उत्तर प्रदेश में एक मंत्री जी हैं जिनको पंचायत विभाग मिला है पर इनको अपने विभाग से कोई मतलब ही नहीं है,
उनके विभाग के ही कर्मचारी पिछले लगभग दो हफ्तों से धरना दे रहे हैं पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं,
उनसे सिर्फ ₹6000 में बधुआ मजदूर की तरह पूरे महीने भर काम कराया जाता है,
आखिरकार ₹200 दिन में कौन काम करता है,
उनकी मांग है कि उनकी सैलरी बढ़ाई जानी चाहिए जो की जायज है।