घपला-घोटाला करना मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है क्योंकि मैं नेता हूँ… जनता के लिए बनी सब्सिडी मैं इसलिए खाऊँगा क्योंकि चुनावों में कई वोटरों ने मुझसे पैसे खाए, माँस खाया, दारू 🍺 पी थी.. अब वो पैसा मैं जनता की गाढ़ी कमाई यानि टैक्स के पैसों से ही तो वसूल करूँगा…
@mpbhagirathbjp
इनका कसूर सिर्फ इनता है कि ये गरीब आदिवासी परिवार है इन परिवारो के सबसे बडी गर्व की बात है कि महान देश भारत की महामहिम राष्ट्रपति जी भी आदिवासी है
बाड़मेर
पत्रकारिता अभी बाक़ी है! इंडियन एक्सप्रेस में आज एक और रिपोर्ट छपी है ..कि मोदी सरकार के मंत्री ने अपने ही मंत्रालय से खुद को करीब एक करोड़ की सब्सिडी दी है। @harikishan1 की रिपोर्ट।
आज राजस्थान का असली किसान नकली बीज, नकली खाद और नकली पेस्टीसाइड के हाथों बर्बाद हो रहा है। यही वह क्षण है जब राजस्थान में नकली कृषि-इनपुट्स के खि़लाफ़ खु़द कृषि मंत्री किरोड़ृीलाल मीणा के चलाए जा रहे अभियान को किसी राजनीतिक विवाद की भेंट चढ़ा देना किसानों के साथ दूसरा अन्याय होगा।
राजस्थान ही नहीं, पूरे उत्तर भारत में पिछले वर्षों में बीटी कॉटन और दूसरी फसलों को लेकर किसानों की शिकायतें बढ़ी हैं। कहीं बीज अंकुरित नहीं होता, कहीं अंकुरण के बाद पौधा कमजोर निकलता है, कहीं अमरीकन सुंडी या दूसरी कीट-समस्याएं फसल को खा जाती हैं, और जहां किसान कीट से बच भी जाता है, वहां नकली खाद या घटिया पेस्टीसाइड उसके खेत को उजाड़ देता है।
किसान के लिए यह केवल उत्पादन-हानि नहीं है; यह कर्ज, मेहनत, जमीन और भविष्य—सबका सामूहिक विनाश है। यह राजस्थान और देश के कृषि उत्पादन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। यह इतनी ख़तरनाक है कि किरोड़ीलाल मीणा के अभियान शुरू करने से पहले पूरे प्रदेश में किसी छोटी सी कीटनाशक या खाद या बीज की दुकान वाले का भी बाल बांका करने वाला कोई नहीं था। यह एक बहुत खतरनाक नेटवर्क बन चुका है।
इसलिए कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के खिलाफ यदि कोई राजनीतिक या कानूनी आरोप है तो उसकी जांच अलग रास्ते से होनी चाहिए। लेकिन नकली खाद, नकली बीज और नकली पेस्टीसाइड के खिलाफ अभियान को रोक देना न तो प्रशासनिक रूप से उचित है, न कानूनी रूप से, न कृषि-नीति के लिहाज से।
कानून का सिद्धांत साफ है—व्यक्ति की जांच और जनहित की कार्रवाई अलग-अलग ट्रैक पर चलनी चाहिए। यदि किसी मंत्री, अधिकारी या दलाल की भूमिका संदिग्ध है तो उसे जांचिए, पर जिस रैकेट ने किसान की जड़ों में जहर डाला है, उसे खुला छोड़ना अपराधियों को राहत देना होगा।
यह मामला सिर्फ दुकानदारों की मिलावट तक सीमित नहीं है। नकली कृषि-इनपुट्स का धंधा निर्माता, पैकर, थोक-विक्रेता, लाइसेंसिंग तंत्र, निरीक्षण प्रणाली और स्थानीय संरक्षण के बिना नहीं चलता। यदि किसी फैक्ट्री में मिट्टी मिलाकर खाद बनाई जाती है, expired या substandard pesticide नए पैक में बेचा जाता है, या नकली ब्रांडिंग से बीज बाजार में उतारा जाता है, तो यह सामान्य धोखाधड़ी नहीं, कृषि-अर्थव्यवस्था पर संगठित हमला है।
किरोड़ी लाल मीणा ने जिलों में जाकर जिन इकाइयों, गोदामों और दुकानों पर कार्रवाई की, उसने कम से कम यह स्थापित किया कि समस्या काल्पनिक नहीं है। यह रैकेट मौजूद है और गहरा है। अब यदि विवाद के बाद यह अभियान ठंडा पड़ता है तो संदेश साफ जाएगा कि नकली खाद-बीज माफिया सरकार, राजनीति और नौकरशाही के भीतर अपना बचाव-तंत्र रखता है।
प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी यहां गंभीर है। उसे केवल किरोड़ी लाल मीणा को घेरने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे सरकार से पूछना चाहिए कि कितने नमूने लिए गए, कितने फेल हुए, कितनी FIR अदालत तक पहुंची, कितने लाइसेंस सचमुच रद्द हुए, कितने किसानों को मुआवजा मिला और किन कंपनियों के नाम सार्वजनिक किए गए। किसानों की लड़ाई मंत्री-विरोध से बड़ी है। यह खेत, अन्न, कर्ज और न्याय की लड़ाई है।
राजस्थान को इस समय राजनीतिक शोर नहीं, कृषि-न्याय चाहिए।
@DrKirodilalBJP
99 का फेर
मोहन यादव के बाद अब द इंडियन एक्सप्रेस ने कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी पर खोजबीन की है। मंत्रिमण्डल फेरबदल की कड़ी में यह भी एक संयोग है, खबर ही सही!!
हालांकि बहुत बड़े आसामी भागीरथ चौधरी के लिए 99 लाख क्या मायने रखते हैं, यह अजमेर क्षेत्र के लोग बेहतर बता सकते हैं। वैसे हम यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि सिर्फ 99 लाख के चक्कर में कोई 84 लाख यौनियों में लगातार किए गए पुण्य कर्मों से मिला मंत्री पद दांव पर लगाने की सोच सकता है। भागीरथ जी हाथ हवा में हिलाएं तो भी 99 लाख रुपए झड़कर जमीन पर गिर सकते हैं। लेकिन 99 का फेर ऐसा ही होता है मित्रो। यह कुछ भी करवा सकता है।
छत के फर्श होने की कहीं न कहीं से और किसी न किसी कारण से शुरुआत होती ही होगी।
हो गई होगी
कौन ही जाने
#WATCH | Jaipur | On State Congress President Govind Singh Dotasra's statement, Rajasthan Minister Madan Dilawar says, "RSS has only one task - that is character building and evoking a sense of patriotism. The accusation levelled at CM Bhajanlal Sharma is wrong. The CM works using his judgment and under the direction of the party leadership. They (Congress) are upset that development work is happening in the state."
अंततः
अंततः
और अंततः कांग्रेस के उस खास नेता के सोशल मीडिया हैंडलर समर्थक समूह ने भी, जो लगातार डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पर प्रहार कर रहा था, अनजाने में ही सही, यह स्वीकार कर लिया है कि राजस्थान की राजनीति में आज सबसे प्रभावशाली चेहरा कौन है। वे मानें या न मानें, लेकिन उनकी बेचैनी ने यह प्रमाणित कर दिया है कि डॉ. किरोड़ीलाल मीणा केवल एक मंत्री या विधायक नहीं, अपने आप में एक स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति हैं।
राजनीति में किसी नेता की असली ताकत उसके पद से नहीं, उसके प्रभाव से मापी जाती है। मुख्यमंत्री के पास सत्ता का संवैधानिक आसन हो सकता है, लेकिन जन-स्मृति, आंदोलनशीलता, सड़क की पकड़ और प्रशासन को झकझोर देने की क्षमता हर नेता के पास नहीं होती। डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की यही विशेषता है कि वे सत्ता में हों या सत्ता से बाहर, वे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बने रहते हैं।
कांग्रेस के जिस खेमे ने उन्हें लगातार निशाना बनाया, उसने वस्तुतः उनकी राजनीतिक ऊंचाई को ही रेखांकित किया। किसी कमजोर नेता पर इतनी ऊर्जा खर्च नहीं की जाती। हमला वहीं होता है, जहां असर होता है। विरोध वहीं तीखा होता है, जहां सामने वाला जन-समर्थन, जातीय-सामाजिक आधार और संघर्ष की पूंजी रखता हो।
इस पूरे प्रसंग का निष्कर्ष साफ है कि राजस्थान की राजनीति में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को नज़रअंदाज़ करना अब किसी भी दल के लिए संभव नहीं है। उनके विरोधी भी अब उनके प्रभाव की भाषा बोलने लगे हैं। राजनीति में इससे बड़ी स्वीकारोक्ति और क्या होगी?
केसरी सिंह के जातिवादी बयानों की वजह से…
RPSC अध्यक्ष बनने का विरोध करने वाले लोग…
डोटासरा के शिक्षा मंत्री कार्यकाल को कैसे defend कर सकते हैं…??
घोर कलियुग है ये तो…😂😂
फिर तुम मे और केसरी सिंह में क्या फ़र्क़ रह गया…??
लक्ष्मणगढ की धरती पर पेपर आऊट कराने वाले सरगना भी रहते है जो यहा के जनप्रतिनिधि भी थे जिन्होने कई प्रकार के पेपर आऊट करा-करा कर अपने घर वालो को क्या-क्या बना दिया कितना धन लूट लिया
- मदन दिलावर (शिक्षामंत्री जी द्वारा लक्ष्मणगढ मे संबोधित करते हुए)
डोटासरा जी के सोशल मीडिया धुरंधरों का तर्क सुनिए..
किरोड़ी लाल मीना के साथ वाले अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए
इसलिए किरोड़ी लाल मीना भी दोषी हैं…
लेकिन डोटासरा जी के शिक्षा मंत्री रहते हर दूसरा पेपर लीक हुआ…
लेकिन डोटासरा जी आज भी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र हैं…😂😂
ये आरोप किसी राजनैतिक व्यक्ति के नही बल्कि वो शिक्षक परिवार लगा रहा था जिनके मुखिया तत्कालीन शिक्षामंत्री गोविंदसिह डोटासरा जी हुआ करते थे मगर उससे भी अचरज की बात ये है कि ऐसे गंभीर आरोप सार्वजनिक तौर पर लगने के बावजूद जादूगर मुखिया जी के मुंह से सिर्फ 2 ही शब्द बाहर निकल पाते है "कमाल है"
“ये वैसे ही है जैसे एक वेश्या पतिव्रता पर आरोप लगाती है। भ्रष्टाचार के, वे आकंठ उसमें डूबे हैं और वो दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
मैं फिर कह रहा हूं, कि डोटासरा जी बेईमान और बेशर्म हैं और डॉक्टर किरोड़ी लाल जी मीणा सोने की तरह खरे हैं, उनके ऊपर कोई भी आरोप टिकता नहीं है।”
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती विज्ञान और संस्कृत विषय हेतु संभाग आवंटन हेतु प्राथमिकता भरने की अवधि को 16 दिसंबर तक बढ़ाया गया है।
निदेशक महोदय इस प्रकार की कार्यप्रणाली रही तो इन विषयो की नियुक्ति दिसम्बर माह में होना मुश्किल होगा।
जल्द से जल्द संभाग आवंटन और काउंसलिंग की जाए।