डोनाल्ड ट्रंप अब कोई रिस्क नहीं ले रहे - व्हाइट हाउस आइए, डील और समझौते पर दस्तखत कीजिए, और वहीं कैमरे के सामने नोबेल के लिए रिकमेंडेशन भी कर दीजिए।
यही हुआ भी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अज़रबैजान के राष्ट्रपति और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री के बीच व्हाइट हाउस में शांति और आर्थिक समझौता करवाया।
समझौते के बाद आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने उसी टेबल पर, उसी मौके पर, डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल के लिए आधिकारिक तौर पर रिकमेंडेशन दे दिया।
पाकिस्तान, इजरायल और अब आर्मेनिया - पैटर्न साफ दिख रहा है।
ये वीडियो देखना कितना शर्मनाक/भयावह है !
देश-दुनिया में प्रसिद्ध राजस्थान के खाटूश्याम मंदिर में श्रद्धालुओं को लाठी-डंडों से पीटा गया
जिसमें महिलाएं भी शामिल थी, वहाँ के दुकानदार गुंडों ने ये सब हरकत की
सोचिए राजस्थान में कानून का कितना डर है !
पूरी बहस अब एक जगह आ करके के रुक रही है- manufacturing, भारत के बहुत से दुखों की फिलहाल एक ही दवा है-manufacturing।
चाहे वो भारत से बड़ी संख्या में टैलेंटेड युवाओं का विदेश पलायन (brain drain) हो, या फिर हमारी घरेलू बेरोजगारी, आधुनिक रक्षा उत्पादों में विदेशी आपूर्ति पर हमारा अत्यधिक भरोसा या फिर चीन जैसे देशों के साथ खतरनाक व्यापार घाटा- हर समस्या की जड़ में एक ही समाधान दिखता है
भारत को निर्माण करना होगा- खुद के लिए और दुनिया के लिए।
हर साल लाखों युवा पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं और वहीं बस जाते हैं।
अगर हम उन्हें यहीं बेहतर शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के अवसर दें, तो न हमारा टैलेंट बाहर जाएगा और न ही पैसा।
हमारे पास सिर्फ टैलेंट ही नहीं - हाथ में हुनर और मेहनत करने वाले करोड़ों लोग हैं जो ग्रोसरी डिलीवरी से लेकर फूड डिलीवरी करने में दिन-रात लगे हुए हैं।
जरूरत है स्किल और श्रम को manufacturing और innovation में लगाने की।
और सबसे अहम - हमारा खुद का एक विशाल बाज़ार है। आज चीन हमारे देश में अपने प्रोडक्ट्स बेचकर पैसा कमाता है, और फिर उसी पैसे से पाकिस्तान जैसे देशों को सैन्य मदद देता है। ये चक्र तोड़ना जरूरी है।
जैसे-जैसे भारत तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है, हमारे सामने चुनौतियां भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही हैं। आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। हमारी अर्थव्यवस्था, बाजार और सैन्य ताकत हमें वैश्विक शक्ति बनाती है ,लेकिन यही ताकत अब दुनिया के कई बड़े देशों की बेचैनी का कारण भी बन रही है।
इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है- भारत में बने तेजस MK1A लड़ाकू विमान के लिए अमेरिका से आने वाले इंजन की डिलीवरी। जब भारतीय वायु सेना को इन इंजनों की सबसे अधिक जरूरत है, तब यह डिलीवरी अभी तक टल रही है।
ऐसे उदाहरण आपको हर क्षेत्र में दिख जाएंगे।
और इसी संदर्भ में आज वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह जी ने भी एक ऐतिहासिक अपील की:
"अगर आज कुछ इंडस्ट्रीज़ वर्ल्ड-क्लास कार, इलेक्ट्रॉनिक और उपकरण बना सकती हैं, तो वही मिलकर वर्ल्ड-क्लास डिफेंस इक्विपमेंट क्यों नहीं बना सकतीं? भले ही मुनाफा थोड़ा कम हो...
@AdhaVinod@hlnagar@RajCMO@anandmahindra उत्पादन निगम को सरकार की नीतियों की वज़ह से घाटे में लाकर, केंद्रीय इकाइयों के साथ इनका अनुबंध किया जा रहा है जिससे इन इकाइयों का संचालन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अधीन होगा जिससे आमजन को महंगी बिजली मिलेगी।#save_rvun
उत्पादन निगम को सरकार की नीतियों की वज़ह से घाटे में लाकर, केंद्रीय इकाइयों के साथ इनका अनुबंध किया जा रहा है जिससे इन इकाइयों का संचालन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अधीन होगा जिससे आमजन को महंगी बिजली मिलेगी।#save_rvun
@AdhaVinod@hlnagar@RajCMO@anandmahindra उत्पादन निगम को सरकार की नीतियों की वज़ह से घाटे में लाकर, केंद्रीय इकाइयों के साथ इनका अनुबंध किया जा रहा है जिससे इन इकाइयों का संचालन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अधीन होगा जिससे आमजन को महंगी बिजली मिलेगी।#save_rvun
*( उत्पादन निगम को सरकार की नीतियों की वज़ह से घाटे में लाकर, केंद्रीय इकाइयों के साथ इनका अनुबंध किया जा रहा है जिससे इन इकाइयों का संचालन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अधीन होगा जिससे आमजन को महंगी बिजली मिलेगी।#save_rvun )*
@BChoulda@ashokgehlot51@GovindDotasra@RajCMO *( उत्पादन निगम को सरकार की नीतियों की वज़ह से घाटे में लाकर, केंद्रीय इकाइयों के साथ इनका अनुबंध किया जा रहा है जिससे इन इकाइयों का संचालन केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अधीन होगा जिससे आमजन को महंगी बिजली मिलेगी।#save_rvun )*
@JaikyYadav16 रातों रात अपने उद्योगपति मित्रों के फायदे के लिए कानून बदल देने वाली भाजपा सरकार को मिड-डे मील कर्मचारियों का दर्द क्या दिखाई नहीं दे रहा है? उनके साथ ऐसा अन्याय क्यों कर रही है भाजपा सरकार?
जिस तरह आज महल और संपत्ति के लिए दो भाई लड़ रहे हैं, इसी तरह यह लोग मध्यकाल में संपत्ति के लिए आपस में लड़ते थे.
लड़ाई खुले मैदान में होती थी. अरविंद सिंह के 50,000 सैनिक और विश्वराज सिंह 40,000 सैनिक अपने अपने हुकुम के लिए रक्तपात करते.
और इसी बीच 20,000 की सेना लेकर खानाबदोश कबीले का एक सरदार सिंध का दरिया पार कर दिल्ली के तख्त को जीतकर, भारत का बादशाह बन जाता.
और यह लोग मनसबदार और मंत्री बनते.
अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कैंडल मार्च में हमारे परिवार और बच्चे भी शामिल हुए। हम निगम को JV के माध्यम से बेचने का विरोध करते हैं।
आभार @gopalbhojak g अच्छे मिडिया कवरेज के लिए। #save_rvun@RajCMO@BhajanlalBjp@hlnagar