रुपया गिरता - गिरता चाहे कुएं झेरे में पड़ जाए
पेट्रोल - डीजल चाहे 5000 हजार रुपया लीटर हो जाए
गैस सिलेंडर चाहे 18000 हजार का हो जाए
बुलेट ट्रेन क्या चाहे तो पहले वाली भी सारी बंद हो जाए
15 - 15 लाख चाहे हम जनता को घर से मोदी जी को देने पड़ जाए
लेकिन साथियों एक बात याद रखना 800 साल बाद भारत देश को ऐसा राजा मिला है थोड़ी बहुत महंगाई , थोड़ी बहुत पेट्रोल डीजल की किल्लत , थोड़ा सा गिरते रुपए के चक्कर में इस अवतारी पुरुष को खो मत देना वरना पछताओगे
मोदी जी ने बिना आराम , बिना ब्रेक लिए पिछले 13 सालों से दिन रात लगातार 18 - 18 घंटे इस देश के लिए काम किया यह बात आप याद रखना
पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर, रुपया, महंगाई घटती बढ़ती ही रहेगी इसमें मोदी जी क्या कर सकते है मोदी जी आज ग्लोबल लीडर विश्व गुरु है ये भी तो देखो तुम लोग, छोड़ो सब बाते और मोदी जी का साथ दो
हर हर मोदी 😍
घर घर मोदी 😍
जय जय मोदी 😍
तय तय मोदी 😍
है है मोदी
ही ही मोदी खी खी मोदी खे खे मोदी
अंध भक्तों लगे रहो तब तक मोदी को खोना नहीं है जब तक पुनः गुलामी की श्रेणी में न पहुंचना हम तुम्हारे साथ है।
8,931 दिनों की अथक साधना‚ समर्पण और राष्ट्रसेवा ने भारत की तस्वीर ही बदल दी है। यह केवल समय का प्रवाह नहीं‚ बल्कि संकल्प से सिद्धि तक की एक प्रेरणादायक यात्रा है।
जहां नेतृत्व ने स्वयं को नहीं‚ बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सपनों को सर्वोपरि रखा‚ जब राष्ट्र का प्रहरी विश्राम नहीं करता‚ तब विकास की धारा अविरल बहती है।
सड़कों का विस्तार‚ हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि‚ मेट्रो नेटवर्क का तीव्र प्रसार‚ ये सभी केवल आंकड़े नहीं‚ बल्कि आत्मनिर्भर‚ सशक्त और गतिशील भारत के सजीव प्रमाण हैं।
आज का भारत केवल बदल नहीं रहा‚ बल्कि विश्व पटल पर अपनी नई पहचान गढ़ रहा है‚ एक ऐसा भारत जो आधुनिकता‚ प्रगति और जनकल्याण के पथ पर दृढ़ता से अग्रसर है।
यह परिवर्तन बताता है कि जब नेतृत्व समर्पित हो‚ तो असंभव भी संभव बन जाता है‚ और राष्ट्र नई ऊँचाइयों को स्पर्श करता है।
जब भी आर्थिक स्थिति पर जवाब दिया जाता है, तो हर आँकड़े के साथ विस्तृत जानकारी दी जाती है।
फिर भी यदि प्रधानमंत्री की साख पर प्रश्न उठाया जाता है, तो मैं याद दिलाना चाहती हूँ कि हाल ही में हुए एक वैश्विक सर्वेक्षण में दुनिया भर के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों की लोकप्रियता के बीच भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री @narendramodi जी सबसे ऊपर रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर प्रश्न उठाने वालों को यह समझना चाहिए कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। हमारे फिस्कल पैरामीटर (राजकोषीय मानदंड) सुदृढ़ हैं और हमने पिछले पाँच वर्षों में फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को संतुलित रखने का काम किया है, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है।
हमारे फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व (विदेशी मुद्रा भंडार) भी मजबूत और स्थिर हैं। ऐसे में प्रश्न पूछने वालों को कम से कम जवाब सुनने की क्षमता भी रखनी चाहिए।
आज आवश्यकता है कि हम अपने देशवासियों की मेहनत का सम्मान करें और उनके साथ खड़े रहें, न कि बार-बार भारत की छवि को कमजोर करने का प्रयास करें।
- लोकसभा में श्रीमती @nsitharaman
88% देश मोदी के साथ! क्या आप भी इस लहर का हिस्सा हैं?
देश के नये सर्वे में सामने आया है कि 88% जनता आज भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ी है ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक मजबूत विश्वास की कहानी है जो करोड़ों दिलों में बसती है विकास, राष्ट्रवाद और मजबूत नेतृत्व की इस छवि ने लोगों के दिलों में गहरी जगह बनाई है अब सवाल ये है कि इस 88% में क्या आप भी शामिल हैं या आपकी सोच कुछ अलग है?
आज के समय में राजनीति सिर्फ नेताओं की नहीं, बल्कि जनता की आवाज बन चुकी है हर व्यक्ति का अपना नजरिया है—कुछ लोग इस नेतृत्व को देश की तरक्की का रास्ता मानते है तो कुछ लोग बदलाव की उम्मीद रखते हैं लेकिन इतना तय है कि देश की राजनीति अब पहले से ज्यादा जागरूक और सक्रिय हो चुकी है
सोशल मीडिया पर भी इस सर्वे ने हलचल मचा दी है। कोई खुलकर समर्थन कर रहा है तो कोई सवाल उठा रहा है यही तो लोकतंत्र की असली ताकत है—हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार आपकी एक राय भी इस देश की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
कई लोगों के लिए ये 88% विश्वास और गर्व का प्रतीक है जबकि कुछ के लिए ये सोचने का विषय है कि आखिर ऐसा क्या है जो इतनी बड़ी संख्या एक तरफ खड़ी है क्या ये विकास की नीतियां हैं, क्या ये मजबूत फैसले हैं, या फिर देशभक्ति की भावना? आपकी सोच क्या कहती है?
अब बारी आपकी है इस 88% में क्या आप भी शामिल हैं या आपकी राय इससे अलग है? खुलकर बताइए, क्योंकि आपकी आवाज ही असली ताकत है कमेंट में YES या NO लिखकर अपनी राय जरूर दें और इस चर्चा को आगे बढ़ाएं
@deep1972_ अब बोलो इनोवेशन को एक्सेप्ट किया तो भी प्रॉब्लम है। कुछ दिन पहले संसद मैं महामानव को ये कहता सुना की, वैश्विक संकट चल रहा हमे सावधानी और किफायती तौर से आगे बढ़ना है और बाद मैं खुद गुजरात के दौरे पर gsrtc की १००० से ज्यादा बस दौड़के डीजल की ऐसी की तैसी कर रहे है।