एक ईमानदार अफसर की विदाई.🙏
शिक्षा निदेशक सीताराम जाट जी आज सेवानिवृत हो रहे हैं ऐसे दौर में जब भ्रष्टाचार आम बात बन चुका है इन्होंने ईमानदारी और संवेदनशीलता से विभाग को दिशा दी.!
लाखों शिक्षकों और विद्यार्थियों के जीवन को छुआ बिना शोर मचाए काम किया।
सेवानिवृत्ति पर हार्दिक शुभकामनाएं व स्वस्थ जीवन की कामना..🌸
#SitaramJat
"हम आपको राजस्थान का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं, आप कब बनेंगे..?"
इस सवाल पर सचिन पायलट जी का जवाब-
"इस सवाल का जवाब जनता के पास है,
कांग्रेस पार्टी के पास है और ऊपरवाले के पास है।
मैं तो बस मेहनत कर सकता हूं।"
~ @SachinPilot
सभी शिक्षा विभाग के कही अवकाश 60 दिन तो कही 47 दिन केवल स्कूल शिक्षा विभाग में कटौती की गई है जहां बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत है।
शिक्षा मंत्री जी की ऐसी मानसिकता को लेकर शिक्षकों का विरोध
सहमत है तो रीट्वीट करे, नहीं तो कमेंट
@Apnigovt
#Jodhpur: मासूम बच्चों पर भी नजरें इनायत करो "सरकार" !
गर्मियों की छुट्टियों को लेकर विरोधाभास की स्थिति आ रही नजर, राजकीय कॉलेजों में 1 मई से ही ग्रीष्मावकाश कर...
#RajasthanWithFirstIndia@RajGovOfficial
#ग्रीष्मावकाश_कटौती_नहीं_चलेगी
शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार ने हठधर्मिता अपना ली है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को 20 जून तक ही ग्रीष्मावकाश दिया जायेगा। शिक्षक संघों व शिक्षकों ने सरकार द्वारा 1 अप्रैल से नवीन सत्र प्रारंभ करने के फैसले का स्वागत किया और इसे सफल बनाने में समर्पित होकर कार्य किया लेकिन यह कैसी असंवेदनशीलता है कि विषम परिस्थितियों वाले राजस्थान में जहां मई व जून के महीने में एक व्यस्क व्यक्ति के भीष्ण गर्मी से पसीने छूट जाते हैं वहां 6 वर्ष से लेकर 17 वर्ष तक के बच्चों को स्कूल बुलायेंगे।
एक तरफ हीटवेव, आंधियां, लू, भीष्ण गर्मी, सूर्य की तीखी किरणों का प्रकोप रहता है और दूसरी तरफ आवागमन के संसाधन क्या है सरकारी विद्यालयों के बच्चों के पास कुछ नहीं। क्या उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
शिक्षकों से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत कार्य करवाया गया लगातार चार महीने रविवार का भी अवकाश नहीं लिया। चुनाव के लिए कार्य किया, अब ग्रीष्मावकाश में भी अधिकतर शिक्षक जनगणना का कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक रविवार को प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करवाते हैं तो फिर सरकार आखिर चाहती क्या है शिक्षकों से? जिस तरीके से सरकार लगातार शिक्षकों पर काम का दबाव बढ़ा रही है यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। बच्चों का स्वास्थ्य व शिक्षकों का अधिकार हमारे लिए केंद्र बिंदु है और सभी शिक्षक मिलकर इस फैसले का हम विरोध करते हैं।
जहां केंद्रीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 49 दिन, नवोदय विद्यालय में 60 दिन यहां तक की महाविद्यालयों में 61 दिन तो फिर विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राजस्थान में 35 दिन क्यों?? सरकार तत्काल ग्रीष्मावकाश पूर्ववत 17 मई से 30 जून तक करें और इसके साथ ही ग्रीष्मावकाश कम से कम 50 दिन करने पर विचार करें।
शिक्षकों के अवकाश कटौती कर सरकार कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। ग्रीष्मावकाश कटौती पर शिक्षक संगठन व शिक्षक एकजुट हैं और लामबंद होकर बड़े आंदोलन की तरफ अग्रसर हो रहें हैं, सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करें तथा ग्रीष्मावकाश 50 दिन करने का विचार करें।
मई व जून माह में मौसम विभाग की लगातार एडवायजरी जारी होती है कि सब अपने घरों में रहें मौसम बिगड़ने की संभावना है, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि, तेज आंधियों का खतरा रहता है और इन सबके अलावा भीषण गर्मी तो लगातार रहती है और सरकारी विद्यालयों में आने वाला बच्चा अभावग्रस्त पृष्ठभूमि से होता है, वो ना तो पीने के लिए पानी की बोतल लाते हैं और दो तीन किलोमीटर का सफर भी पैदल तय करते हैं , इसलिए सरकार को राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षकों के अवकाश में कटौती नहीं करते हुए अवकाश पुनः 17 मई से 30 जून तक किये जाये , अन्यथा विरोध किया जायेगा।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी आप संज्ञान लेकर फैसले पर विचार कीजिए।
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#ग्रीष्मावकाश_कटौती_नहीं_चलेगी
शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा ग्रीष्मावकाश को 20 जून तक सीमित करने का निर्णय पूर्णतः अव्यवहारिक और असंवेदनशील प्रतीत होता है।
राजस्थान जैसे विषम भौगोलिक एवं जलवायु वाले राज्य में मई-जून के महीनों में भीषण गर्मी, लू, आंधी एवं हीटवेव का प्रकोप चरम पर होता है। ऐसी परिस्थितियों में 6 से 17 वर्ष तक के बच्चों को विद्यालय बुलाना उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण एवं अभावग्रस्त पृष्ठभूमि से आते हैं—
कई बच्चों के पास समुचित आवागमन सुविधा नहीं है
2–3 किलोमीटर तक पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं
पीने के पानी व अन्य आवश्यक संसाधनों का भी अभाव रहता है
ऐसे में यह निर्णय न केवल अव्यवहारिक बल्कि बच्चों के जीवन के लिए जोखिमपूर्ण है।
दूसरी ओर, शिक्षक वर्ग ने सदैव सरकार के निर्णयों का सम्मान करते हुए पूर्ण निष्ठा से कार्य किया है—
1 अप्रैल से सत्र प्रारंभ करने में सक्रिय योगदान
विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में लगातार कार्य
चुनावी दायित्वों का निर्वहन
जनगणना एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर सहभागिता
इसके बावजूद शिक्षकों के अवकाश में कटौती करना उनके अधिकारों का हनन है।
जबकि—
केंद्रीय विद्यालयों में लगभग 49 दिन
नवोदय विद्यालयों में लगभग 60 दिन
महाविद्यालयों में लगभग 60+ दिन का ग्रीष्मावकाश दिया जाता है
तो फिर राजस्थान में मात्र 35 दिन का अवकाश क्यों?
👉 हमारी मांग स्पष्ट हैं:
ग्रीष्मावकाश पूर्ववत 17 मई से 30 जून तक किया जाए
यदि इस निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार नहीं किया गया, तो शिक्षक संगठन एवं शिक्षक वर्ग एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी से निवेदन है कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करें।
@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@Rajendra4BJP@JATbera1@RESMA_7
शिक्षक संघों के साथ श्रीमान शिक्षा सचिव महोदय की अध्यक्षता व शिक्षा निदेशक महोदय की उपस्थिति में बैठक का आयोजन हुआ उसमें अवकाशों में कटौती नहीं करने का भरोसा दिया गया था लेकिन शिविरा के अवलोकन से पता चला है कि शिक्षकों से वादाखिलाफ़ी हुई है जिससे शिक्षकों में आक्रोश है।
माननीय मुख्यमंत्री महोदय @BhajanlalBjp जी , माननीय शिक्षामंत्री @madandilawar जी , श्रीमान मुख्य सचिव महोदय @svoruganti1466 जी , श्रीमान अतिरिक्त मुख्य सचिव महोदय शिक्षा से निवेदन है इस पर पुनर्विचार करें अन्यथा शिक्षक संगठन विरोध करेंगे।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिविरा पंचांग में शिक्षकों के अवकाश में की गई कटौती का रेसला संगठन विरोध करता है , माननीय मुख्यमंत्री महोदय @BhajanlalBjp , शिक्षा मंत्री महोदय @madandilawar माननीय @RajCMO से निवेदन है कि अवकाश में की गई कटौती पर पुनर्विचार करें ।
सत्र 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में अवकाश कटौती के विरोध में @RESMA_7 द्वारा 7 अप्रैल को जिला स्तर पर कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा
मुख्य मांगें:
• प्रधानाचार्य अवकाश 2 दिन यथावत रहे
• ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 मई–30 जून किया जाए
• शीतकालीन अवकाश 26 दिसम्बर–10 जनवरी किया जाए।
सत्र 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में अवकाश कटौती के विरोध में @RESMA_7 द्वारा 7 अप्रैल को जिला स्तर पर कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा
मुख्य मांगें:
• प्रधानाचार्य अवकाश 2 दिन यथावत रहें
• ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 मई–30 जून किया जाए
• शीतकालीन अवकाश 26 दिसम्बर–10 जनवरी किया जाए !
जनगणना में शिक्षकों की ड्यूटी ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय के लिए लगाई जा रही है, जो दूर जिलों में लगे शिक्षक है उन्हें छुट्टियों मे अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलता हैं,सरकार को संज्ञान लेकर शिक्षकों को राहत प्रदान करनी चाहिए
@madandilawar@1stIndiaNews@rajeduofficial
जनगणना में शिक्षकों की ड्यूटी ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय के लिए लगाई जा रही है, जो दूर जिलों में लगे शिक्षक है उन्हें छुट्टियों मे अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलता हैं,सरकार को संज्ञान लेकर शिक्षकों को राहत प्रदान करनी चाहिए
@madandilawar@1stIndiaNews@rajeduofficial
परिवीक्षा अवधि में कर्मचारियों को पूरा वेतन देना हाईकोर्ट को कहना पड़ा, यह खुद में सिस्टम की बड़ी नाकामी का सबूत है। सवाल यह है कि जो बात इंसाफ और तर्क से साफ थी, उसके लिए कर्मचारियों को अदालत का दरवाज़ा क्यों खटखटाना पड़ा?
प्रोबेशन के नाम पर सालों तक 70%, 80% या 90% वेतन देना दरअसल सस्ते श्रम का सरकारी मॉडल बन चुका था। समान काम, समान जिम्मेदारी, लेकिन वेतन में खुली भेदभाव नीति—और वो भी सरकार द्वारा लागू की गई।
यह फैसला बताता है कि प्रशासन ने जानबूझकर कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाया। नए भर्ती हुए युवा कर्मचारी विरोध नहीं कर सकते थे, इसलिए उनकी जेब पर कैंची चलाना आसान समझ लिया गया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे अवैध सर्कुलर वर्षों तक लागू रहे और किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी। क्या कर्मचारी सिर्फ आदेश मानने की मशीन हैं, जिनके अधिकार तभी याद आते हैं जब कोर्ट डांटे?
हाईकोर्ट का यह फैसला राहत जरूर है, लेकिन यह भी सवाल छोड़ जाता है—जो पैसा गलत तरीके से काटा गया, उसकी जवाबदेही कौन लेगा? अगर अब भी ऐसे फैसलों से सबक नहीं लिया गया, तो शोषण की यह व्यवस्था नए नामों के साथ दोबारा लौट आएगी।