल है—तब विरोध क्यों किया था?
अब सवाल है—
👉 तब BJP को इस अध्यादेश से आपत्ति क्यों थी?
👉 क्या आज की BJP अपने पुराने रुख पर जवाब देगी?
👉 राम मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाले अपने इतिहास पर भी बात करेंगे?
इतिहास याद रखिए, क्योंकि राजनीति में सुविधानुसार याददाश्त बदलने वालों से सवाल पूछना ज़रूरी है!
इस विडियो को रिपोस्ट कर के अंधभक्तों को जरुर दिखाएं।
लौटना
-ताद्युश रोज़ेविच
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अचानक खिड़की खुलेगी
और माँ आवाज़ देगी
अन्दर आ जाओ, समय हो गया है
दीवार दो भागों में बँट जायेगी
मिट्टी से सने जूते पहने मैं जन्नत में दाख़िल होऊँगा
मैं टेबुल के पास आऊँगा
और रुखाई से सवालों के जवाब दूँगा
मैं ठीक हूँ, मुझे अकेला छोड़ दो.
सर पकड़ के बैठा हूँ, सर पकड़ के.
मैं उन्हें उस लंबे और उलझे रास्ते के बारे कैसे कहूँ!
यहाँ जन्नत में
माँएँ हरे रंग के स्कार्फ बुनती हैं
मक्खियाँ भनभनाती हैं
पिता अंगीठी के पास ऊँघते हैं
छह दिन की मेहनत के बाद.
नहीं- मैं उन्हें नहीं बता सकता कि
लोग एक-दूसरे पर गुस्से से चीख़ रहे हैं.
(एडम ज़ेरनियावस्की के पोलिश से अंग्रेज़ी अनुवाद का प्रकाश के रे द्वारा हिन्दी अनुवाद)