#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था।
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🪬सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 292-293 पर दयानंद सरस्वती ने
वैष्णवों को ‘धूड़’ अर्थात तुच्छ कहा और भगवान नारायण (विष्णु) सहित वैष्णवों को ‘चोरमंडली’ की संज्ञा दे दी!🍒
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 8, पृष्ठ 191-192 पर दयानंद जी दावा करते हैं कि सूर्य पर भी मनुष्य रहते हैं और वे वहाँ वेद पढ़ते हैं!
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दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 296 पर दयानंद सरस्वती ने संत शिरोमणि कबीर साहेब, जिन्होंने पूरे समाज को समरसता का मार्ग दिखाया, उनके विषय में जातिगत संदर्भ लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 4 पृष्ठ 95 से 101, दयानंद जी द्वारा बताई गई नियोग व्यवस्था अर्थात पशु तुल्य कर्म से भरा पड़ा है। जिसमें लिखा है कि एक स्त्री आवश्यकता पड़ने पर 11 पुरुषों से और पुरुष 11 स्त्रियों से नियोग (दुष्कर्म) कर सकता है।
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दयानंद सरस्वती ने पहला वार देवाधिदेव महादेव और हिन्दू देवी-देवताओं पर किया है
महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पृष्ठ संख्या 125 पर लिखा है—‘तुम जिस लिंग की पूजा करते हो, यदि वह पृथक होकर यहाँ आ गया, तो कैलाश पर बैठा शिव हिजड़ा रह गया!’