एक तो मैं " choose to bowl" से इतना दुःखी हूं कि बता नहीं सकता.
कहां गए वो दिन जब कहते थे कि पिच अगर अच्छी है तो टॉस जीतो, बैटिंग करो. पिच अगर गेंदबाजों के लिए मददगार है तो टॉस जीतो, थोड़ा सोचो और बैटिंग करो. पिच अगर गेंदबाजों के लिए ही बनी है तो टॉस जीतो थोड़ा और सोचो और बैटिंग
अब जबकि एक एआरटीओ के घर पर पड़े छापे की खबर कमोबेश उत्तर प्रदेश के सभी अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर है, मैं भी अपना सवाल दोहराना चाहता हूं... जब एक बार किसी व्यक्ति का डीएल बन गया तो 20 वर्ष बाद उसके नवीनीकरण की क्या आवश्यकता है??