तुम संसद में बाबासाहेब का अपमान करोगे,
देश के युवा मिलकर संसद को ही घेर लेंगे।।
अगर छात्रों का हक छीना गया, युवाओं का भविष्य रौंदा गया, महिलाओं की आजादी पर पाबंदी लगाई गई और दलितों पर जुल्म किया गया तो बाबासाहेब के अनुयायी चुप नहीं बैठेंगे।
Ambedkar, Ambedkar, Ambedkar... 🔥
सांसद चंद्र शेखर, अभिजीत, दोनों Schedule Caste में पैदा हुए पर बौद्ध हैं, सोनम भी बौद्ध है, इस देश में कोई भी सामाजिक राजनीतिक परिवर्तन को लीड मात्र SC ही कर सकता, क्यों कि यह तपा हुआ समाज है..✍️
-देश के छात्रो��� व युवाओं केे आन्दोलन के चलते आज केन्द्रीय शिक्षा मन्त्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान द्वारा इस्तीफा दिये जाने का फैसला उचित, जो यह पहले ही ले लिया जाता तो बेहतर होता। साथ ही, हमारी पार्टी केन्द्र सरकार से यह भी अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जन्तर-मन्तर पर शान्तिमय ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्ते लड़के व लड़कियों पर बरबर्तापूर्वक लाठी, डन्डों आदि से चोट पहुँचायी है जिससे ये बड़ी संख्��ा में गम्भीर रूप से घायल हुए, उनपर सख़्त कार्रवाई की जानी चाहिये।
-और ख़ास तौर से जिन पुरूष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी की और बल प्रयाग किया, उनको चिन्हित करके, उनके खिलाफ अनुशासनिक एवं क्रिमनल केस चला कर सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिये, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घिनौनी हरकत करने की कोई हिम्मत ना कर सके।
- इसके साथ-साथ, सरकार को आन्दोलन कर रहे छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ जो भी FIR या complaint दायर की गई है, उन सभी को वापस ले लिया जाये, जिससे इनको आगे चलकर थानों व कोर्ट कचहरी के चक्कर ना काटने पड़े और इस वजह से उनका भविष्य भी ��़राब ना हो, जिससे फिर देश में सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
- साथ ही मेरा सभी आन्दोलनकारियों से यह कहना है कि वो इस मामले में किसी भी पार्टी को उनके इस संघर्ष का राजनीतिकरण ना करने दें तथा अपने भविष्य को भी ख़राब ना होने दें।
एक ज़रूरी सूचना!
मशहूर अदाकारा पिंकी जल्द ही जंतर-मंतर पर अपना डांस प्रोग्राम करने वाली हैं। उनके स्वागत और सेवा-सत्कार के लिए छात्र कब से तैयार बैठे हैं। छात्रों की मांग है कि वे 26 जुलाई तक इंतज़ार नहीं कर सकते, आज ही आएं।
आपको क्या लगता है, पिंकी भाभी छात्रों के बीच जाएंगी?
सुनो सलमान..
वो कॉकरोच हैं, हिरण नहीं कि कुचलने से डर जाएंगे, मर जाएंगे। कल युवाओं के पक्ष में लिखकर सुल्तान बन रहे थे, आज ऊपर से एक ऑ���्डर आया कि पों-पों करके रोने लगे।
अपने काम से मतलब रखिए। वैसे भी आजकल ��पकी सारी फ़िल्में फ्लॉप जा रही हैं। यह ट्वीट भी एकदम फ्लॉप है।
गृहमंत्री अमित शाह ने भरी संसद में "आम्बेडकर, आम्बेडकर" कहकर बाबासाहेब आम्बेडकर का मजाक उड़ाया था।
आज बाबासाहेब के दीवाने "जय भीम" का नारा लगाते हुए उसी संसद भवन को घेरने निकल पड़े हैं। पूरी दिल्ली बंद है।
सुनो सरकार, देश बाबासाहेब के नाम से ही चलेगा। समझे?
दिल्ली पुलिस बेहिसाब लाठीचार्ज कर रही है।
बच्चों पर लाठी ऐसे चलाई जा रही है जैसे हम जानवर हो। पुलिस की लाठी से मेरा फ़ोन तक टूट गया है।
दिल्ली पुलिस को लाठीचार्ज का हुख़्म जिनके यहाँ से आया है वो याद रखें
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख���्त-नशीं था,
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था।
संविधान सबसे ऊपर है इसलिए...
लोकतंत्र में आवाजें दबाने की नहीं, आवाजें सुनने की जरूरत होती है!
न्याय और जवाबदेही देना ही होता है !
#DharmendraPradhanRegien#CJPPROTEST#NEET
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हाल��त के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्का��� सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे ब�� पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान ल���ाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
जिंदगी धर्म पर नहीं, रोजी रोटी पर निर्भर है....
कुछ चंद लोगों की रोजी रो��ी धर्म के दानपेटियों पर निर्भर है !
यही चंद लोग भारतीयों को मूर्ख बना रहे हैं!