हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में
ज़रूरी बात कहनी हो कोई वादा निभाना हो
~ मुनीर नियाज़ी
“I always manage to delay, whatever I must do—
A crucial word I had to say, a pledge I should see through.”
- Munir Niazi
आज इस आवाज में दर्द है...
राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
हनुमानगढ़ के एसपी सर,
बीकानेर के आईजी सर,
राजस्थान के डीजीपी सर,
राजस्थान के गृहमंत्री महोदय,
यह केवल मारपीट नहीं, एक नाबालिग पर सामूहिक हिंसा और आज़ादी छीनने का मामला है। इसे ग़ैरइरादत कहने से रेाकिए अपने थाने वालों को।
यह प्रकरण साधारण झगड़े या क्षणिक आवेश की मारपीट भर नहीं लगता। उपलब्ध तथ्य अगर सही हैं कि लड़के को बस स्टैंड पर उतरने नहीं दिया गया, आगे ले जाया गया, फिर परिचितों और गांववालों को बुलाकर लाठियों से घेरकर पीटा गया, सिर और शरीर के संवेदनशील अंगों पर वार हुए, बचाव के बावजूद हमला रुका नहीं, और बाद में पैसे उसकी जेब में ठूंसकर कोई झूठा आरोप गढ़ने की कोशिश की गई तो यह मामला कानून की दृष्टि में बहुत गंभीर है। यह उस लोकगीत की करुण पंक्ति जैसा है जिसमें मां बेटे को मेले भेजती है और व्यवस्था उसे घायल देह बनाकर लौटा देती है।
हत्या के प्रयास की धारा
इस मामले में प्रथम दृष्टया BNS धारा 109 हत्या का प्रयास लगाई जानी चाहिए। यह पुरानी IPC धारा 307 के समकक्ष है। BNS 109 में वही स्थिति आती है, जहां आरोपी का कृत्य ऐसे इरादे या ज्ञान के साथ किया गया हो कि यदि मृत्यु हो जाती तो अपराध हत्या की श्रेणी में आता। लेकिन इस केस को ग़ैरइरादतन कहना ऐसा लगता है कि पुलिस नृशंस अपराधियों को बहुत मासूम मानकर चल रही है। पहले तो उसने यह तक कहा था कि "इस मामले में दोनों पक्षों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर" यानी यह एक क्रॉस केस जैसा प्रकरण था। हद है!
सोलह साल के एक छात्र के सिर, गर्दन, छाती या अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर लाठियों से सामूहिक और बार-बार हमला, पीड़ित का नाबालिग होना, हमले की अवधि, हमलावरों की संख्या, वीडियो रिकॉर्डिंगऔर मेडिकल रिपोर्ट आदि अदालत को यह देखने में मदद करेंगे कि हमला केवल चोट पहुंचाने के लिए था या जान लेने जैसी स्थिति पैदा करने के इरादे के साथ किया गया था। इसलिए केवल BNS धारा 110 गैर-इरादतन मानव वध के प्रयास पर मामला सीमित रखना कमजोर और अपर्याप्त है। धारा 110 को वैकल्पिक रूप में रखा जा सकता है, पर मुख्य धारा 109 होनी चाहिए। BNS में धारा 110 “attempt to commit culpable homicide” से संबंधित है।
गलत तरीके से रोकना और कैद करना
बस कंडक्टर ने लड़के को उसके वैध स्टॉप पर उतरने नहीं दिया और उसे आगे ले जाकर ऐसी स्थिति में पहुंचाया, जहां वह स्वतंत्र रूप से नहीं जा सका तो BNS धारा 127 wrongful confinement लागू हो सकती है। BNS 127 में किसी व्यक्ति को ऐसी सीमाओं के भीतर रोकना आता है, जिनसे वह बाहर न जा सके।
यदि तथ्य यह सिद्ध करते हैं कि बस से उतरने से रोकना केवल परिवहन-नियम का मामला नहीं था, आगे होने वाली हिंसा की तैयारी का हिस्सा था तो कंडक्टर की भूमिका अत्यंत गंभीर हो जाती है। वह केवल सवारी से उलझा कर्मचारी नहीं रह जाता; वह पूरी घटना की कड़ी बन जाता है।
चोट, गंभीर चोट और खतरनाक हथियार
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार यदि हड्डी टूटना, सिर की गंभीर चोट, स्थायी नुकसान, जीवन को खतरा या BNS में वर्णित grievous hurt की स्थिति बनती है तो BNS धारा 117 यानी voluntarily causing grievous hurt लागू होनी चाहिए। BNS में धारा 117 गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है।
इसके साथ BNS धारा 118 यानी dangerous weapons or means से hurt या grievous hurt भी विचारणीय है। लाठी अपने-आप हर परिस्थिति में घातक हथियार नहीं कहलाती, लेकिन जब उसे सिर, गर्दन, छाती जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर सामूहिक और नृशंस ढंग से चलाया जाए तो लाठी भी ऐसा संघातक हथियार हो जाती है, जैसे कि वह तलवार या बंदूक की जगह ले ले यानी हिंसक साधन बन सकती है, जिससे मृत्यु संभाव्य हो। BNS 118 में dangerous weapons or means से चोट या गंभीर चोट की स्थिति आती है। और यहाँ लाठी भी एक डेंजरस वैपन है।
साधारण चोटों के लिए BNS 115(2) भी सहायक या वैकल्पिक रूप में जोड़ी जा सकती है, लेकिन मुख्य गंभीरता 109, 117 और 118 से ही व्यक्त होगी।
सामूहिक अपराध, अवैध सभा और दंगा
पांच या अधिक लोग एक साझा उद्देश्य से इकट्ठा हुए, लाठियां लेकर आए और पीड़ित पर हमला किया तो BNS धारा 189 यानी unlawful assembly, BNS धारा 190 यानी common object के आधार पर हर सदस्य की जिम्मेदारी और BNS धारा 191 यानी rioting लागू होंगी।
यदि हमलावर घातक हथियार या ऐसे साधन से लैस थे, जो आक्रामक हथियार के रूप में मृत्यु कारित कर सकता है तो BNS 191(3) के तहत armed rioting की गंभीरता बढ़ जाती है। और यह बात थी, क्योंकि उनके पास लोहे की रॉड थीं।
यदि हमलावर पांच से कम हों या अवैध सभा सिद्ध करने में कठिनाई हो, तब भी BNS धारा 3(5) यानी साझा इरादे में कई व्यक्तियों द्वारा किया गया अपराध तो लगाई ही जा सकती है। यह पुरानी IPC धारा 34 के समकक्ष संयुक्त दायित्व का सिद्धांत है। लेकिन यहाँ तो वे पर्याप्त तादाद में थे और वे विडियो में साफ़ दिखाई देते हैं। पुलिस ने जिन लोगों को बिठा रखा है और जिनकी तलाश की बात हो रही है, वे सब मिलकर सात-आठ लोग प्रतीत होते हैं।
साजिश और झूठा सबूत गढ़ना
यदि कंडक्टर ने किसी परिचित को बुलाया, गांववालों को इकट्ठा किया गया और मारपीट से पहले या बाद में ऐसी योजना दिखती है जिससे पीड़ित को लूट का अपराधी सिद्ध करने का प्रयास किया गया तो BNS धारा 61 criminal conspiracy भी निश्चित रूप से विचारणीय है।
पैसे जेब में ठूंसने की कोशिश अत्यंत गंभीर बात है। यह BNS 316 का मामला नहीं दिखता। सही कानूनी दिशा BNS धारा 228 fabricating false evidence और यदि बाद में झूठी शिकायत या झूठा आरोप लगाया गया हो तो BNS धारा 248 false charge of offence made with intent to injure हो सकती है। BNS 228 झूठा सबूत गढ़ने से और BNS 248 किसी को झूठे अपराध में फंसाने से संबंधित है। और यह इस बात से ही प्रमाणित है कि पुलिस को उन्होंने क्रॉस केस टाइप का मामला बताया था। यह लिखित में भी होगा ही।
कुल मिलाकर, इस मामले में BNS 109, 127, 117, 118, 115(2), 61, 189, 190, 191(3), 3(5), 228 और परिस्थितियों के अनुसार 248 को जांच में गंभीरता से जोड़ा जाना चाहिए। अंतिम निर्णय मेडिकल बोर्ड, वीडियो, गवाहों, कॉल डिटेल, बस के रिकॉर्ड और घटनाक्रम की कड़ी पर निर्भर करेगा, लेकिन प्रथम दृष्टया यह एक संगठित, क्रूर और योजनाबद्ध हिंसा का मामला है।
पीड़ित पक्ष इसमें कोई परिवार नहीं, पूरा समाज है। मैंने शुरू में इस विडियो को देखकर कोई टिप्पणी नहीं की थी, लेकिन मुझे ही लोगों ने इस प्रकरण भेजकर न जाने कितना बुरा-भला कहा। इसमें बहुत से लोग तो पुलिस के भी रहे हैं। बहुत से सजग लोग हैं और गंभीर हैं। अगर मुझ जैसे एक साधारण रिपोर्टर से लोगों की यह अपेक्षा है तो सोचिए कि डीजीपी सर, आईजी सर और गृहमंत्री महोदय से कितनी अपेक्षा रही होगी। मैं आईजी साहब को जानता हूँ, वे इस तरह के मामलों में बहुत ही संवेदनशील रहते हैं। डीजीपी के हृदय में भी संवेदनशीलता रहती ही है। तो हम सबका फ़र्ज़ है कि जमानत के समय अदालत के सामने यह रखें कि यह कोई सड़कछाप झगड़ा नहीं, एक बच्चे की देह पर लिखी गई सामूहिक बर्बरता है। बस कंडक्टर यदि सरकारी या रोडवेज कर्मचारी है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, निलंबन और सेवा-नियमों के तहत जांच भी आवश्यक है। न्याय तभी पूरा होगा जब कानून केवल काग़ज़ पर नहीं, घायल बच्चे की कराह में भी सुना जाए।
@PoliceRajasthan@IgpBikaner@HmghPolice@BhajanlalBjp@Bhajanlalofc@Rajendra4BJP@DrSatishPoonia@madanrrathore@PSKhachariyawas
गंगा में इन मछलियों का दिखना coincidence नहीं, comeback है।
रोहू, कतला, मृगल, कालबासु, महाशीर, हिलसा, ये छह नाम सिर्फ मछलियों के नहीं हैं। ये गंगा के स्वास्थ्य के indicators हैं। जब ये होती हैं तो डॉल्फिन का खाना होता है, मछुआरे की थाली होती है और नदी का ecosystem ज़िंदा होता है।
203 लाख से ज़्यादा इन्हें गंगा में छोड़ा जा चुका है। यह सिर्फ fish stocking नहीं है, यह एक पूरी food chain को reboot करने की कोशिश है।
नमामि गंगे के तहत ICAR-CIFRI के साथ मिलकर गंगा बेसिन की biodiversity को मछली, डॉल्फिन और कछुए के रूप में वापस लाया जा रहा है क्योंकि नदी तभी तक जीवित है जब तक उसमें ज़िंदगी है।
नाम है राजस्थान यूनिवर्सिटी….!!
राजस्थान भाषा का कोई डिपार्टमेंट ही उपलब्ध नहीं है…
फ़्रेंच,जर्मन, स्पैनिश भाषा के कोर्स उपलब्ध हैं…
लेकिन राजस्थानी भाषा का कोर्स करना हो…
तो महोदय आप यूगांडा जाइए, शायद वहाँ राजस्थानी भाषा का कोर्स हो जाए…
जयपुर में तो कोनी होवे सा…!!
Champions ⭐️⭐️⭐️ Phenomenal win for Team India in Ahmedabad. Absolutely no match for the explosive cricket played by us throughout the tournament. Brilliant character shown by the boys to keep fighting in tough situations and become world champions once again. Congratulations to all the players and all the members of the management for achieving this feat. Jai Hind 🇮🇳❤️
Congratulations to the U-19 Indian team for lifting the World Cup once again. Our domination in the age group cricket and beyond continues. Well done to the whole squad and the support staff. 👏🇮🇳