हम स्कूल ठीक करना चाह रहे है। लेकिन पूरे देश में भाजपा के गुंडे सिर्फ हिंसा फैला रहे है।
अब्दुल की सिर्फ यह गलती थी कि वो अपने गांव का स्कूल ठीक कराना चाहता था। लेकिन भाजपा के गुंडों ने उसके पिताजी को इतना मारा कि उनकी मौत हो गई।
: आशुतोष रंका
RSS-BJP goons throw ink at me and around 20 other women in Ranchi, Jharkhand!
For them ink is a tool to try to shame others, we will write the future with ink!
पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड…जर्सी गाय…दीदी ओ दीदी…ये सब फूहड़ और छिछोरी बातें क्या Gen Z ने बोली थीं? आज जब अपने पर आई तो भाषा और नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे?
आज जब राज्यसभा में @SanjayAzadSln जी डॉ. हेडगेवार का वह ऐतिहासिक पत्र पढ़ना चाहते थे, जिसमें तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में सम्मान देने की बात दर्ज है, तो उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इतिहास को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता। RSS अपना ऐसा अतीत आखिर कब तक छुपाएगा? आने वाली पीढ़ियाँ दस्तावेज़ खोजेंगी, पढ़ेंगी और स्वयं तय करेंगी कि सच क्या था।
इसका ऐतिहासिक संदर्भ भी देखिए।
19 दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया और ब्रिटिश साम्राज्य से पूर्ण स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का आह्वान किया। इसके बाद 31 दिसंबर 1929 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया तथा कांग्रेस ने देशवासियों से 26 जनवरी 1930 को "स्वतंत्रता दिवस" मनाने का आह्वान किया।
इसके जवाब में 21 जनवरी 1930 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने एक परिपत्र जारी कर सभी RSS शाखाओं को निर्देश दिया कि वे 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज प्रस्ताव का स्वागत करें, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज का सम्मान करें।
आपने यह इतिहास सदन में पढ़ने नहीं दिया। अब पूरा देश इसे पढ़ेगा। इस पोस्ट के साथ संलग्न ऐतिहासिक दस्तावेज़ भी देखिए और स्वयं तय कीजिए कि उस दौर में तिरंगे को लेकर किसका क्या रुख़ था।
ध्यान से सुनिए।
@dhruv_rathee को मोदी जी पहले कह रहे थे “सख़्त क़ानून है”
अब कह रहे हैं “सख़्त क़ानून बनाऊँगा”
2024 NEET पेपर लीक में, पहले आरोपियों को ज़मानत दिलवाई, अब CBI ने मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के ख़िलाफ़ कोई सबूत पेश नहीं किया और वो बरी हो गया।
मोदी ने निर्लज्जता की सारी हदें पार कर दी हैं।
@narendramodi Ye samaj aaneme kafi samay lag gaya...
Samaj kam hai ya ahenkaar jada hai vishwa guru ji... Lagataa he abhi bhi nahi samaje... Apane pradhan ka estifa lelo... Strict action wale
Appearing before the Delhi High Court in the plea challenging the alleged police brutalities during the recent student protest over examination paper leaks, Senior Advocate Gopal Sankaranarayanan argued that judicial intervention was imperative to uphold the rule of law. He submitted that if the Court failed to intervene, it would effectively give the police "a licence to get away with absolutely anything because they have the sanction of their political masters."
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