3. निर्वाचन से संबंधित एप्लिकेशन को सही तरीके से शुरू होने के बाद ही बीएलओ द्वारा कार्य कराया जाना चाहिए ।
4. निर्वाचन के कार्य को तय समय सीमा में कार्य होने तक किसी भी प्रकार की मानसिक उत्पीड़ना नहीं दी जानी चाहिए । समयावधि उपरांत विधिक कार्यवाही करें ।
कृपया संज्ञान लें
1. निर्वाचन आयोग के द्वारा निर्वाचन के जो भी विशेष कार्य कराएं जाएं उन कार्यों को सुचारू रूप से करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए ।
2. किसी भी अभियान से संबंधित आदेश जारी होते ही संबंधित कागजातों को समय से तहसील पर पहुंचाया जाएं ।
बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी कह रहे हैं कि हमने प्रधान अध्यापकों के पद समाप्त नहीं किए हैं
हम कह रह कि पद यदि समाप्त नहीं है तो स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियुक्त प्रधान अध्यापक को सप्लस क्यों घोषित किया जा रहा है
तो अधिकारी का कहना है कि नियुक्ति बहीं होगी जहाँ पीएस में 150 तथा ��ूपीएस में 100 छात्र संख्या होगी क्योंकि आर टी ई के अनुसार बहाँ प्र अ नहीं होगा तो ऐसे पदों का शिक्षक क्या करेंगे ।
आर टी इ वर्ष 2009 में आया और उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में लागू किया
2011 से 2012 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि यदि किसी विद्यालय में आपको न्यून तम २ स अ रखने हैं तो एक प्र अ एवं एक स अ रखिए तो उस सरकार ने इस सुझाव को माना और किसी भी प्र अ को नहीं हटाया गया
2012 स��� 2017 तक की सरकार में तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री राम गोबिंद चौधरी जी के समय भारत सरकार से आर टी ई के अनुसार शिक्षक तैनाती की बात जब आई तो उन्होंने संघ को वार्ता को बुलाया और चर्चा के बाद निर्णय लिया कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधान अध्यापक अवश्य नियुक्त करेंगे उसके बाद उन्होंने प्र अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए प्रा वि के प्र अध्यापक के पद पर पदोन्नति हेतु ��वश्यक न्यूनतम सेवा अवधि 5 वर्ष को घटाकर 3 वर्ष कराया और लगभग एक लाख शिक्षकों की पदोन्नति हुई
यही बात आज भी विभाग से कह रहे हैं कि प्रत्येक विद्यालय में एक प्र अध्यापक अवश्य रखिए लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है
वर्ष 2015 से आज तक एक भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं हुई ।
कोई भी विभाग,संस्था या सरकार बिना मुखिया के नहीं चलता लेकिन यह विद्यालय विना हेड मास्टर के चलायेंगे और हेड काम सहायक अध्यापक से लेंगे वो भी हेड के पद का वेतन दिए बिना ।यह तानाशाही नहीं तो क्या है ।
जब तमाम तथाकथित संघ केवल एक ही मुद्दों पर शिक्षकों को आंदोलन को सपोर्ट करने की बात करते थे तो हमने सदैव कहा कि शिक्षकों की प्रत्येक समस्या के निराकरण को प्राथमिकता में नहीं रखा तो यह सब छीन लेंगे
आज बही दिन हम सबके सामने है
हजारों प्रधान अध्यापकों को सरप्लस घोषित कर दिया गया अर्थात उन विद्यालयों में प्रधान अध्यापक के पद समाप्त ��र दिये गये ।आप हेड मास्टर के पद माँग रहे थे तो उन्होंने हजारों विद्यालय बंद करने का निर्णय ले लिया ।
इसलिए आवश्यक है कि आम शिक्षक को इस मनमानी से अवगत कराए
शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात सहन नहीं किया जायेगा ।
हे @chetakofficial
ये क्या दुर्दशा है। दोस्त ने 25 जनवरी को चेतक बुक करा था। तब से न स्कूटर का कुछ अता पता है, न बुकिंग का और न बुकिंग अमाउंट का। एजेंसी वाला बोलता है कंपनी से बात करो, कंपनी वाला ��ुछ बोलता नहीं है। कई मेल डाल चुका है।
क्या मानू? दो हज़ार पे नियत ख़राब हो गई? 😀
सरकारी शिक्षकों के कार्य गिनाने लग जाये तो बहुत हैं। यह सारे कार्य शिक्षक कर भी रहा है। और अगर शिक्षक अपनी कुछ मांगे सरकार के सामने रख रहा है तो वह विरोधी हो गया? कैसे? हम अपनी परेशानियाँ किसको बताएंगे?
#Boycottdigitalattendance#NoInfraNoAttendance
स्कूल बने तालाब।।।
गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति कब ??
हमको चाहिए हमारा अधिकार ,पेंशन, ट्रांसफर,EL , राज्य कर्मचारी पर करो विचार
#Boycottdigitalattendance
शिक्षकों ने राज्य कर्मचारियों की भांति सामान्य सुविधाएं जैसे EL, कैश लेस चिकित्सा, अर्ध अवकाश आदि की मांग क्या कर ली,
सब लोग शिक्षकों को ताने मारने लगे।
एटेंडेंस लीजिए लेकिन उन मांगों पर भी तो बात कीजिए जो बाकी सभी को बिना मांगें मिल रही हैं।
#Boycottdigitalattendance