लखनऊ : डिप्टी CM केशव मौर्य ने अफसरों को दिए निर्देश
➡️निर्माण श्रमिकों का BOCW बोर्ड में पंजीकरण अनिवार्य
➡️90 दिन काम करने वाले श्रमिकों का पंजीकरण
➡️VB-G RAM G योजना में पंजीकरण कराने के निर्देश
➡️प्रदेश में अब तक 17.32 लाख श्रमिक पंजीकृत
➡️पंजीकृत श्रमिकों को 17 योजनाओं का मिलेगा लाभ
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कन्नौज : लेखपालों द्वारा समाधान दिवस का बहिष्कार
➡️विभिन्न मांगो को लेकर किया बहिष्कार
➡️तहसील परिसर में धरने पर बैठे लेखपाल
➡️23 अगस्त तक ऑनलाइन काम का बहिष्कार
➡️24 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे
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कौशाम्बी : लेखपाल संघ ने आंदोलन का किया ऐलान
➡️वेतन विसंगति, स्थानांतरण समेत कई मांगें
➡️3 अक्टूबर से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन
➡️8 अक्टूबर से ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार
➡️24 अक्टूबर से धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
➡️लेखपालों ने तहसील दिवस का किया बहिष्कार.
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🗓️2 अक्टूबर सिर्फ गांधी जयंती नहीं, गांधीजी के विचारों को आज के भारत में देखने का अवसर भी है। स्वच्छता से स्वावलंबन तक, स्वदेशी से ग्राम विकास तक, गांधी दर्शन से जुड़े अनेक विचार आज की सरकारी पहलों में अपने आधुनिक रूप में दिखाई देते हैं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही राज्य में इस कानून को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला कानून पारित करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है। हालांकि, इस विधेयक के प्रावधान अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के सदस्यों पर लागू नहीं होंगे।
विधानसभा में इस विधेयक को प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि यूसीसी उन प्राथमिक सुधारों में शामिल है, जिन्हें लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के अनुरूप यह कानून महिलाओं के विधिक अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नए कानून के तहत सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक का औपचारिक पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन न करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, सभी प्रकार के लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण भी जरूरी होगा और संबंध समाप्त होने की स्थिति में इसकी सूचना भी प्रशासन को देनी होगी।
इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को कानूनी रूप से वैध संतान माना जाएगा, और यदि महिला को उसका पार्टनर छोड़ देता है, तो उसे गुजारा भत्ता पाने का पूरा कानूनी अधिकार होगा।
इस कानून के माध्यम से एक से अधिक विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति दबाव या जोर-जबरदस्ती के जरिए शादी कराता है, तो उसके लिए 7 साल तक के कारावास का कड़ा प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, सक्षम अदालत के आदेश के बिना किसी भी अन्य तरीके से लिए गए तलाक को गैर-कानूनी मानते हुए 3 साल तक की जेल की सजा तय की गई है।
कानून में तलाकशुदा जोड़ों को बिना किसी अनुचित शर्त के दोबारा शादी करने का अधिकार दिया गया है और हलाला जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।
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