दुनिया की नज़र में तुम हारे हुए हो सकते हो...
फिर भी तुम पूर्ण हो... अगर तुम अब भी मैदान में हो। पूर्णता सिर्फ़ जल्दी championship जीतने में नहीं है। बार-बार कोशिश करने में है।
सही काम में मैं बार-बार हारता हूँ... लेकिन जानता हूँ - यह लड़ाई ज़रूरी है। इसलिए “perfect loser” बनना भी एक तरह की पूर्णता है। हारे, लेकिन भागो मत।
सही क्योंकि काम की पूर्णता उसके परिणाम में नहीं है... पूर्णता तुम्हारी नीयत में है। तुम किस इरादे से काम कर रहे हो? इसलिए परिणाम नहीं, पूर्णता की तलाश करो। कोशिश करते रहो। मैदान में बने रहो।
फोन: आपके और वास्तविकता के बीच एक मध्यस्थ
पहले वास्तविकता कुछ ऐसी थी:
दुनिया → आप
लेकिन अब हम धीरे धीरे ऐसे जीते जा रहे हैं:
दुनिया → स्क्रीन → एल्गोरिदम → आप
हम दुनिया को अब सीधे नहीं देखते, बल्कि वही देखते हैं जिसे स्क्रीन और एल्गोरिदम हमारे सामने चुनकर रखते हैं।
इससे सिर्फ हमारी सूचना नहीं बदलती, हमारा ध्यान भी बदलता है और जिस चीज़ पर आपका ध्यान लगातार जाता है, धीरे-धीरे वही आपकी वास्तविकता बन जाती है।
इसीलिए मोबाइल से विराम लेकर वास्तविकता में भी उठिए, बैठिए, लोगों से मिलिए, प्रकृति को देखिए, अपने आप को डिटॉक्स कीजिए।
स्क्रीन को अपने जीवन का माध्यम बनाइए, जीवन स्वयं मत बन जाने दीजिए।
जो वास्तविक प्रेमी होगा वो कहेगा...
जितना बेहतर हो सकते हो हो जाओ। जितना ऊँचा उड़ सकते हो उड़ो। भले ही फिर मेरी पकड़ से भी बाहर के हो जाओ कोई बात नहीं।
मैं तुमको देखूँगा ऊपर उड़ते हुए और वही मेरा आनंद होगा। मुझे तुम्हारे लिए ज़मीन पर पिंजरा थोड़ी बनाना है। वास्तविक प्यार में रिश्ते की शुरुआत भले ही आप कह लो कि दो व्यक्तियों से होती है।
पर उसका अंत होता है आकाश के साथ रिश्ता बनाने में। हम तुम साथ थे वो रिश्ते की शुरुआत थी।
और रिश्ता इसलिए है कि तुम्हारा रिश्ता वहाँ आकाश से बन जाए। चाहूँगा मैं कि मैं भी तुम्हारे साथ उड़ूँ।इसलिए नहीं कि मुझे तुम्हारा साथ चाहिए इसलिए कि मुझे भी आकाश का साथ चाहिए। हम दोनों साथ-साथ उड़ेंगे।
~ आचार्य प्रशांत
अंतरिक्ष में छतरी
IDEA ये है कि पृथ्वी तक जो सूरज की रोशनी आती है, उसको रोका जाएगा। कैसे रोका जाएगा? वो कह रहे हैं कि करीब 80 से 100 साल लगेंगे और हम लाखों satellites एक ऐसी जगह पर जाकर के स्थापित कर देंगे, जो पृथ्वी और सूरज के बीच वहाँ पर है, जहाँ पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण, सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बिल्कुल बराबर हो जाता है। तो satellites वहीं रहेगा।
तो सूरज से जो रोशनी आ रही है पृथ्वी की ओर, satellites पर एक film होगी, एक screen होगी, वो उस रोशनी को पृथ्वी तक आने से थोड़ा-सा रोक देगी। 1.8% रोक देगी।तो जब पृथ्वी पर सूरज की रोशनी पृथ्वी पर कम आएगी, तो पृथ्वी कम गर्म होगी और इस दौरान हम जी भर के कामना पूरी कर सकते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कर सकते हैं।
हम अपनी कामनाओं को नहीं रोकेंगे। हमारा जो अहंकार है, वो किसी भी प्रकार रुकने को तैयार नहीं है। हम कह रहे हैं, हम कार्बन डाइऑक्साइड तो बढ़ाते ही रहेंगे। सूरज को रोक देंगे। सूरज को रोक देंगे। आप अहंकार देखिए।
और ये जो प्रोजेक्ट है, ये दसों सालों तक कई ट्रिलियन डॉलर का है। और इस प्रोजेक्ट को निष्पत्ति देने वाली जो technology है, वो अगले कई दशकों तक उपलब्ध भी नहीं होगी।
और मैंने आपको कहा था, 20 साल को लें, जिसके बाद हमारी नदियाँ सूखने लग जाएँगी। climate crisis हमारे सर पर खड़ी है कि आपको अब कुछ दशकों के भीतर ही निपटा देंगे। और यहाँ कहा जा रहा है कि इतने trillion dollar लगाकर के एक काल्पनिक technology बनाई जाएगी।
जिसके द्वारा पृथ्वी और सूरज के बीच में एक छतरी लगा दी जाएगी और वो छतरी सूरज की गर्मी को पृथ्वी तक आने से रोक देगी। और ऐसी कोई technology आज तक है नहीं।
जिन वैज्ञानिकों ने स्वयं यह paper निकाला था और पहली बार इस प्रकार का प्रस्ताव दिया था, उन्होंने खुद ही बोल दिया आगे जाकर के कि ये जो हम बोल रहे हैं, यह असंभव है करना। करा ही नहीं जा सकता। ना जाने कितने तरीकों से असंभव है।
ये बताइए खान सर... आप इतनी हिम्मत लाते कहाँ से हैं? कुछ दिन पहले यही लोग थे जो आपको 'फैजल खान', 'जिहादी', 'मुल्ला' और 'यूपी वाला' बोलकर ट्रोल कर रहे थे!
डॉक्टर की दवा नहीं, बाबाजी की बूटी चाहिए
विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत बेंगलुरु की उद्यमी विनीता के प्रश्न का उत्तर देते हैं, जो India में doctors के खिलाफ violence पर आधारित है। आचार्य जी traditional healers जैसे नीम हकीम और spiritual gurus के प्रति श्रद्धा की तुलना योग्य medical professionals के प्रति आक्रामक रवैये से करते हैं। वे बताते हैं कि यह विरोधाभास एक गहरे विश्वास से उपजता है, जो एक उच्च शक्ति को सभी परिणामों के लिए जिम्मेदार ठहराता है और व्यक्तिगत जिम्मेदारी को कमजोर करता है। आचार्य जी तर्क देते हैं कि सच्चे समाधान मानव प्रयास और scientific progress में निहित हैं, न कि किसी दिव्य हस्तक्षेप में। वे superstitions और मिथकों पर भरोसा करने की प्रवृत्ति की आलोचना करते हैं, जो प्रगति में बाधा डालती है। उन्होंने चिकित्सा पेशेवरों के कठिन परिश्रम और अनुसंधान को सम्मान देने की आवश्यकता पर बल दिया और मानसिकता में बदलाव लाने का आह्वान किया। वीडियो के अंत में, आचार्य जी सच्ची spirituality को खुद को समझने और अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेने के रूप में परिभाषित करते हैं, न कि किसी बाहरी उद्धारकर्ता पर निर्भर रहने के रूप में। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी एजेंसी को पहचानें और अपने जीवन व समाज को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाएं। यह संवाद व्यक्तिगत जिम्मेदारी, scientific thinking, और spirituality के गहरे अर्थों पर केंद्रित है।
Jaha dava aur dua dono mil jaye .... Wahi sabse bada punya hai.. ❤️
Kabhi -kabhi kisi ki dua mandir ki ghantiyo se nahi, hospital ke bill se judi hoti hai..
गिलोय, जिसे अमृता और मधुपर्णी के नाम से भी जाना जाता है, हमारे आसपास पाई जाने वाली एक गुणकारी औषधीय लता है। आयुर्वेद में इसका खास महत्व है और इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से कई रोगों के उपचार एवं शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए किया जाता रहा है। साधारण-सी दिखने वाली यह लता अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है।
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