माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा बांदा भ्रमण के दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया एवं छात्रों का उत्साहवर्धन किया गया।साथ ही मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेश चिकित्सा कार्ड का वितरण भी किया गया।
आज से स्कूल चलो अभियान की शानदार शुरुआत!
पीएमश्री उच्च प्राथमिक विद्यालय अर्जुनाह (कम्पोजिट), क्षेत्र-महुआ, बांदा में झंडी दिखाकर स्कूल चलो अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। @DM_Banda1@CMOfficeUP@kpmaurya1@UpRuralDev
#bandapolice सड़क सुरक्षा माह के समापन पर पुलिस लाइन बांदा में स्कूली बच्चों द्वारा यातायात सुरक्षा थीम पर ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करने का संदेश देती हुई सुंदर पेंटिंग की प्रस्तुति दी गई।
#UPPolice
मा0 मुख्यमंत्री उ0प्र0 सरकार श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आयोजित अनुदेशकों के सम्मान,बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ,प्रतीकात्मक चेक वितरण आज कलेक्ट्रेट सभागार में मा0 शिक्षक विधायक श्री बाबूलाल तिवारी जी की उपस्थिति में किया गया।
मा0मुख्यमंत्री उ0प्र0 सरकार श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान,बढ़े हुए मानदेय वितरण कार्यक्रम का सजीव प्रसारण ,प्रतीकात्मक चेक वितरण आज कलेक्ट्रेट सभागार में मा0 प्रभारी मंत्री, जनपद बाँदा श्री नन्द गोपाल गुप्ता (नन्दी जी) की उपस्थिति में किया गया।
"अपरोक्षानुभूति"
एवमात्मनि नाज्ञाते देहाध्यासो हि जायते।
स एवात्मा परिज्ञातो लीयते च परात्मनि।।८७।।
(भगवद्पादाचार्य आदि शंकराचार्य द्वारा रचित अपरोक्षानुभूति)
इस श्लोक का प्रतिपाद्य यह है कि जब तक आत्मा का यथार्थ स्वरूप ज्ञात नहीं होता, तब तक देहाध्यास अनिवार्य रूप से उत्पन्न होता है; और वही आत्मा जब सम्यक् रूप से जानी जाती है, तब जीवभाव का समस्त मिथ्याभास परमात्मा में लीन हो जाता है। यहाँ भगवान आदि शंकराचार्य का मन्तव्य अत्यन्त स्पष्ट है कि बन्धन कोई वास्तविक सत्ता नहीं, अपितु आत्म-अज्ञान से उत्पन्न अध्यासमात्र है। अज्ञान से देहात्मबुद्धि उत्पन्न होती है, और ज्ञान से उसका निवर्तन हो जाता है।
“आत्मनि नाज्ञाते” यह पद अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसका अभिप्राय केवल इतना नहीं कि आत्मा के विषय में कोई सूचना या धारणा नहीं है; वरन् यह कि आत्मा का अपरोक्ष, स्वरूपतः, तत्त्वतः ज्ञान नहीं हुआ है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, असंग, निरविकार चैतन्य को नहीं जानता, तब वह स्वाभाविक ही अनात्म में आत्मबुद्धि कर बैठता है। यही अविद्या का कार्य है। आत्मा का अज्ञान शून्यता नहीं उत्पन्न करता; वह मिथ्याज्ञान को जन्म देता है। अतः जहाँ आत्मतत्त्व का प्रकाश नहीं है, वहाँ देह, मन, बुद्धि, प्राण और अहंकार का समुच्चय ही “मैं” के रूप में ग्रहण कर लिया जाता है - यही देहाध्यास है।
देहाध्यास का अर्थ है - जो आत्मा नहीं है, उसे आत्मा मान लेना। शरीर जड़ है, दृश्य है, परिवर्तनशील है, जन्म और मृत्यु के अधीन है; परन्तु अज्ञानवश जीव कहता है - मैं शरीर हूँ”, “मैं रोगी हूँ”, “मैं वृद्ध हूँ”, “मैं दुःखी हूँ”, “मैं कर्ता हूँ”, “मैं भोक्ता हूँ।” यहाँ देह के धर्म आत्मा पर आरोपित हो जाते हैं। वस्तुतः यह वही मूल भ्रान्ति है, जिसे शाङ्करवेदान्त ‘अध्यास’ कहता है। समस्त संसार, समस्त शोक, समस्त भय, समस्त राग-द्वेष और समस्त बन्धन इसी देहात्मबुद्धि की शाखाएँ हैं। अतः देहाध्यास केवल एक दार्शनिक त्रुटि नहीं, समस्त संसृति का मूल बीज है।
किन्तु श्लोक का उत्तरार्ध उतना ही मंगलमय है - “स एवात्मा परिज्ञातो लीयते च परात्मनि”। वही आत्मा, जो अज्ञानावस्था में जीव, कर्ता, भोक्ता, सीमित सत्ता और देहाभिमानी पुरुष के रूप में प्रतीत होती थी, जब परिज्ञात होती है अर्थात् जब उसका स्वरूप सम्यक् विवेक, श्रवण, मनन और निदिध्यासन के द्वारा प्रत्यक्षतया जाना जाता है, तब वह अपने परमार्थस्वरूप में प्रतिष्ठित हो जाती है। यहाँ “लीयते” का अर्थ - किसी वस्तु का नष्ट हो जाना नहीं है, क्योंकि आत्मा कभी नष्ट होने वाली वस्तु नहीं। यहाँ लय का आशय है - मिथ्या जीवभाव का निवर्तन, सीमाबुद्धि का शमन, उपाधिजन्य भेद-प्रतीति का अन्त। जैसे घटाकाश अपने घटोपाधि के निवृत्त होने पर महाकाश से भिन्न नहीं रहता, वैसे ही आत्मा का जीवाभास परमात्मस्वरूप ब्रह्म में अभिन्न रूप से प्रकाशित होता है।
इस श्लोक में अद्वैत का अत्यन्त सूक्ष्म रहस्य निहित है। आत्मा को परमात्मा में “लीन” कहा गया है, किन्तु यह लय किसी वास्तविक द्वैत के पश्चात् होने वाला संयोग नहीं है। आत्मा और परमात्मा वस्तुतः दो नहीं हैं। भिन्नता केवल उपाधियों से प्रतीत होती है। अज्ञानावस्था में वही एक चैतन्य जीव के रूप में सीमित जान पड़ता है; ज्ञानावस्था में वही अपने अनन्त, अखण्ड, ब्रह्मस्वरूप में अनुभूत होता है। अतः यहाँ लय का तात्पर्य है - अविद्याकल्पित व्यक्तित्व का लोप और स्वाभाविक ब्रह्मैक्य का प्रकाश।
शाङ्करभाष्य की परम्परा में यह सत्य बार-बार प्रतिपादित हुआ है कि मोक्ष कोई नूतन उत्पाद्य वस्तु नहीं है। आत्मा को कहीं से लाना नहीं, बनाना नहीं, शुद्ध करना नहीं, बदलना नहीं। आत्मा तो सदा सिद्ध है। जो उत्पन्न होता है, वह नश्वर होता है; अतः यदि मोक्ष उत्पन्न मान लिया जाए तो वह भी अनित्य हो जायेगा। इसलिए वेदान्त कहता है कि मोक्ष; ज्ञानजन्य है ! ज्ञान किसी वस्तु को उत्पन्न नहीं करता, केवल आवरण हटाता है। जैसे - सूर्य मेघ हटने पर प्रकट होता है, वैसे ही आत्मा अज्ञान हटने पर प्रकाशित होती है। देहाध्यास अज्ञान से “जायते” और आत्मस्वरूप-प्रकाश से “लीयते” यही इस श्लोक की दार्शनिक धुरी है।
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दिनांक 26.09.2025 को मिशन शक्ति 5.0 के अन्तर्गत मंडलायुक्त महोदय, जिलाधिकारी महोदया द्वारा के0जी0बी0वी0 महोखर में अध्ययनरत बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने, हक-अधिकार जानने व आत्मरक्षा करने का संदेश दिया गया। साथ ही बालिकाओं को पुरस्कार वितरित कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा परिषद् के छात्रों के बहुमुखी प्रतिभा के विकास हेतु बैगलेस डे का आयोजन,जिसमें राजकीय कन्या सीनियर विद्यालय बदौसा की छात्राओं द्वारा विभिन्न नवाचार एवं गतिविधियां की गयी।
बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा छात्रों के बीच रीडिंग हैबिट डेवलप करने हेतु प्रतिदिन समाचार पत्रों का वाचन अवश्य कराए जाने के निर्देश दिए, जनपद बांदा का यह नवाचार बच्चों में रीडिंग स्किल को बढ़ाने की दृष्टि से नए आयाम स्थापित कर रहा है। @UPGovt@basicshiksha_up@bsa_banda
आज दिनांक 24.11.2025 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महोदय द्वारा उ0प्रा0वि0 कनवारा-2 में तिथि भोजन का संचालन किया गया। एवं भोजन उपरान्त बच्चों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षण कार्य किया गया।
बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक एवं शिक्षामित्रों को भारत निर्वाचन आयोग के कार्य में जिलाधिकारी महोदया बाँदा द्वारा उत्कृष्ट बी0एल0ओ0 कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया ।
आज 05.09.2025 को मा0मुख्यमंत्री जी के करकमलों से लोकभवन लखनऊ से आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट बॉदा में अध्यक्ष नगर पालिका,शिक्षक विधायक प्रतिनिधि,विधायकगण प्रतिनिधि,जिलाधिकारी महोदया एवं समस्त जनपद स्तरीय अधिकारीगण की उपस्थिति में शिक्षक दिवस मनाया गया।
वर्ष 2023 हेतु जनपद को समग्र विकास श्रेणी के अन्तर्गत भारत सरकार की 12 महत्वाकांक्षी योजनाओं हेतु जनमानस में लाये गये व्यवहार परिवर्तन के लिए 17वें लोक सेवा दिवस पर नई दिल्ली में मा. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित हुई डीएम मोनिका रानी।
यूपी के मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से ‘‘सही पोषण-देश रोशन, थीम के तहत जिले के परिषदीय विद्यालयों में उच्च गुणवत्तापरक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालयों में पोषण.. @myogiadityanath@myogioffice@ravikishann@narendramodi