ये ज़िन्दगी वीरानों में रहने दो
ये वफ़ा की बातें बस ख्यालों में रहने दो
अगर हक़ीक़त आज़माने बैठे तो ये दिल टूट जाते हैं
ये इश्क़ , दोस्ती , मोहब्बत बस किताबों में रहने दो
����🖤
मेरे सपनों में
मेरे आँसुओं में
मेरे गुस्से में
मेरी हंसी-मजाक में
यह मेरी हमदर्द बन
फासले कटाती
यह मेरे अंग-संग
हर समय हर कदम
चलती है मेरी कविता।
(डॉ. चंचल भसीन)
@bhasin_dr