पहला परिच्छेद में 'चित्रलेखा' की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है।
आलिंगन के पाश में वासना हँस रही थी। चित्रलेखा ने मदिरा का एक घूट पिया-इसके बाद वह मुस्कराई। एक क्षण के लिए उसके अधरों ने बीजगुप्त के अधरों से मौन भाषा में कुछ बात कही, फिर धीरे से उसने उत्तर दिया-“मस्ती !”
#चित्रलेखा
धार्मिक उन्माद
न थमने वाले धार्मिक उन्माद दो तरफा होते होंगे
एक तरफा होते तो...
दूसरी तरफ वालों को दया आ जाती
और उन्माद थम जाता।
#स्वरचित#धार्मिकउन्माद
वे औरतें
जो शताब्दियों से गा नहीं पाईं
अपनी उदासी के गीत
मैं उनकी ख़ामोशी
छू नहीं पाता
~नीलोत्पल ( 1975 ) रतलाम मध्यप्रदेश वाले।
#नीलोत्पल#कविता#पँक्ति#हिंदीनामा