ಅನೇಕ ಜಾತಿ ಧರ್ಮಗಳು, ಭಾಷೆ, ಸಂಸ್ಕೃತಿಗಳಿರುವ ಸಮಾಜದಲ್ಲಿ ನಾವು ವೈವಿಧ್ಯತೆಯಲ್ಲಿ ಏಕತೆಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಬೇಕು.
ಭೋಜಲಿಂಗೇಶ್ವರರು ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಸತ್ಯದ ದಾರಿಯನ್ನು ತೋರಿ ಸಮಾನತೆ, ಭಾವೈಕ್ಯತೆಯನ್ನು ಸಾರಿದವರು. ನಾವೆಲ್ಲರೂ ಮನುಷ್ಯರಾಗಿದ್ದು, ಮಾನವರಾಗಿ ಬದುಕಬೇಕಿದೆ. ಯಾವ ಧರ್ಮವೂ ದ್ವೇಷವನ್ನು ಬೋಧಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಪರಸ್ಪರ ದ್ವೇಷವನ್ನು ಬಿತ್ತುವವರು ನಮ್ಮ ಮಧ್ಯೆ ಇದ್ದಾರೆ. ಸಮಾಜವನ್ನು ಧರ್ಮ, ಜಾತಿಯ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಒಡೆದು, ಒಬ್ಬರನ್ನು ಮತ್ತೊಬ್ಬರ ವಿರುದ್ಧ ಎತ್ತಿ ಕಟ್ಟುವ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವ ಪಟ್ಟಭದ್ರ ಹಿತಾಸಕ್ತಿಗಳು ಇದ್ದು ಅವರ ಆಮಿಷಕ್ಕೆ ಬಲಿಯಾಗಬಾರದು. ಅದನ್ನೇ ಭೋಜಲಿಂಗೇಶ್ವರ ಸ್ವಾಮೀಜಿಗಳು ಹೇಳಿದ್ದಾರೆ.
"ಮುಂದೆ ಗುರಿ, ಹಿಂದೆ ಗುರು" ಇರಬೇಕು ಎಂದು ಸಾಧು ಸಂತರು, ಸಮಾಜ ಸುಧಾರಕರು, ಬಸವಣ್ಣನವರು ಹೇಳಿದ್ದು. ಸಮಾಜದಲ್ಲಿರುವ ಎಲ್ಲರೂ ಕಾಯಕವನ್ನು ಮಾಡಬೇಕು, ಉತ್ಪಾದನಾ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆಯಲ್ಲಿ ಭಾಗವಹಿಸಿ,ಉತ್ಪನ್ನವನ್ನು ಸಮಾನವಾಗಿ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಅಸಮಾನತೆ ಹೋಗಲಾಡಿಸಲು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರಿಗೂ ಸಾಮಾಜಿಕ, ಆರ್ಥಿಕ ಶಕ್ತಿ ದೊರಕಬೇಕು.
ಅನೇಕ ಶಕ್ತಿಗಳು ಸಮಾಜವನ್ನು ವಿಭಜಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದು ಅದಕ್ಕೆ ನಾವು ಬಲಿಯಾಗಬಾರದು. ಭೋಜಲಿಂಗೇಶ್ವರ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಮಹತ್ವವನ್ನು ಜನರಿಗೆ ತಿಳಿಸಬೇಕು.
ಬುದ್ಧ, ಬಸವಣ್ಣ, ಕನಕದಾಸರು ಹೇಳಿದ ವಿಚಾರಗಳು ನಮ್ಮ ಮುಂದಿದ್ದರೂ ನಾವು ದಾರಿ ತಪ್ಪುತ್ತೇವೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಜಾತಿ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಈವರೆಗೆ ಹೋಗಿಲ್ಲ. ಬಾಬಾ ಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್ ಅವರು ಮೇಲು ಕೀಳು ಎಂಬ ತಾರತಮ್ಯ ಹೋಗಲಾಡಿಸಲು ಶ್ರಮಿಸಿದರು. ಸಮ ಸಮಾಜದ ಕನಸನ್ನು ನನಸು ಮಾಡುವ ಪ್ರಯತ್ನ ಮಾಡಬೇಕು. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರೂ ಇದನ್ನು ಆಚರಣೆಗೆ ತಂದರೆ ಮಾತ್ರ ಇದು ಸಾಧ್ಯ. ಜಾತಿ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗೆ ಚಲನೆ ಬರಬೇಕಾದರೆ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಸಾಮಾಜಿಕ, ಆರ್ಥಿಕ ಬಲ ಬರಲೇಬೇಕು.
ಜಾತಿ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಕ್ರಮೇಣ ಕಡಿಮೆಯಾಗುತ್ತಿದೆ. ಆದರೆ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಅಳಿದಿಲ್ಲ. ಅದಕ್ಕಾಗಿ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ವೈಚಾರಿಕ, ವೈಜ್ಞಾನಿಕ ಶಿಕ್ಷಣ ದೊರೆಯಬೇಕು. ಕರ್ಮ ಸಿದ್ಧಾಂತಕ್ಕೆ ಬಲಿಯಾಗದೆ, ಮೂಢ ನಂಬಿಕೆಗಳಿಗೆ ದಾಸರಾಗಬಾರದು.
ಭೋಜಲಿಂಗೇಶ್ವರ ಮಠಕ್ಕೆ ಸಚಿವ ಪ್ರಿಯಾಂಕ ಖರ್ಗೆ ಅವರು ಒಂದು ಕೋಟಿ ಅನುದಾನ ಒದಗಿಸಿದ್ದು, ಮಠ ಜಾತ್ಯತೀತವಾಗಿ ಬೆಳೆಯಲಿ ಎಂದು ಹಾರೈಸುತ್ತೇನೆ. ಚಿತ್ತಾಪುರದಲ್ಲಿ ವಸತಿ ನಿಲಯ ನಿರ್ಮಾಣಕ್ಕೆ ಅನುದಾನ ಒದಗಿಸಲು ಹಾಗೂ ಯಾತ್ರಿ ನಿವಾಸಕ್ಕಾಗಿ ಸಲ್ಲಿಸಿರುವ ಬೇಡಿಕೆಯನ್ನು ಸರ್ಕಾರ ಪರಿಗಣಿಸಲಿದೆ.
- ಕಲಬುರಗಿ ಜಿಲ್ಲೆಯ ಚಿತ್ತಾಪುರ ತಾಲೂಕಿನಲ್ಲಿ ಶ್ರೀ ಶ್ರೀ ಶ್ರೀ ಭೋಜಲಿಂಗೇಶ್ವರ ನೂತನ ದೇವಸ್ಥಾನವನ್ನು ಲೋಕಾರ್ಪಣೆಗೊಳಿಸಿ, ಮೂರ್ತಿ ಪ್ರತಿಷ್ಠಾಪನೆ ನೆರವೇರಿಸಿ, ನೂತನ ಬೆಳ್ಳಿ ರಥೋತ್ಸವಕ್ಕೆ ಚಾಲನೆ ನೀಡಿದ ಬಳಿಕ ಮಾತನಾಡಿದೆ.
भाई @RailMinIndia@IRCTCOFFICIAL1 ये बताओ,
1▪️जब वेटिंग टिकट बिना हमारी गलती के चार्ट बनते ही ऑटो-कैंसिल हो जाता है और कोई यात्रा नहीं होती, तो ₹60 चार्ज + GST क्यों काटते हो ?
2▪️बुकिंग के वक्त पूरा पैसा लेते हो और कन्फर्मेशन की गारंटी भी नहीं देते और जब कोई यात्रा नहीं होती , तो फिर 25-30% सर्विस चार्ज क्यों काट लेते हो ?
3▪️वर्ष 2022-23 में केवल टिकट कैंसिलेशन से ही 2110 करोड़ कमाए थे , फिर भी रोते रहते हो की रेल घाटे में चल रही है ?
ये अन्याय कब तक चलेगा?
जनता से बिना सेवा दिए हजारों करोड़ वसूलना,
क्या राष्ट्रसेवा है या खुला डाका?
चर्चा करिए और जवाब दीजिए।
#बिहार: लानत है RG पर, 'मो शा' की तरह 'परम-पवित्र' चुनाव नहीं लड़ सके..,!
बिहार में 'मो शा' एंड कंपनी ने राहुल -तेजस्वी की जोड़ी को धूल चटा दी है।
हर डेढ़ सायना सबसे ज्यादा राहुल को कोसने में लगा है तो हम भी बहती गंगा में 'हाथ-मुंह' धो लेते हैं।
तो सबसे पहले लानत है राहुल को जो इस तरह चुनाव हारते रहते हैं।
असल में उन्हें चुनाव लड़ने का शऊर ही नहीं हैं चुनाव क्या ख़ाक जीतेंगे।
सायनों ने लाख कमियां गिनाई हैं जिन्हें यहां दोहराने की ज़रूरत नहीं लेकिन कुछ कमियां हम भी गिना देते हैं।
सबसे पहली बात राहुल को सारे 'अनैतिक' तौर तरीके छोड़कर मोदी शाह की तरह 'आदर्श' 'शुद्ध', 'सात्विक', 'परम पवित्र' तरीके से चुनाव लड़ना चाहिए।
ये क्या बात हुई कि आप रोजगार, खुशहाली, विकास आदि की बात करके चुनाव लड़ते हैं..
अरे भई ये 'अमृतकाल' है यहां ये सब नहीं चलेगा..
थोड़ा लुच्चा,लफंगापन, थोड़ी नफ़रत, थोड़ा झूठ, फरेब, चोरी, डकैती के बिना कैसा चुनाव..! हांय..!
अब आइए हम बताते हैं राहुल को क्या क्या करना चाहिए था...
१) सबसे पहले अपना एक चुनाव आयोग बना कर SIR के जरिए 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से उड़वा देने थे।
फिर आवेदन लेकर 16 लाख मनमाफिक वोटर जुड़ने थे।
इसके अलावा पांच लाख वोटर बिना लिखतम पढ़तम के जोड़ना थे।
चुनाव आयोग को खूंटे पर बांध कर रखना था, आदर्श आचार संहिता का आदर्श 'अचार' बना कर डब्बे/बरनी में रख देना था।
राहुल को अपना एक 'सुप्रीम कोर्ट' भी तो बनाना था जो SIR जैसे मुद्दे पर व्यास पीठ पर बैठ कर प्रवचन देता रहता...।
अनिल मसीह को 'लोकतंत्र का हत्यारा' कह कर फिर छुट्टा सांड की तरह खुला छोड़ देता।
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लानत है राहुल इतना सा काम नहीं कर सके।
२) इसके बाद चुनाव की घोषणा से एन पहले महिलाओं के खाते में सीधे दस दस हज़ार रु जमा करवाने थे।
कुल मिलाकर कुछ अरब रुपए ही तो देने थे।
कोई शिकायत करता तो अपने खूंटे पर बंधे चुनाव आयोग से कहलवा देते कि 'ऑन गोइंग स्कीम' है इसलिए बंद नहीं होगी।
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राहुल कुछ अरब रु खर्च नहीं कर सके।
३) राहुल ने पूरे चुनाव में अपने भाषणों में एक बार भी कट्टा, छर्रा, सिक्सर, मुजरा नहीं बोला।
अरे चुनाव लड़ रहे थे तो सड़कछाप छिछोरे जैसी भाषा में डायलॉग नहीं मार सकते थे तो चुनाव काहे लड़ने आए?
क्या बिगड़ जाता अगर एक बार कह देते कि चचा ट्रंप ने 'मो दी की कनपटी पर कट्टा' लगा कर सीजफायर करवाया था।
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राहुल लुच्चों जैसी बोली नहीं बोल सके।
४) चुनाव शुरू होने से पहले कहीं कोई लफंगा उनकी मां को गाली देता और वे हर मंच से आंसू बहाते कि देखो मेरी मां को गाली दी जा रही है।
उनकी पार्टी बिहार बंद करवाती और फिर उसमें गालियां दी जातींं।
पार्टी के प्रवक्ता गोदी मीडिया में छाती फाड़ कर चीखते देखो राहुल की मां को मो शा ने गाली दी है।
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राहुल इतना सा ड्रामा नहीं कर सके।
५) मतदान के दिन कर्नाटक और हिमाचल से रेल में भर भर कर वोट डालने के लिए वोटर भेजने थे।
पार्टी के पदाधिकारी/ कार्यकर्ता जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश या कहीं भी वोट डाल चुके उनके वोट बिहार में डलवाने थे।
ऐसे शूरवीरों के फ़ोटो सोशल मीडिया की शान बनने थे लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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राहुल इतना सा खेल नहीं कर सके।
६) पूरे चुनाव में घुसपैठियों का राग अलापना था।
घुसपैठिए,घुसपैठिए कह कर खुल कर 'हिन्दू मुस्लिम' करना था।
हर सभा में कहना था कि देखो मेरी सरकार है, मेरा गृह मंत्री है फिर भी लाखों घुसपैठिए घुस आए हैं, वोटर बन गए हैं।
कहना था कि मैं और मेरी सरकार महा नकारा हैं इसलिए मुझे वोट दो।
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राहुल न नफ़रत फैला सके और अपनी नाकामी बता सके।
७) राहुल को अपनी ED, CBI, IT आदि बना कर विरोधी नेताओं की कमर तोड़ देना थी।
कम से कम किसी दूसरे राज्य में किसी विरोधी प्रत्याशी के घर बुलडोजर भिजवा कर उसे मिट्टी में मिलवा देते।
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राहुल इतना सा काम नहीं कर सके।
इन तमाम नैतिक, शुद्ध, सात्विक, परम पवित्र तरीकों से चुनाव लड़ते तो शायद थोड़ा बहुत जीत जाते लेकिन क्या करें राहुल को चुनाव लड़ने का शऊर ही नहीं है।
आप सबसे निवेदन है कि मो शा के सात्विक चुनाव के कुछ और उपाय याद आएं तो यहां जोड़ते जाइए।
वैसे इतना सब कर भी लेते तब भी कुछ नहीं होता क्योंकि 'ज़गीर' कह गया है कि मुझसे लड़ने की हिम्मत तो ले आओगे लेकिन....!
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लेकिन सुनो राहुल,
हजार चुनाव हारते रहना लेकिन
कभी 'मो शा' जैसे मत बन जाना..
कभी उनके जैसे घटिया भाषण मत देना, कभी नफ़रत मत फैलाना,
कभी उनकी तरह झूठ मत बोलना,
कभी कोई वोट चोरी मत करना।
जिस दिन चुटकी भर भी उन जैसे बन जाओगे उस दिन बहुतों की उम्मीदों का दिया बुझ जाएगा।
ऐसे ही जलते रहना,
ऐसे ही चलते रहना।
ऐसे ही बने रहना,
ऐसे ही तने रहना।
इति।
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32 साल मैंने सेना की सबसे कठिन जगहों पर नौकरी की,बर्फ पिघलाकर पानी पिया।
हम गरीब हैं इसलिए मेरे बेटे को मार दिया गया, पुलिस SSP या जिला कलेक्टर का बेटा होता तो गोली चलती क्या ?
- पूर्व सैनिक त्सावांग थरचिन के पिता
“While you were scrolling memes, they were engineering your microbiome.”
Welcome to the Internet of Bio-NanoThings (IoBNT) — where your gut, brain, and every cell in between are becoming nodes in a molecular internet you never consented to join.
People have it all wrong…
I say I don’t want war, they say I’m anti-Trump- wrong
I say I don’t like Israel, they call me an antisemite- wrong
I say I don’t like Ukraine, they say I’m pro Russia- wrong
The truth is…
… I hate everyone. Everything is fake and gay. All war is stupid. All politicians are crooks. The sun is getting ready to ass fuck this planet into a new age and most of you are clueless.
लड़कों तुम भी तैयार हो जाए l
अभी तक तो ये लोग कह रहे थे कि
यह वैक्सीन लड़कियां को लगवाना है l
समझो सारा खेल l
और हां, बोलने वाला कौन है ? सिरम इंस्टीट्यूट में काम करने वाला एक गुलाम नौकर l
“Brought to you by Pfizer”
According to Pfizer’s own Covid mRNA bioaccumulation data released under FOI, the most significant increases in lipid nano particle concentrations at the 24 x hour point compared to the 48 x hour mark are:
1. Ovaries - 133% increase
2. Adipose Tissue - 115% increase
3. Muscle - 102% increase
4. Bone Femur - 101% increase
5. Thyroid- 73% increase
6. Skin - 61% increase
7. Uterus - 58% increase
8. Bladder - 48% increase
9. Adrenal Glands - 32.2% increase
10. Spinal Cord - 31.7% increase
So, in double the time period, bioaccumulation in the ovaries more than doubled.