भाजपा बार-बार OBC हितैषी बनने का ढोंग करती रही है, लेकिन भाजपा कभी भी OBC हित नहीं चाहती।
मंडल आयोग ने साफ कहा था कि देश में OBC आबादी लगभग 52% है, तो उसे उसी अनुपात में हिस्सेदारी और आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन 52% तो छोड़िए, आज तक 27% आरक्षण भी पूरी ईमानदारी से लागू नहीं किया गया। इसका उदाहरण मध्य प्रदेश है। और बंगाल में तो OBC समाज को 27% के बजाय सिर्फ 17% आरक्षण ही मिल रहा था, लेकिन OBC विरोधी भाजपा ने उसे 17% से घटाकर सिर्फ 7% कर दिया।
भाजपा अच्छी तरह जानती है कि जिस दिन जाति जनगणना का पूरा सच सामने आएगा, उस दिन OBC समाज अपने अधिकारों की लड़ाई और तेज करेगा। तब सवाल उठेगा कि आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी क्यों नहीं? इसलिए असली मुद्दों - शिक्षा, नौकरी, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय - से ध्यान हटाकर OBC बनाम OBC की लड़ाई खड़ी की जा रही है।
मंडल आयोग ने जिन जातियों को सामाजिक न्याय की साझा लड़ाई में जोड़ा था, आज उन्हें आपस में लड़ाने की कोशिश हो रही है। क्योंकि जब पिछड़े एकजुट होते हैं, तब सत्ता को जवाब देना पड़ता है। और जब पिछड़े आपस में लड़ते हैं, तब सबसे ज़्यादा फायदा उन्हीं ताकतों को होता है जो आरक्षण और सामाजिक न्याय दोनों को कमजोर करना चाहती हैं।
#OBC_विरोधी_BJP
जापान E20 लागू करने में 16 साल ले रहा है, थाईलैंड में 18 साल बाद भी विकल्प मौजूद है और ब्राज़ील ने 50 साल लगाए। लेकिन भारत में बिना तैयारी के महज़ 3 साल में देश के 90,000 पेट्रोल पंपों पर ज़बरदस्ती E20 थोपकर करोड़ों गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
- @ArvindKejriwal जी, राष्ट्रीय संयोजक, आम आदमी पार्टी
#StopForcingEthanolFuel
शरीर रस्सी से बंधा है, हाथ जोड़ रहे हैं , भीख मांग रहे हैं, मजलूम बने हुए हैं.. जानते हैं यह लोग कौन हैं यह वह 32 दरिंदे हैं जिन्होंने 5 दिन तक एक 13 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप किया
न नैतिकता बची, न जवाबदेही—सत्ता का अहंकार ही अब पहचान है।
जनता सवाल पूछे तो जवाब नहीं, बस मुद्दे से भागने और सच दबाने की कोशिश।
BJP वालों! देश सब देख रहा है और जनता एक-एक बात का हिसाब रख रही है।
जब कंपनियों के ऑफिशियल ओनर मैनुअल कह रहे हैं कि 10% से ज़्यादा इथेनॉल गाड़ियों को तबाह कर देगा, तो सरकारी मंच पर खड़े होकर 20% इथेनॉल को सुरक्षित बताना ग्राहकों के साथ सरासर धोखा है।
— @ArvindKejriwal जी, राष्ट्रीय संयोजक, आम आदमी पार्टी
#StopForcingEthanolFuel
तो राम मंदिर चंदा घोटाला मामले में जांच का मकसद बड़े दोषियों को बचाना था। उन्हें “कानूनी” प्रोटेक्शन देना था।
इतने बड़े घोटाले में सारी जिम्मेदारी छोटे कर्मचारी पर थोपकर जिस तरह बड़े लोगों को इससे निकाला गया वह अपने आप में नया घोटाला और अधर्म बन गया।
अब ट्रस्ट के बाक़ी मेम्बर जिस तरह ऊँची आवाज में थेथर की तरह अपने कारनामे को डिफेंड कर रहे हैं उससे साफ़ लग रहा है उन्हें इसका संकेत मिल गया है कि उन्हें सेफ़ पैसेज मिल गया है।
मतलब धर्म की आड़ में आप कुछ कर आराम से निकल सकते हैं। ये धर्म के अनुयायी नहीं बल्कि इसके फर्जी ठेकेदार की तरह बिहेव कर रहे हैं। और उसपर दूसरों को प्रमाणपत्र देते रहते हैं।