एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखने के शौकीन शादीशुदा लोगों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली डेटिंग ऐप एशली मेडिसन (Ahshley Madison) ने मई 2026 का डाटा शेयर किया है।
इस डेटा के अनुसार, भारत के जिस शहर में सबसे अधिक एकस्ट्रा मैरिटल रिलेशन रखना चाहते हैं, उसका नाम ही कांचीपुरम। तमिलनाडु का कांचीपुरम वही शहर है जो अपने ऐतिहासिक मंदिरों और विश्व प्रसिद्ध 'कांचीवरम' रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस शहर को भारत के सबसे पवित्र और प्राचीन शहरों में से एक माना जाता है।
पिछले साल भी कांचीपुरम पहले नंबर पर था। अब इसे एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर कैपिटल bh कहा जाने लगा है।
वहीं, दूसरे नंबर पर कोयंबटूर, तीसरे पर पर तिरुवल्लूर और चौथे स्थान पर चेन्नई है। ये सभी शहर तमिलनाडु में स्थित हैं और बेहद प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक शहर हैं।
इस लिस्ट में पांचवें नंबर गुरुग्राम, छठे नंबर पर नोएडा है, सातवें नंबर पर बेगलुरु, आठवें नंबर पर देहरादून, नौवें नंबर पर पुणे और दसवें नंबर पर दिल्ली है।
ये आंकड़े बताते हैं कि कथित आधुनिकता की सबसे बड़ी मार और वैवाहिक संस्था में सबसे ज्यादा अविश्वासी महानगर नहीं बल्कि धार्मिक एवं प्राचीन नगरी बन रहे हैं। देहरादून जैसे शहर तक में इसकी लपट पहुंच गई है।
समय बदल रहा है, और उसके साथ मनुष्य का अवचेतन भी।
एक समय था जब गाँव में किसी के घर शादी होती थी, तो पूरा गाँव परिवार बनकर खड़ा हो जाता था। दुख किसी एक का नहीं होता था, और खुशी भी सबकी होती थी। रिश्ते किसी सुविधा का साधन नहीं, जीवन का सहारा होते थे।
लेकिन धीरे-धीरे हमने सुविधा को संबंधों से बड़ा बना दिया। आज साथ चलने वाला, बात सुनने वाला, शादी में बैठने वाला, खरीदारी करने वाला, यहाँ तक कि हँसने-बोलने वाला साथी भी किराए पर उपलब्ध है।
यह केवल एक व्यापार नहीं है, यह हमारे समय का मनोवैज्ञानिक संकेत है।
हमारे आसपास लोग पहले से अधिक हैं, लेकिन अपनापन पहले से कम है। संपर्क (Contact) बढ़ा है, पर संबंध (Connection) घटा है। हम शुकून को बाज़ार में खोज रहे हैं, जबकि वह कभी रिश्तों की गर्माहट में मिला करता था।
शायद यह सही है या गलत, यह समय तय करेगा। लेकिन इतना निश्चित है कि यदि संवेदनाएँ, आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव इसी तरह कम होते रहे, तो आने वाली पीढ़ियाँ सुविधा से भरपूर होंगी, पर भीतर से कहीं अधिक अकेली।
मशीनें हमारा काम कर सकती हैं,
लेकिन हमारे रिश्तों की जगह नहीं ले सकतीं।
और जिस दिन रिश्ते भी पूरी तरह सेवाओं में बदल गए, उस दिन मनुष्य तकनीकी रूप से सबसे विकसित, लेकिन भावनात्मक रूप से सबसे गरीब प्राणी होगा।
डॉ. धीर सिंह धाभाई
#रिश्ते #समय #service
@Tribalmonk_@SohanSenwar Ji bhai vijay ki already fan following thi super star hone ka fayda mila h dekho ab panch sal kaise deal kr pata hai Aam janta se aur Rahi baat Beniwal ji Kirodi ji y wo neta hai jinhone real me sangarsh kiya hai but uska fal nhi mila dekho aage kya hota h bhai ji
@Tribalmonk_@SohanSenwar Bhai kaise nikal skta h ap jaise Bhut se log kam krwane hnumn ji k pas jate h bas vote apko BJP congress me Dena hai Baki Nirdliya apne dum p 2 bar jeeta hua h aur aage b mla to aaram se ban jayega
“बात भले ही कड़वी लगे, लेकिन बेहद काम की है। सत्य हमेशा कड़वा ही होता है। अगर तुम्हें सच से दिक्कत होती है, तो यह समस्या सच की नहीं, बल्कि उसे स्वीकार करने की है।”
नागौर से लोकप्रिय सांसद श्री हनुमान बेनीवाल जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
भगवान से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
@hanumanbeniwal
कितना अच्छा हो यदि हम सब इस धरती पर अपने गिले-शिकवे, ईर्ष्या और द्वेष को भूलकर एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहें। आज की दुनिया में सबसे ज़्यादा कमी समझदारी और अपनापन की है। हम छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ लेते हैं, जबकि वही रिश्ते हमारे जीवन की सबसे बड़ी ताक़त होते हैं।
यदि इंसान इंसान का दर्द समझे, एक-दूसरे की मदद करे और मन में बैर न रखे, तो समाज अपने आप सुंदर बन जाएगा। प्रेम से बोला गया एक शब्द किसी टूटे दिल को जोड़ सकता है। सहयोग का एक छोटा सा कदम किसी की ज़िंदगी बदल सकता है। जब हम मिल-जुलकर चलते हैं, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है।
धरती केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि एक बड़ा परिवार है। अगर इस परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करें, तो न युद्ध होंगे, न नफ़रत फैलेगी। हर ओर शांति, विश्वास और खुशहाली होगी। बच्चे निडर होकर सपने देखेंगे और बुज़ुर्ग सुकून से जीवन जिएँगे।
वास्तव में, सच्ची प्रगति ऊँची इमारतों या बड़ी मशीनों से नहीं, बल्कि प्रेम, सहयोग और मानवीय मूल्यों से होती है। अगर हम अपने अहंकार को थोड़ा सा पीछे रख दें और दिल को आगे कर दें, तो यह दुनिया स्वर्ग से कम नहीं होगी।