एक शेर को बचपन में सुना था
एक की कहानी आँखो से देखी
अलविदा शेर!
तेरे होने से दौर मुकम्मल था,हमने बहादुरी को पहली बार किताबों में नहीं,अपनी आँखों से देखा था।
@ProfNoorul@PauriPolice तुम लोगों के अंदर इंसानियत नाम की जगह नहीं बची है
तुम लोग ना जाने कितने लोगों की नजरों में गंदी नाली के कीड़े मकौड़े हो
दीपक भाई मने जहाँ ज़हलियत की हद पार थी वहाँ पर रोशनी खिला दी
सलाम है दीपक भाई को
@yuva_aas ना जाने एक इंसान के इसरे पर कितने ग़रीब लोग का दिल दुखाया है
अफ़सर ग़लत नहीं था लेकिन बताओं में आकर कितने ग़रीब लोग का दिल दुखाया हे तो एक मुख्यमंत्री थोड़ा बचा लेगा
@MuslimSpaces पुलिस प्रसासन के होते हुए ये आतंकी अपनी बात को रख रहें हैं तो पुलिस प्रसासन को ख़त्म करो फिर कानून को डिसमिस करो
फिर इन आतंकीयूँ को खुली छूट दो
खुली छूट सब समाज को होनी चाहिए
ज़ालिमों वक्त वक्त की बात है सब याद रखा जाएगा एक दोर आया था जब हमारी मस्जिदों के लाउडस्पीकरों हटाया गया मस्जिदों तोड़ा गया मकबरों को तोड़ा गया यहाँ तक की हमारी माँ और बहनों के नक़ाब के साथ भी छेड़छाड़ की गई
उस वक़्त जालिमों की सरकार थी
ये बात हम अपनी नसलों भी बता के जाएँगे