#भर्तृहरि 🚩
पुराने जमाने में एक राजा हुए थे, भर्तृहरि। वे कवि भी थे। उनकी पत्नी अत्यंत रूपवती थीं। भर्तृहरि ने स्त्री के सौंदर्य और उसके बिना जीवन के सूनेपन पर 100 श्लोक लिखे, जो श्रृंगार शतक के नाम से प्रसिद्ध हैं।
उन्हीं के राज्य में एक ब्राह्मण भी रहता था, जिसने अपनी नि:स्वार्थ पूजा से देवता को प्रसन्न कर लिया। देवता ने उसे वरदान के रूप में अमर फल देते हुए कहा कि इससे आप लंबे समय तक युवा रहोगे। ब्राह्मण ने सोचा कि भिक्षा मांग कर जीवन बिताता हूं, मुझे लंबे समय तक जी कर क्या करना है। हमारा राजा बहुत अच्छा है, उसे यह फल दे देता हूं। वह लंबे समय तक जीएगा तो प्रजा भी लंबे समय तक सुखी रहेगी। वह राजा के पास गया और उनसे सारी बात बताते हुए वह फल उन्हें दे आया।
राजा फल पाकर प्रसन्न हो गया।
फिर मन ही मन सोचा कि यह फल मैं अपनी पत्नी को दे देता हूं। वह ज्यादा दिन युवा रहेगी तो ज्यादा दिनों तक उसके साहचर्य का लाभ मिलेगा। अगर मैंने फल खाया तो वह मुझ से पहले ही मर जाएगी और उसके वियोग में मैं भी नहीं जी सकूंगा। उसने वह फल अपनी पत्नी को दे दिया। लेकिन, रानी तो नगर के कोतवाल से प्यार करती थी। वह अत्यंत सुदर्शन, हृष्ट-पुष्ट और बातूनी था। अमर फल उसको देते हुए रानी ने कहा कि इसे खा लेना, इससे तुम लंबी आयु प्राप्त करोगे और मुझे सदा प्रसन्न करते रहोगे।
फल ले कर कोतवाल जब महल से बाहर निकला तो सोचने लगा कि रानी के साथ तो मुझे धन-दौलत के लिए झूठ-मूठ ही प्रेम का नाटक करना पड़ता है। और यह फल खाकर मैं भी क्या करूंगा। इसे मैं अपनी परम मित्र राजनर्तकी को दे देता हूं। वह कभी मेरी कोई बात नहीं टालती। मैं उससे प्रेम भी करता हूं। और यदि वह सदा युवा रहेगी, तो दूसरों को भी सुख दे पाएगी। उसने वह फल अपनी उस नर्तकी मित्र को दे दिया।
राज नर्तकी ने कोई उत्तर नहीं दिया और चुपचाप वह अमर फल अपने पास रख लिया।कोतवाल के जाने के बाद उसने सोचा कि कौन मूर्ख यह पाप भरा जीवन लंबा जीना चाहेगा। हमारे देश का राजा बहुत अच्छा है, उसे ही लंबा जीवन जीना चाहिए। यह सोच कर उसने किसी प्रकार से राजा से मिलने का समय लिया और एकांत में उस फल की महिमा सुना कर उसे राजा को दे दिया। और कहा कि महाराज, आप इसे खा लेना।
राजा फल को देखते ही पहचान गया और भौंचक रह गया। पूछताछ करने से जब पूरी बात मालूम हुई, तो उसे वैराग्य हो गया और वह राज-पाट छोड़ कर जंगल में चला गया। वहीं उसने वैराग्य पर 100 श्लोक लिखे जो कि वैराग्य शतक के नाम से प्रसिद्ध हैं। यही इस संसार की वास्तविकता है। एक व्यक्ति किसी अन्य से प्रेम करता है और चाहता है कि वह व्यक्ति भी उसे उतना ही प्रेम करे। परंतु विडंबना यह कि वह दूसरा व्यक्ति किसी अन्य से प्रेम करता है। इसलिए अपने ध्येय से लगन लगाओ। वह ईश्वर भी हो सकता है, या आपकी अपनी विचारधारा भी।
🌺🙏 सुप्रभात! 🙏🌺
🚩 ॐ हनुमते नमः 🚩
संकट कटे, मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। ❤️
बजरंगबली की कृपा से आपका दिन साहस, शक्ति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हो।
शुभ शनिवार! 🌞🙏
#SanatanDharma#जयश्रीराम 🚩🙏
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का संयुक्त स्मरण जीवन में धर्म, अर्थ, सुख और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। जहां भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं, वहीं माता लक्ष्मी उनकी दिव्य शक्ति के रूप में भक्तों को धन, वैभव और मंगल प्रदान करती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां विष्णु का निवास होता है, वहां लक्ष्मी स्वयं विराजमान रहती हैं।
श्री विष्णु-लक्ष्मी स्तोत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्ररूपे सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा तथा माता लक्ष्मी का स्थायी आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से गुरुवार, शुक्रवार तथा एकादशी के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त विष्णु-लक्ष्मी का संयुक्त पूजन करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌺🔥
🌹🥀ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
पत्रकारको विषयगत दक्षता बढाउन विषयगत-तालिम,प्रशिक्षण उपयोगी र जरुरी पनि हुन्छ। तर, हिजोआज पत्रकारलाई ज्ञान र शीपको सट्टा पुरस्कार, फेलोसिप आदि 'अफर' गरिन्छ जसले तिनको कलम भुत्ते पार्न मात्र सघाउँछन्।
आभासी संसार के मित्रो!
स्वर दबाया जा सकता है, पर विचार नहीं।
कुछ समय के लिए चुप भले करा दिया गया,
पर संकल्प आज भी वही है।
यात्रा वहीं से शुरू कर रहा हूँ जहाँ हम बिछड़े थे।
क्या आप अभी भी साथ हैं ?
री-ट्वीट करके इस आरंभ को सामर्थ्य दें।
#BackOnTwitter#NewBeginning
🌞 हर सुबह सूर्य देव को जल अर्पित कर दिन की शुरुआत करती हूँ।
सूर्य देव की कृपा से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। 🙏🏻
॥ ॐ सूर्याय नमः ॥
जय सूर्य नारायण भगवान 🙏🏻
🦚 जिसे श्रीकृष्ण पर विश्वास है, उसकी हर चिंता का अंत है। 🙏💙
✨ वक्त भी उसका क्या बिगाड़े, जिसका सारथी स्वयं कान्हा हो। 🚩
🌸 कृष्ण की बंसी की धुन में, हर प्रश्न का उत्तर छिपा है। 🎶
💫 जो लिखा है कान्हा ने, वही होगा; जो होगा, वही श्रेष्ठ होगा। 🙏
🕉️ जब जीवन की डोर श्रीकृष्ण के हाथ में हो, तो डर कैसा। 💙
☀️🙏 सूर्यदेव वंदना 🙏☀️
जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महद्युतिम्।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम्॥
जो स्वयं प्रकाश बनकर जगत को आलोकित करते हैं, वे सूर्यदेव हमारे जीवन से अज्ञान, निराशा और आलस्य का अंधकार दूर करें। 🌅
#SuryaDev#जय_सूर्यदेव ☀️🚩
बल्ब, पंखा, इण्डक्सन, हिटर, कुलर AC ठाउँ अनुुसार अनिवार्य भै सकेको छ। ग्यास खपत कम गर्न, पेट्रोल डिजेल कम गर्न पनि न्यूनतम गृहस्थ प्रयोजनको लागि मात्र प्रयोग हुने विद्युत् मा ५०युनिट माथि भ्याट उपयुक्त भएन है मान्यवर
सुप्रभात 🙏
जय शनिदेव 🙏
जय शनि देव महाराज, कर्म फल के दाता।
नील वर्ण सूर्य पुत्र, न्याय के सच्चे राता॥
भक्तों को सुख देते, दोषी को दंड धाता।
सर्वे भवन्तु सुखिनः, शनि कृपा से पाता॥