एक बार की बात है,
UP के गृह सचिव AK गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि,
ठंड से कोई नहीं मरता, ऐसा होता तो साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं होता,
इस बयान के बाद मुख्यमंत्री @yadavakhilesh ने गृह सचिव को उनके पद से हटा दिया,
ऐसी ही रंगबाजी आज DSP PP Singh ने लखीमपुर में दिखाई है,
कोई और सरकार होती तो DSP के बयान को लेकर मीडिया सरकार पर चढ़ बैठता,
और अब तक DSP सस्पेंड हो गए होते,
लेकिन ये सब प्राचीन काल में हुआ करता था,
IIM , IIT, सेंट्रल यूनिवर्सिटी दलितों पिछड़ों के कब्रगाह बनते जा रहे हैं ।
IIM बैंगलोर में पिछड़े तबके से आने वाले एक ब्राइट स्टूडेंट निलय पटेल की संस्थागत हत्या हुई!
2014 से 2025 के बीच 102 छात्रों ने IIT और IIM में आत्महत्या की। जाति ढूँढ लाइए, सारे दलित पिछड़े आदिवासी हैं।
जातिगत भेदभाव हमारी युवा पीढ़ी को निगल रहा है, द्रोणाचार्य मनुविधान चला रहे हैं। एकलव्य मारे जा रहे है।
रोहित वेमुला की हत्या के बाद सारे प्रोफेसर और उसमें संलिप्त लोगों को क्लीन चिट मिल गई, जिसके कारण जातिवादियों का मनोबल और बढ़ गया।
देश में दलितों पिछड़ों की पहली पीढ़ी के छात्र जो यूनिवर्सिटी पहुँच रहे हैं, उनको हर तरीक़े से परेशान किया जा रहा है ताकि वो पढ़ाई छोड़, अपनी जातिगत काम चुन लें!
हर ऐकडेमिक हत्या हमारे बहुजन समाज पर प्रहार है। देश में जब तक जातिवाद की सज़ा फाँसी नहीं हो जाती, तब तक मनुवादी रुकने वाले नहीं हैं।