गोपालगंज: उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षकों की भूमिका स्पष्ट, DEO ने जारी किया दिशा-निर्देश
गोपालगंज (बिहार): जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) योगेश कुमार ने गोपालगंज जिले के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थापित कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों की भूमिका और उत्तरदायित्वों में स्पष्टता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यालय आदेश (ज्ञापांक-694, दिनांक: 03.06.2024) जारी किया है।
समीक्षा के दौरान कंप्यूटर शिक्षकों के कार्यों को लेकर अस्पष्टता पाई गई थी, जिसके बाद यह नया दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
प्रमुख निर्देश एवं गाइडलाइंस:
कक्षा 11वीं और 12वीं में नियमित पढ़ाई: जिन स्कूलों में कक्षा 11 एवं 12 के छात्रों ने कंप्यूटर विज्ञान विषय चुना है, वहां शिक्षकों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार नियमित रूप से पढ़ाना होगा और समय पर कोर्स पूरा करना होगा।
कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए कंप्यूटर शिक्षा: कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों के लिए विभागीय SOP और निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार सप्ताह में कम से कम 3 दिन कंप्यूटर शिक्षा और ICT Lab का कार्य संचालित करना अनिवार्य होगा (यदि ICT Lab उपलब्ध है)।
अन्य विषयों के अध्यापन की जिम्मेदारी: जिन विद्यालयों में कंप्यूटर विज्ञान के छात्र नामांकित नहीं हैं, वहां आवश्यकतानुसार कंप्यूटर शिक्षकों से:
वर्ग 9-10: विज्ञान (Science)
वर्ग 11-12: भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry), या गणित (Mathematics) के विषयों की पढ़ाई कराई जा सकती है।
डिजिटल एवं ऑनलाइन कार्यों में सहयोग: UDISE+, eShikshakosh एवं अन्य महत्वपूर्ण ऑनलाइन/तकनीकी कार्यों के सफल संचालन के लिए कंप्यूटर शिक्षक अन्य शिक्षकों और वर्ग शिक्षकों को आवश्यक तकनीकी सहयोग व प्रशिक्षण देंगे।
ICT Lab और उपकरणों का रखरखाव: जिन विद्यालयों में ICT Instructor (अनुदेशक) पदस्थापित नहीं हैं, वहां कंप्यूटर लैब, ICT उपकरणों एवं डिजिटल संसाधनों के संचालन, उपयोग और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक की होगी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी का आदेश:
"उपरोक्त सभी निर्देशों का पालन कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक अक्षरशः सुनिश्चित करेंगे और पूर्ण निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।"
यह आदेश प्रतिलिपि के रूप में जिले के सभी प्रधानाध्यापकों/प्रभारी प्रधानाध्यापकों, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।
@btetctet Make teacher should get home block in mutual transfer but it's not provided. We need equal opportunity as female teacher. Male person is also human beings.
"No compromise on dignity and rights of Bhumihar community".
Full support to MLA Vishal Prashant.
Demand for ST status is a legit demand for a peasant caste like Bhumihars. Only peasant caste outside reservation system today. Do a survey and give us the status.
बाभनों का डाउनफॉल इससे बड़ा क्या होगा?
एक समय था जब लाखोचक में यादवों के संस्कृतिकरण और जनेऊ धारण का विरोध किया गया। आज वही लोग "भूमिहार" के पीछे "ब्राह्मण" जोड़ने और ST की मांग तक पहुंच गए। यह विवाद होता ही नहीं अगर मूल जाति-नाम "बाभन" नहीं बदला होता।
[https://t.co/RlqmaYIa6r]
बिहार विधानसभा में तरारी से विधायक विशाल प्रशांत ने सरकार के समक्ष स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी। जब सरकार स्वयं भूमिहार समाज की ब्राह्मण पहचान को स्वीकार करने से इनकार कर रही है, तो फिर इस समाज के सम्मान, अधिकार और भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय भी लेना चाहिए। यदि सरकार की यही
+1
भूमिहार समाज ने माँगा ST का दर्जा
जब सुशील मोदी अपने जाती को EBC में डालकर अतिपछड़ा बना सकते है, बिहार में जितने भी सेठ, महासेठ उपनाम लगाते है सभी अतिपछड़ा बनकर लाभ ले रहे है, वैश्य समाज अतिपछड़ा/पिछड़ा बना हुआ है। तो फिर भूमिहार समाज को ST का दर्जा क्यों नही ??
आज शुक्रवार बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायक विशाल प्रशांत ने भूमिहार जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने की मांग उठाई।
सरकार की ओर से भूमिहार जाति को ‘भूमिहार ब्राह्मण’ मानने से इनकार किए जाने वाले जवाब पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार भूमिहार को भूमिहार ब्राह्मण नहीं मानती है, तो इस समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए। उनकी इस मांग के बाद सदन में मामला चर्चा का विषय बन गया।
वैसे भी आरक्षण का विरोध करने से फायदा कुछ नही है जमींदार मीणा नेताओ के एकता और आपसी सूझबूझ के कारण आज मीणा को st आरक्षण का लाभ मिल रहा है।। यही आरक्षण का विरोध एक समय मे बंगाल के जमींदार महिषय समाज किया था आज ओबीसी स्टेटस पाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है।
भूमिहार को मिलेगा अनुसूचित जनजाति का दर्जा ! विधानसभा में भाजपा MLA विशाल प्रशांत का रौद्र रूप,
भाजपा विधायक विशाल प्रशांत ने अपनी ही सरकार से एक सुर में मांग कर दी कि भूमिहार जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए। उनकी इस मांग का कारण सम्राट सरकार की ओर से सदन में आया जवाब था जिसमें भूमिहार जाति को भूमिहार ब्राह्मण मानने से इनकार किया गया था। सरकार के इस जवाब से गुस्साए विशाल प्रशांत ने सदन में भूमिहार जाति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की ओर संकेत करते हुए कहा कि जब आप हमारी जाति को भूमिहार ब्राह्मण नहीं मान सकते तो बेहतर है कि हमें शिड्यूल ट्राइब्स यानी अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध कर दें।
#Bhumihar #BhumiharBrahmin #VishalPrashant #BiharAssembly #BiharVidhanSabha #BJP #BiharPolitics
पटना: यदि सरकार हम लोगों को भूमिहार ब्राह्मण नहीं मानती है तो शेड्यूल कास्ट में डाल दे। बिहार विधानसभा में भूमिहार ब्राह्मण को लेकर चर्चा के दौरान BJP विधायक विशाल प्रशांत ने कहा, "अगर सरकार हमें भूमिहार ब्राह्मण नहीं मानती, तो हमें अनुसूचित जाति (SC) में शामिल कर दीजिए।" यह बयान जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर हुई बहस के दौरान आया।
#Patna #Bihar #BiharAssembly #VishalPrashant #BJP #Bhumihar #Politics #BreakingNews #BiharNews
भूमिहार समाज के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं।
आज बिहार विधानसभा में मैंने सरकार के समक्ष स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी।
जब सरकार स्वयं भूमिहार समाज की ब्राह्मण पहचान को स्वीकार करने से इनकार कर रही है, तो फिर इस समाज के सम्मान, अधिकार और भविष्य को लेकर स्पष्ट निर्णय भी लेना चाहिए। यदि सरकार की यही सोच है, तो भूमिहार समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
मैंने सदन में यह भी कहा कि भूमिहार समाज का एक बड़ा वर्ग आज सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इस विषय पर केवल औपचारिक उत्तर देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती।
मेरा उद्देश्य किसी समाज के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि भूमिहार समाज के सम्मान, न्याय और संवैधानिक अधिकारों की आवाज़ बुलंद करना है। सदन में जनता की भावनाओं को मजबूती से रखना मेरा कर्तव्य है और मैं इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाता रहूँगा।
#VishalPrashant #Tarari #BiharAssembly #भूमिहार #Justice #Bihar
बिहार शिक्षक ट्रांसफर नीति: DEO और DPO का ऑनलाइन प्रशिक्षण शुरू, स्कूलवार न्यूनतम शिक्षक मानक हुए तय
पटना।
बिहार में शिक्षकों के बड़े पैमाने पर होने वाले स्थानांतरण (Transfer) और पदस्थापन (Posting) को लेकर शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में विभाग द्वारा राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नई स्थानांतरण नीति को पारदर्शी और त्रुटिहीन तरीके से लागू करना है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक और प्रशिक्षण में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 'न्यूनतम शिक्षक मानक' (छात्र-शिक्षक अनुपात) के आधार पर रिक्तियों की गणना और युक्तिकरण (Rationalization) के गुर सिखाए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु और नए मानक:
प्रशिक्षण के दौरान स्क्रीन पर साझा किए गए आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए "न्यूनतम शिक्षक मानक" तय कर दिए हैं। विषयवार शिक्षक उपलब्धता और पदस्थापन का निर्णय इन्हीं मानकों के आधार पर होगा:
1. प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 5):
नामांकन के आधार पर शिक्षक: कक्षा 1-5 के लिए छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की संख्या तय की गई है (जैसे: 1-60 छात्रों पर 2 शिक्षक, 61-90 पर 3 शिक्षक आदि)।
प्रधान शिक्षक: प्रधान शिक्षक (Head Teacher) का पद कुल शिक्षकों की संख्या से अलग रखा जाएगा।
2. माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9 और 10):
विषयवार अनिवार्य शिक्षक: न्यूनतम 120 छात्रों के नामांकन पर कम से कम 6 शिक्षक अनिवार्य होंगे। इसमें सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान, हिन्दी, अंग्रेजी और संस्कृत/उर्दू का 1-1 शिक्षक होना आवश्यक है。
अधिकतम सीमा: जैसे-जैसे छात्रों का नामांकन बढ़ेगा (181 से 420+ तक), वैसे-वैसे सामाजिक विज्ञान, गणित और विज्ञान के शिक्षकों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 11 शिक्षक तक की जाएगी, जिसमें संगीत/नृत्य और शारीरिक शिक्षा के शिक्षक भी शामिल होंगे।
3. उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 11 और 12):
संकायवार (Stream-wise) व्यवस्था: विज्ञान, कला/मानविकी और वाणिज्य संकाय के लिए छात्रों की संख्या (40 से 260 तक के स्लैब) के आधार पर न्यूनतम 15 से लेकर 27 शिक्षकों तक का मानक तय किया गया है।
इसमें प्रत्येक मुख्य विषय (जैसे इतिहास, भूगोल, भौतिकी, रसायन, गणित, कंप्यूटर, एकाउंटेंसी आदि) के लिए पद निर्धारित किए गए हैं।
विभाग का उद्देश्य
शिक्षा विभाग का स्पष्ट मानना है कि इस बार ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और डेटा-बेस्ड होगी। किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी न हो और न ही आवश्यकता से अधिक शिक्षक एक ही जगह जमे रहें, इसी संतुलन (Rationalization) को बनाने के लिए DEO और DPO को बारीकी से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण के पूरा होते ही जिलों से फाइनल रिक्ति (Vacancy) का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिसके बाद शिक्षक अपने पसंदीदा स्कूलों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
ट्रांसफर-पोस्टिंग में पुरुष शिक्षकों के साथ भेदभाव खत्म हो
ट्रांसफर में गृह प्रखंड की बाध्यता समाप्त हो; महिलाओं के समान केवल गृह पंचायत की बाध्यता हो
सभी प्रारंभिक विद्यालयों में 50% न्यूनतम सीट पर महिलाओं की पोस्टिंग हो; जब नौकरी में 50% आरक्षण है तो पोस्टिंग में 50% आरक्षण लागू हो
शहरों में महिलाओं और सुदूर गांव में केवल पुरुषों की पोस्टिंग स्वीकार्य नहीं
अमित विक्रम
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
BPSC TRE 4 के लिए महत्वपूर्ण: बिहार में माध्यमिक-उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए नए मानक तय, जानें किस स्कूल में कितने पद – देखें पूर्व का लेटर
पटना: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी माध्यमिक (कक्षा 9-10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12) विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या का नए सिरे से मानक निर्धारण (Norms Fixation) कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक योगेन्द्र सिंह द्वारा जारी यह आदेश आगामी BPSC TRE 4 की तैयारियों और पदों के सटीक आकलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए नियमों के तहत अब स्कूलों की श्रेणी के आधार पर शिक्षकों की अधिकतम संख्या तय कर दी गई है। साथ ही, शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षकों को जरूरत पड़ने पर आपस में एक-दूसरे की कक्षाओं में पढ़ाने (Cross-Teaching) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
1. माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9-10): विषयवार शिक्षकों की संख्या
राजकीय, राजकीयकृत, प्रोजेक्ट, उत्क्रमित और नवस्थापित उच्च माध्यमिक विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षकों (कक्षा 9-10) के पद इस प्रकार आवंटित किए जाएंगे:
सामाजिक विज्ञान: 01 पद
गणित: 01 पद
विज्ञान: 01 पद
भाषा (हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगला, मैथिली, फारसी, अरबी): कुल 08 विषयों के लिए 03 पद।
संगीत, ललित कला एवं नृत्य: कुल 03 विषयों के लिए 01 पद (यह केवल राजकीय/राजकीयकृत/प्रोजेक्ट कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए है)।
शारीरिक शिक्षक: 01 पद
विशेष शिक्षक: आवश्यकतानुसार।
अधिकतम सीमा: राजकीय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट उच्च माध्यमिक विद्यालयों में (विशेष शिक्षक को छोड़कर) अधिकतम 08 माध्यमिक शिक्षक और उत्क्रमित/नवस्थापित स्कूलों में अधिकतम 06 माध्यमिक शिक्षकों का मानक तय किया गया है।
2. उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 11-12): विषयवार शिक्षकों की संख्या
उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12) के अध्यापन के लिए निम्नलिखित मानक तय किए गए हैं:
विज्ञान समूह (भौतिकी, रसायनशास्त्र, गणित, वनस्पतिशास्त्र, जन्तु विज्ञान): कुल 05 विषयों के लिए 04 पद (जन्तु विज्ञान एवं वनस्पतिशास्त्र में से एक ही पद दिया जाएगा)।
कला समूह (इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान एवं दर्शनशास्त्र): कुल 08 विषयों के लिए 04 पद।
कंप्यूटर: 01 पद
भाषा (12 विभिन्न भाषाएं): कुल 04 पद।
संगीत: 01 पद
वाणिज्य समूह (लेखाशास्त्र, बिजनेस स्टडीज एवं इंटरप्रेन्योरशिप): कुल 03 विषयों के लिए 02 पद (केवल राजकीय/राजकीयकृत/प्रोजेक्ट कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए)।
अधिकतम सीमा: राजकीय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिकतम 16 और उत्क्रमित/नवस्थापित स्कूलों में अधिकतम 14 उच्च माध्यमिक शिक्षकों का मानक निर्धारित किया गया है।
3. इस फैसले की 4 सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बातें
9वीं से 12वीं तक क्रॉस-टीचिंग: यदि किसी विद्यालय में किसी विषय के शिक्षक अनुपलब्ध हैं, तो आवश्यकताओं को देखते हुए कक्षा 11-12 के शिक्षक कक्षा 9-10 में और कक्षा 9-10 के शिक्षक कक्षा 11-12 में जाकर पठन-पाठन का कार्य करेंगे। शिक्षकों को हर कार्यदिवस पर अधिक से अधिक कक्षाओं का संचालन करना अनिवार्य होगा।
60 से अधिक छात्र होने पर बनेगा नया सेक्शन: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कक्षा में 60 से अधिक छात्र/छात्राओं का नामांकन होता है, तो वहां उपकक्ष (Section) का संचालन किया जा सकता है। उसी के अनुरूप शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन होगा।
भाषा के पदों पर विशेष ध्यान: भाषा के शिक्षकों का निर्धारण करते समय निर्देश दिया गया है कि हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू (जहाँ उर्दू भाषी छात्र हों) और संस्कृत (जहाँ छात्र उपलब्ध हों) का पद स्कूल में अवश्य दिया जाए।
अनावश्यक शिक्षकों का होगा तबादला: यदि इस नए मापदंड के कारण किसी स्कूल में विषय विसंगति (सरप्लस शिक्षक) पाई जाती है, तो विभाग की स्थानांतरण नीति के तहत संबंधित शिक्षक का ट्रांसफर दूसरे स्कूलों में कर दिया जाएगा।
3 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा डेटा
निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे इस नए मानक के आधार पर विद्यालयों में स्वीकृत बल और आवश्यक शिक्षकों की संख्या से संबंधित आंकड़ों की एंट्री ई-शिक्षाकोष (e-Shikshakosh) पोर्टल पर 03 दिनों के भीतर कराना सुनिश्चित करें। इस आदेश के लागू होने के साथ ही पूर्व में जारी सभी पुराने मापदंड संशोधित माने जाएंगे।
India should ask US Ambassador in New Delhi to go back to Washington and remain there unless US expresses regret for the reckless killing of our citizens on sea. But Modi is a pussy cat before Donald. He shivers before him.