📍सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
ऐतिहासिक महंगाई के खिलाफ भारत जोड़ो!
युवा कांग्रेस महंगाई के इस दौर में देशवासियों के साथ खड़ी है। हमारी यात्रा जारी रहेगी जब तक आम जन को महंगाई से राहत नहीं दी जाती।
यक्ष
ये मनोज शुक्ला पर बवाल कैसा?
युधिष्ठिर
अरे इसने रामकथा के पात्रों से सड़कछाप संवाद बुलवाए है फ़िल्म में
यक्ष
ये वही है न जो चन्द्रशेखर आज़ाद को तिवारी बताता घूमता था
युधिष्ठिर-हम्म
यक्ष
इस पूत ने तो पालने में ही पांव दिखा दिए थे, जिसे नही दिखा गलती उसकी है
युधिष्ठिर-आंय
एक गैरज़िम्मेदार मोदी सरकार CoWIN Data Leak पर चाहे जितनी भी लीपापोती करे,
3 बातें साफ़ हैं -
1⃣ जनता का निजी data सुरक्षित नहीं है।
सभी भारतीय जानते हैं कि 2017 में किस तरह मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में Right to Privacy को Fundamental Right घोषित करने का कड़ा विरोध किया था।
2⃣ देश में Cyber Attacks और Data leak लगातार बढ़ें हैं।
फिर चाहे वो 2018 का "विश्व का सबसे बड़ा" AADHAAR data breach हो या फिर AIIMS पर नवंबर 2022 का Cyber Attack हो।
ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार ने सितम्बर 2018 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि AADHAAR data 13 फुट ऊंची और पांच फुट मोटी दीवारें में सुरक्षित है !
3⃣ डिजिटल इंडिया का ढ़ोल पीटने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में Cyber Attacks कई गुना बढ़ें हैं, जो निम्नलिखित हैं -
2018 - 2,08,456 (2.08 लाख़)
2019 - 3,94,499 (3.94 लाख़)
2020 -11,58,208 (11.58 लाख़)
2021 -14,02,809 (14.02 लाख़)
2022 -13,91,457 (13.91 लाख़)
[स्त्रोत - राज्य सभा | अतारांकित प्रश्न - 1043 | 10.02.2023]
कुल मिलाकर स्तिथि स्पष्ट है -
न मोदी सरकार को 140 करोड़ लोगों के निजता के मौलिक अधिकार की परवाह है, और ना ही राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई मतलब !
Data Privacy Law बनाई नहीं है और Cyber Attacks पर कोई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति लागू नहीं की है !
सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ सबसे ताकतवर योद्धा :- @laluprasadrjd
समाजवादियों की पीढ़ी में अकेले लालू जी थे जो सड़कों पर उतर कर राजनीति करने के महत्व को समझते थे और बार-बार उसका इस्तेमाल करते थे।उन्हें पता था कि पिछड़ी दलित जनता को यह मनोवैज्ञानिक एहसास कैसे कराया जाए कि न केवल👇
हम तो माईं का भी दुध भी पीये हैं और भैंस का भी... दम है तो बिहार में रैली निकाल कर दिखाओ...!
साल 1990...मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने और पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले ने पूरे देश का सियासी पारा बढ़ा दिया था। इन्दिरा और राजीव के दौर से फाइलों में गुमनाम पड़ी मंडल आयोग की सिफ़ारिश को लागू करते ही भारत दो हिस्सों में बंट गया..! रिपोर्ट लागू करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह रातों रात गरीब-पिछड़ों के मसीहा घोषित कर दिए गए..!
इस राजनैतिक उथल पुथल के कारण मजबूत पिछड़ी जातियां जनता दल के इर्द गिर्द जमा होने लगी थी। ये वो दौर था जब एक अधिसूचना ने सभी राजनैतिक दलों के वोट बैंक को तोड़ कर रख दिया था, देश दो हिस्सों में बंट गया था।
फिलहाल मंडल आयोग पर विस्तार से नहीं लिख रहा हूं, लेकिन मोटे तौर पर इसके लागू होते ही भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व गोते खाने लगा था। आरएसएस ने भाजपा के हिन्दू वोट बैंक में सेंधमारी देखते ही देश में साम्प्रदायिक माहौल तैयार करना शुरू कर दीया। हिन्दू धर्म के ज्यादातर पिछड़ी जातियों के वोटों पर निर्भर भाजपा, किसी भी शर्त पर उसे खोना नहीं चाहती थी।
हिंदू वोट में विभाजन देखते ही भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने श्री राम जन्मभूमि का राग छेड़ दिया और सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा के शुरुआत की घोषणा कर दी। ये आजाद भारत में हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण की सबसे पहली साज़िश थी।
तत्कालीन हिंदुत्व के फायर ब्रांड और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा की कमान संभाल ली थी। उनका मुख्य उद्देश्य बिहार, यूपी, एमपी और राजस्थान के हिंदुओ को एक करना था क्योंकि ये वही राज्य थे जहां मंडल आयोग की सिफ़ारिश से लाभान्वित होने वाली जातियां सबसे ज्यादा थी।
चुकी भाजपा वीपी सिंह सरकार को अपना बाहरी समर्थन दे रही थी, केंद्र सरकार भी इस पर लाचार थी, चौधरी देवीलाल इस्तीफ़ा दे चूके थे, अडवाणी की रथयात्रा ने जनता दल की सरकार को खतरे में डाल दिया था..! देखते ही देखते पूरे देश में राम मंदिर की बयार तेज़ हो गई, मंडल आयोग का मुकाबला अब रथयात्रा से किया जाने लगा था।
जब आडवानी को रोकने की हिम्मत किसी में नहीं दिख रही थी, तब लालू प्रसाद यादव आगे आए, दिल्ली में दोनों की मुलाकात हुई। लालू जी ने रथयात्रा रोकने की गुज़ारिश की थी।
लालू जी ने कहा था, "हम आपके सामने हाथ जोड़ रहे हैं। आप दंगा फैलाने वाली रथयात्रा रोक दीजिए। दंगा हो जाएगा, क़ानून व्यवस्था का संकट हो जाएगा। अगर नहीं मानियेगा तो कम से कम बिहार में नहीं घुसने देंगे।"
आडवाणी ने अहंकार रूपी तेवर दिखाते हुए रौब में जवाब दिया था, "रथयात्रा होगी। देखता हूँ, कौन माई का दूध पिया है जो रथयात्रा को रोकेगा।" लालू जी ने भी जोरदार जवाब दिया था, "हम माई का भी दूध पिये हैं और भैंस का भी दूध पिये हैं। बिहार में आईए तब पता चलेगा!
इधर बिहार 89 के भागलपुर दंगों से ठीक तरह से उबरा भी नहीं था कि आडवानी की रथयात्रा भीतरी सीमाओं में प्रवेश कर चुकी थी। लालूजी को पूर्वानुमान था कि आडवानी के रथयात्रा से साम्प्रदायिक भाईचारे को खतरा होगा..! हुआ भी कुछ एसा ही..! रथयात्रा जिस शहर से होकर गुजरी वहां आपसी रंजिशों ने दंगे का रुप ले लिया, श्री राम के नाम पर निकाले गए रथ के पहिए खून से नहा चूके थे।
रथयात्रा को बिहार से होकर अयोध्या जाना था। लालू जी के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती थी, उन्होंने तुरंत राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की मीटिंग बुलाई और रथयात्रा रोकने के लिए अडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया।
योजना बनी, अडवाणी की गिरफ्तारी के लिए सासाराम में हेलीकॉप्टर भेजे गए..! लेकिन गोपनीयता भंग हो गई, अडवाणी को इसकी सूचना मिल गई, उन्होंने ने अपना रूट बदल लिया था, फिर धनबाद में रोकने की योजना बनी किंतु अधिकारियों ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर मना कर दिया।
लेकिन लालू जी का "प्लान बी" तैयार था। उन्होंने डीआईजी रैंक के आईएएस अधिकारी रामेश्वर ओरांव और आर.के सिंह को एक अणे मार्ग बुलाया, गृह सचिव को बुलाकर एक विशेष आदेश तैयार किया गया और अडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया। अबकी बार योजना गोपनीय रही।
10 अक्तूबर को सुबह होने से पहले अडवाणी जी समस्तीपुर से टंगवा लिए गए थे. आदेश की गोपनीयता इतनी तगड़ी थी कि, समस्तीपुर डीएम और एसपी भी इस फैसले से अंजान थे। लाल कृष्ण आडवाणी गिरफ़्तार हो चूके थे, सोमनाथ से निकली उनकी रथयात्रा दम तोड़ चुकी थी, उनके रायसीना हिल तक पहुंचने की लड़ाई को लालू जी नेशनाबुद कर चुके थे।
यह घटना बाद भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने कहा था, "हम उसे गाली दे सकते हैं, कलंकित कर सकते हैं, लेकिन दूसरा लालू पैदा नहीं कर सकते।"
#सामाजिक_न्याय_के_महानायक_लालू
लेकिन उनके विचार मर जाएंगे। उनके विचार जिंदा रहें यह अधिक जरूरी है।
सावरकर ने दोनों बातें की। पहले कैद से भागने की असफल कोशिश की और फिर कैद से बाहर आने के लिए बार-बार माफी मांगी।
हमारे महान नेता, आदर्शवादी, सामाजिक न्याय के अग्रदूत, उदार, साहसी, विद्वान, करुणामय, संवेदनशील, उदात्त, साहसपूर्ण, संघर्षी, प्रबुद्ध , देश-विदेश में बिहार का नाम रोशन करने वाले, मजबूत शख्सियत एवं दृढ़ व्यक्तित्व के धनी, ग़रीब, शोषित, वंचित वर्गों के मसीहा, सामाजिक न्याय के प्रणेता आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी को अवतरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।
#सामाजिक_न्याय_के_महानायक_लालू
@yadavtejashwi@laluprasadrjd
Remembering the great freedom fighter #BirsaMunda on his death anniversary. He believed in the Abua Disom (self-rule) which is the only way to protect the rights of the tribes. He had led the movement that forced the colonial Raj to move out of the indigenous land of the tribals.
शर्म आनी चाहिए प्रशाशन को अपने इस घटिया काम पे चढ़ूनी जी को इतनी बुरी तरह घसीटा गया उनकी पगड़ी भी उतार दी और डंडों से बुरी तरह पीटा गया और विरोधी बोलते है कि चढ़ूनी राजनीति करता है भाई इस आदमी का बलिदान देखो तुम इसके पैरों की धूल बराबर भी नहीं हो!😥😥😥😥
A morphed version of a caricature published by the LA Times in 2012 is being shared to target Rahul Gandhi. The original image was used in an article criticising the Republican Party in the US. #AltNewsFactCheck | @Pooja_Chaudhuri
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दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, प्रगतिशील चिंतक व प्रखर वक्ता डॉ. लक्षुमन यादव जी के पैतृक गांव बैठौली, जनपद आजमगढ़ में आयोजित वैवाहिक कार्यक्रम (प्रीतिभोज) में सम्मिलित होकर उन्हें शुभकामनायें व बधाई दी साथ में मा. चंद्रशेखर यादव जी, शिक्षा मंत्री बिहार प्रदेश भी उपस्थित रहे।
आज #मंडल_यात्रा जिला फिरोजाबाद के गांव मांडई, अरांव, नगला चैन, राहतपुर, नगला धर्म, नगला बीसा, नगला लेखराज में पहुंची और #जातिगत_जनगणना , मंडल कमीशन, संख्या अनुपात में भागीदारी को लेकर समाज के बीच मंडल आर्मी चीफ @OfficeofVidrohi जी जागरूकता अभियान चलाया। समाज के लोगों ने जातिवार जनगणना की मांग का समर्थन किया और आंदोलन में शामिल होने का वादा किया।
@SanjuTiwarri फ़ेक न्यूज़। सीता नाम की महिला ने अपने प्रेमी लखाराम के साथ शादी की। दोनों एक ही रैबारी समुदाय से हैं. जब दो साल की थी तो उसके मां-बाप ने उसकी शादी गुलाब देवासी से करवा दी थी. लेकिन उसे गुलाब पसंद नहीं था. सीता की दोस्ती लखाराम से हुई. दोनों ने शादी करली.
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