भारत बनाए, दुनिया अपनाए,
भारतीय व्यापार महोत्सव में आए।
स्वदेशी का गान गायें भारत की पहचान बनायें
चलो मिलकर रचायें आत्मनिर्भर हिंदुस्तान॥
#bvm2026@CAITIndia
ऑनलाइन ख़रीदारी में नकली और जाली सामान की बढ़ती शिकायतें उपभोक्ता सुरक्षा के ��िए बड़ा खतरा हैं।
यह केवल उपभोक्ताओं की मेहनत की कमाई का नुक़सान नहीं है, बल्कि ब���रांड की साख और व्यापार की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर डालता है।
यह एक गंभीर विषय है और हम इसे सरकार के सामने मजबूती से उठाएँगे ताकि उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रहें और ई–कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर सख़्त निगरानी हो सके।
मैं आज व्यापारी वर्ग, दुकानदार बंधुओं से कहना चाहता हूँ—कभी विदेश में बने सामान में ज़्यादा मुनाफ़ा दिखता होगा , पर अब समय है ‘Vocal for Local’ मंत्र पर मेरे साथ चलने का। Made in India सामान बेचेँ, देश का पैसा देश में रहेगा, परिवार का लाभ होगा, ग़रीब का भला होगा और राष्ट्र मज़बूत होगा। - प्रधानमंत्री @narendramodi जी #VocalForLocal #MadeInIndia
#संकल्प_विकसित_दिल्ली
देश में पहली बार @ETNowSwadesh जैसे राष्ट्रीय मंच पर उठा IPC 411 का गंभीर मुद्दा।
💔 जब ईमानदार जौहरी “चोरी का माल” बताकर फंसा दिए जाते हैं,
तो सवाल उठता है –
कानून डर बनकर क्यों आ रहा है उन पर जो टैक्स भी भरते हैं और रजिस्टर भी रखते हैं?
✊ @aijgf4india की आवाज़ अब पूरे देश ने सुनी।
@Dev_Fadnavis@DGPMaharashtra@CPMumbaiPolice
#IPC411 #JewellersJustice #ETNow #AIJGF
@aijgf4india के राष्ट्रीय संरक्षक और @CAITIndia के राष्ट्रीय महासचिव,चाँदनी चौक, दिल्ली सांसद श्री @PKhandelwal_MP जी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर "अटल बिहारी वाजपेयी रेलवे स्टेशन" रखने का आग्रह किया है। उन्होंने रेलवे मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw जी को पत्र लिखकर कहा कि यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में एक महत्वपूर���ण और भावनात्मक कदम होगा।
#AtalBihariVajpayee #PraveenKhandelwal #NewDelhiRailwayStation
न अपील, न दलील — सिर्फ़ तानाशाही की लकीर!
मैंने आपातकाल को अपनी आँखों से देखा है।
25 जून 1975, भारत के लोकतंत्र की सबसे काली तारीख।
इंदिरा गांधी ने सत्ता की सनक में संविधान को रौंद दिया। देश को खुली जेल बना दिया।
मुझे आज भी तीस हजारी कोर्ट के बाहर तिहाड़ जेल से लाए गए उन बंदियों की तस्वीरें याद हैं — हथकड़ियों में जकड़े, बस में भरकर लाए जाते थे, जुर्म बस इतना था कि वे कांग्रेस की तानाशाही के खिलाफ बोले थे।
मेरे ताऊजी स्व. श्री सतीश चंद्र खंडेलवाल जी और पिता श्री विजय खंडेलवाल जी भी उन्हीं राजनीतिक बंदियों में थे। हमारा परिव���र भी उस तानाशाही का भुक्तभोगी है।
चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली, तुर्कमान गेट — ये सिर्फ़ इलाक़े नहीं, ये लोकतंत्र के ज़ख़्म हैं।
तुर्कमान गेट की गलियों में कांग्रेस शासन ने निर्दोषों पर गोलियाँ बरसाईं, महिलाओं और बच्चों को सड़कों पर घसीटा गया, घरों पर बुलडोज़र चल���।
यह वही तुर्कमान गेट है, जहाँ आज भी संविधान शर्म से झुका खड़ा है।
मेरी रूह काँप जाती है जब याद आता है कि कैसे लोगों को जबरन नसबंदी शिविरों में खींचकर ले जाया गया, गोलियाँ चलाई गईं, लाशें ट्रकों में भरकर फेंकी गईं।
कोई सुनवाई नहीं, कोई न्याय नहीं।
“न अपील है, न दलील है, हो रही शराफ़त जलील है”
यह गीत आज भी मेरे भीतर धधकता है।
कांग्रेस ने आज तक इस क्रूरता के लिए माफ़ी नहीं मांगी।
जिन्होंने लोकतंत्र का गला घोंटा, उनके वंशज आज संविधान पर भाषण दे रहे हैं — यह विडंबना नहीं, यह इतिहास से विश्वासघात है।
आज जब हम संसद में संविधान की बात करते हैं, तो हमें उन चीखों को नहीं भूलना चाहिए जो तानाशाही की चुप्पी में गुम हो गई थीं।
हम नहीं भूलेंगे — न तुर्कमान गेट को, न आपातकाल को, न उन मासूमों की आख़िरी चीख को।
क्योंकि लोकतंत्र को बचाने के लिए यादों को ज़िंदा रखना ज़रूरी है।
@narendramodi @BJP4India @BJP4Delhi @PMOIndia @AmitShah @narendramodi @blsanthosh @Virend_Sachdeva @PavanRanaRSS
#Emergency1975 #SamvidhanHatyaDiwas #CongressExposed
आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर, मैंने अपनी संसदीय क्षेत्र में अपनी माँ के नाम एक पौधा रोपा।
यह सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व दोनों को सम्मान देने का एक संकल्प है।
आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण की रक्षा करें।
#WorldEnvironmentDay ##Ek_Ped_Maa_Ke_Naam