मो. खलील , मोतिहारी के भवानीपुर , जिरात मोहल्ला के रहने वाले रेलवे में चौथे श्रेणी के कर्मचारी थे। गाने का शौक था तो " झंकार पार्टी " नाम से आर्केस्ट्रा बनाये । भोजपुरी लोकगीतों के तमाम गीत गए और लोगों ने इन्हे बहुत प्रेम दिया।
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आल्हा का प्रचलन मुख्य रूप से बुंदेलखंड, अवध, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार एवं अन्य भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में है। वर्त्तमान समय में आल्हा शैली में आधुनिक भारत के सपूतों की गाथा सुनाने का पप्रचलन है।
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आज भी कहते हैं की कायर तक आल्हा सुनकर जोश में भर अनेकों साहस के काम कर डालते हैं। आल्हा और उदल दोनों गुरु गोरखनाथ के शिष्य थे। वीर आल्हा बुंदेलखंड के चंदेल राजा परमाल के सेनापति थे जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पृथ्वीराज चौहान की सेना को तहस-नहस कर दिया था।
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इनकी वीरता का विवरण प्रसिद्ध कवि जगनिक द्वारा रचित आल्ह-खंड में मिलता है जिसमें इनके 52 युद्धों का काव्यात्मक विवरण है।
बाजा पर आल्हा सुनने के लिए- https://t.co/GE4IrxLybz
निर्गुण भक्ति धारा का सबसे बड़ा ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब है , जिसमें 6 सिख गुरुओं और ,18 हिन्दू संतो की वाणी का संग्रह है । सूफी संगीत का जन्म भी इसी धारा से होता है।
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साधारण भाषा में कहें तो निर्गुण का अर्थ है - प्राकृत गुणों से रहित।
निराकार ब्रह्म की साधना को समर्पित, भारतीय संगीत की यह विधा श्रोता को ज्ञान-मार्ग की तरफ ले जाती है। यथार्थ का बोध कराने वाला निर्गुण गीत तीनो गुणों (सत्त्व, रजस् तथा तमस्) से परे है #nirgun#folkmusic
और अपनी आडम्बरहीन शैली के चलते आम जनमानस के बीच काफी लोकप्रिय है। निर्गुण भक्ति धारा में कबीर का स्थान सर्वोपरि है मगर रैदास, नामदेव, बाबा फरीद, धन्ना, पीपा सेन, भी कबीर के समकक्ष है ।
हनुमान चालीसा पाठ व परिचर्चा - आज शाम 6 बजे 🎧
भक्तगण इस कार्यक्रम से जुड़कर हनुमान चालीसा का पाठ प्रस्तुत करें। हम इस लाइव कार्यक्रम में चालीसा पाठ सहित धार्मिक चर्चा व बातचीत करते हैं।
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महाकवि विद्यापति के अवसान दिवस पर पिछले रविवार को पटना में चेतना दिवस के एक कार्यक्रम में बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे।
वहां तेजस्वी ने तेज का परिचय देते हुए कहा - "विद्यापीठ बड़े मस्त आदमी थे।"
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विद्यापति समारोह की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिह्न क्यों?
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शनिवार अड्डा - महान हिन्दू सम्राट राजाराज चोल प्रथम क्या 'हिन्दू' नहीं थे? LIVE बहस में जुड़ें - शाम 8 बजे से।
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तंजावुर के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर को महान हिन्दू राजा चोल शासक राजराज चोल प्रथम ने बनवाया था। यह मंदिर बेहद रहस्यमयी है। यहां जानिए सबकुछ। 👇
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