सबसे गंभीर मुद्दा महिलाओं की भागीदारी का है।
ग्रामीण महिलाओं की LFPR 59.1% है, जबकि शहरी महिलाओं में सिर्फ 22.2%।
शहरी पुरुषों और महिलाओं के बीच भी बहुत बड़ा गैप है।
सरकार को रोजगार सृजन की रणनीति तुरंत बदलनी चाहिए।
#IndianEconomy#WomenInWorkforce
भारत में बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
हालांकि PLFS रिपोर्ट के मुताबिक कुल बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% हो गई है, लेकिन असली समस्या कहीं और है।
शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर लगातार ऊंची बनी हुई है।
#UnemploymentInIndia
भारत के कुल आयात का 30-40% हिस्सा सिर्फ चार वस्तुओं पर निर्भर है — कच्चा तेल, सोना, खाद्य तेल और रासायनिक उर्वरक।
इनके दाम बढ़ने से हमारा आयात बिल और बढ़ेगा, रुपया और कमजोर होगा।
समय आ गया है कि सरकार तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
#Rupee#ImportBill#AtmanirbharBharat#Economy#RBI
सौरभ यादव जी ने नया यूट्यूब चैनल शुरू किया है। इनका इंटरव्यू करने का तरीका बहुत ही शानदार है। आप सबको जऱूर पसंद आएगा।
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@AnilYadavmedia1@ambar_parmindar@askrajeshsahu@askshivanisahu
भारतीय संस्कृति और पश्चिमी प्रभाव: एक संतुलित दृष्टिकोण
हम अक्सर सुनते हैं कि पश्चिमी सभ्यता ने हमारे रहन-सहन और पहनावे को प्रभावित किया है, और यह बात सच भी है। आज के भारतीय युवा जींस, टी-शर्ट और फास्ट फूड को अपना रहे हैं। लेकिन, क्या हम सिर्फ इन्हीं सतही चीज़ों को पश्चिमीकरण मान रहे हैं? पश्चिमी सभ्यता का असली सार विज्ञान, तकनीक, लोकतंत्र, और नवाचार में है।
हमें यह स्वीकार करना होगा कि पश्चिमी देशों ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, और आर्थिक विकास के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा दिया है, जिसने उन्हें चांद पर पहुंचने और इंटरनेट जैसी सुविधाएं बनाने में मदद की। क्या हम सिर्फ कपड़े और खान-पान को अपनाकर आधुनिक हो रहे हैं? नहीं।
आधुनिकता का अर्थ सिर्फ बाहरी दिखावा नहीं है। इसका मतलब है कि हम अपनी सोच को विकसित करें। हमें अपनी भारतीय जड़ों को मजबूती से थामे रखते हुए, पश्चिमी सभ्यता के अच्छे गुणों, जैसे कड़ी मेहनत, समय की पाबंदी, और व्यवस्थित कार्यप्रणाली को अपनाना चाहिए। सही मायने में विकास तब होगा जब हम दोनों सभ्यताओं के बेहतरीन तत्वों का संगम करेंगे।
हमें अपनी संस्कृति का सम्मान करते हुए, पश्चिमी जगत के विज्ञान और प्रगति को अपनाना होगा। तभी हम एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बन पाएंगे।
आज की दुनिया में में व्यापार युद्ध, सैन्य युद्ध से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
तभी तो चीन से सीमा विवाद के बाद भी व्यापार और निवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आर्थिक हित आज सर्वोपरि मानते जाते हैं।
लेकिन अमेरिका भारत की अर्थव्यवस्था को हानि पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
प्रकृति टोकरी और सिंक दोनों की तरह काम करती है।
मनुष्य अब टोकरी से अधिक निकाल कर उपभोग कर रहा है और अपशिष्ट अधिक मात्रा में प्रकृति को लौटा रहा है।
नतीजा #cloudburst#uttarkashicloudburst