मन एक सवाल पूछ रहा है. भारतीय रेल का पूरा ध्यान वंदे भारत ट्रेन पर है. गरीब बिहार को भी खूब मिल रहा है. पर, क्या इसमें गरीब बिहारी भी चल सकते हैं ? 9-10 हजार कमाने को परदेस जाने वाले भी ? या फिर वे वंदे भारत को प्लेटफार्म पर टुकुर-टुकुर बस निहार ही सकते हैं ? कुछ इन गरीबों के लिए भी चला दो सरकार ! बिहार के नेताजी लोग भी अब गरीबों के लिए कुछ नहीं मांगते. हम-आप तो स्पीड का चयन कर ही लेंगे.
#ज्ञानेश्वर_की_डायरी
@nehafolksinger लगता हैं तुम मानसिक रूप से दिलालिया हो चुकी है, लोगों के पास विवेक है की क्या उसके लिए अच्छा है क्या बुरा। तुम उलुल जलूल गाती हो तो लोग तुम्हे कुछ कहने जाता है।
रेलवे को गतिशील और सुरक्षित बनाए रखने वाले ट्रैकमैन भाइयों के लिए सिस्टम में ‘न कोई प्रमोशन है, न ही इमोशन’।
भारतीय रेल कर्मचारियों में ट्रैकमैन सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं, उनसे मिल कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को समझने का मौका मिला।
ट्रैकमैन 35 किलो औजार उठाकर रोज 8-10 कि.मी. पैदल चलते हैं। उनकी नौकरी ट्रैक पर ही शुरू होती है और वो ट्रैक से ही रिटायर हो जाते हैं । जिस विभागीय परीक्षा को पास कर दूसरे कर्मचारी बेहतर पदों पर जाते हैं, उस परीक्षा में ट्रैकमैन को बैठने भी नहीं दिया जाता।
ट्रैकमैन भाइयों ने बताया कि हर साल करीब 550 ट्रैकमैन काम के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा देते हैं, क्योंकि उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
विपरीत परिस्थितियों में बिना बुनियादी सुविधाओं के दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाले ट्रैकमैन भाइयों की इन प्रमुख मांगों को हर हाल में सुना जाना चाहिए।
1. काम के दौरान हर ट्रैकमैन को ‘रक्षक यंत्र’ मिले, जिससे ट्रैक पर ट्रेन आने की सूचना उन्हें समय से मिल सके।
2. ट्रैकमैन को विभागीय परीक्षा (LDCE)के जरिए तरक्की का अवसर मिले।
ट्रैकमैन की तपस्या से ही करोड़ों देशवासियों की सुरक्षित रेल यात्रा पूरी होती है, हमें उनकी सुरक्षा और तरक्की दोनो सुनिश्चित करनी ही होगी।
@nehafolksinger कितना नीच और संकीर्ण मानसिकता की हो तुम, समझ नही आ रहा की तुम्हे मोदी से नफरत है या देश से दुश्मनी है जो भारत का हाल बांग्लादेश जैसा चाहती हो।
शर्म करो।
मैं आज उन 12 लाख छात्रों के हित में खड़ा हूं, जिन्होंने D.El.Ed. का कोर्स ख़त्म कर लिया, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली।
साल 2017 में केंद्र सरकार एक नोटिफिकेशन निकालती है, जिसमें कहा गया कि देश में छात्र D.El.Ed. का डिप्लोमा कोर्स लें। ऐसे में करीब 12 लाख लोगों ने कोर्स किया।
लेकिन भारत सरकार फिर से एक और आदेश निकालती है कि यदि छात्र 2 साल का कोर्स 18 महीने में भी ख़त्म होता है, तो वे पढ़ाने के योग्य होंगे।
लेकिन जब साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम निकालते हुए कहा कि हम 2 साल और 18 महीने हो एक समान नहीं मान सकते हैं। जिन्होंने 18 महीने में कोर्स ख़त्म किए, वे योग्य नहीं माने जाएंगे।
ऐसे में देश के ये 12 लाख छात्र कहां जाएं? क्योंकि इन्होंने तो सरकार के निर्देश पर ये सब किया।
मेरी मांग है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय एक गजट नोटिफिकेशन निकालेगा तो इन 12 लाख छात्रों को न्याय मिल जाएगा।
: लोक सभा में उप नेता @GauravGogoiAsm जी
देश के लाखों NIOS डीएलएड प्रशिक्षित शिक्षकों व हमारे परिवार की ओर से, संसद में हमारे प्रति हुए अन्याय के लिए आवाज उठाने हेतु माननीय श्री @GauravGogoiAsm व श्री @RahulGandhi जी का बहुत-बहुत आभार व धन्यवाद। आशा करते हैं आपका यही आशीर्वाद हम लाखों परिवार के साथ निरन्तर बना रहेगा।
@samrat4bjp केके पाठक की ईमानदारी दिख रही है।।। गरीब जनता और शिक्षकों को स्कूल का समय और छुट्टियों में कटौती पर उलझा कर इतना बड़ा घोटाला किया जा रहा है।। नीतीश कुमार को सब कुछ जानकारी होते हुए भी कुछ भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह सब घोटाला वह खुद कर रहे हैं।।
हाल में बिहार के दो मामलों से सक्रिय रूप से जुड़ा हूं। एक मनीष कश्यप और दूसरा दरभंगा के श्यामा माई मंदिर पर बलि प्रदान करने पर रोक।
सुखद संयोग देखिए आज से ही श्यामा माई मंदिर में बलि प्रदान होना फिर से प्रारंभ हुआ है। अब मनीष कश्यप की भी जेल से जल्द रिहाई की खबर आ रही है।
#ManishKashyap #ShyamaMaiMandir