#Always with natural justice
गैर-जाति में विवाह की चर्चा प्रारंभ करें,संभावना तलाशें
ख़ासकर SC,ST,OBC
जातिवाद का एकमात्र वैक्सीन- गैरजातियविवाह
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अगर बनारस के पंडितों ने दिल बड़ा किया होता तो कश्मीर की कहानी अलग होती. वहां के मुसलमान फिर से हिंदू बनने के लिए तैयार थे. वहां के राजा ने बनारस संदेश भेजा. पर पंडित ज्यादा शुद्धतावादी हो गए. ये ऐतिहासिक गलती थी.
बता रहे हैं जवाहरलाल नेहरू, पुस्तक - भारत की खोज (1946)
आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।
साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
आपकी अपनी,
दिव्या मित्तल
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लेकर रहेंगे।
सभी SC/ST/OBC एकजुट हो जाओ अभी तक आरक्षण का मुद्दा सिर्फ 2 % सरकारी नौकरी पर ही सीमित रहा है अब समय आ गया है कि बाक़ी के 98 % प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण लेने की राह बुलंद करनी है।
यह महान लेखिका अमेरिका से भारत में बौद्ध साहित्य पर शोध अध्ययन करने आयी थी. बहुजन विचारक भारत पाटणकर से प्यार हो गया
उनसे शादी कर हमेशा के लिए भारत की होकर रह गईं.
इस महान लेखिका काफी गहन अध्ययन करने बाद Aryan Invasion थ्योरी को नकार दिया.
महान लेखिका ने लिखा : सिंधु घाटी सभ्यता पर आर्यन आक्रमण कोई भी प्रमाण नही है. यह थ्योरी पूरी तरह काल्पनिक है,
आर्यन यहां आकर लोगों को जीत लिया यह दावा पूरी तरह भ्रामक है.
महान लेखिका बताती हैं. प्राचीन आर्यों में आज जैसी जाति व्यवस्था नही थी. आर्यों का समाज तीन वर्ग में विभाजित था > पुरोहित, योद्धा और सामान्य वर्ग.
तीनों वर्गों में आपस में खाने पीने का भेदभाव था. धीरे धीरे इसी समाज ने ब्राह्मण के रूप में अपनी पहचान बनाई. अपनी रचनाओं में जाति वर्ण को एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था में स्थापित किया.
महान लेखिका उन दलित लेखकों को भी फटकार लगाती है जो Aryan Theory को स्वीकार कर आर्यों को विजेता और अपने को मूलनिवासी मानने की धारणा अपनाई.
25 अगस्त 2021 को इस महान लेखिका का निधन हो गया. वो 80 साल की थीं. कल महान लेखिका की पुण्यतिथि थी. महान लेखिका को कोटि कोटि नमन करता हूँ. आप लोगों को इस महान लेखिका का नाम बताना है ?
अजीत भारती पर एट्रोसिटी एक्ट मे FIR हुई है।
माजरा कुछ यूँ है कि भारती ने "सवर्णों" के समर्थन मे "कुछ फायरब्रांड" कहा। जवाब मे, किसी "अवर्ण" ने कह दिया कि अपनी बहन को चंद्रशेखर रावण से ब्याह दो।
यदि यह सत्य है, तो अजीत क्या, किसी का भी पारा चढ़ेगा। उन्होंने तमाम बाउंड्रीज तोड़कर जवाब दिया। तो अगले ने उनपर एट्रोसिटी एक्ट मे FIR करवा दी।
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पोस्ट अजीत भारती पर नहीं, गाँधी पर है।
गाँधी ने अछूत उद्धार पर 1933 से काम शुरू किया। दरअसल, 1932 मे उन्होंने राजनीति से एक तरह से सन्यास ले लिया था। कांग्रेस की चवन्नी सदस्यता छोड़ दी।
हरिजन अख़बार शुरू किया। हरिजन सेवक संघ बनाया। दलितों को समाज की मुख्यधारा मे स्पेस देने के लिए देश के हर राज्य मे घूमते रहे।अछूतोंदार यात्रा निकाली।
उन्हें मंदिरों में प्रवेश दिलाने के लिए प्रयत्न किया।
अस्पृश्यता को उन्होंने मानवता के प्रति जघन्य अपराध कहा।
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उड़ीसा कर्नाटक और दक्षिण के इलाकों में काफी घूमे।सेलिब्रिटी होने के नाते उन्हें बहुत से विवाह कार्यक्रम में आमंत्रित भी किया जाता।
तब एक बात उन्होंने बहुत स्पष्ट कहीं- मैं केवल ऐसे विवाह में जाऊंगा.. जिसमें एक पक्ष हरिजन हो।
दरअसल गांधी ने यह समझ लिया था की कानून,दबाव या दीगर तरीके से जाति खत्म नहीं होगी। यह तभी जाएगी जब समाज में वैवाहिक संबंध, जातिगत बंधनों को तोड़कर बने।
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अपने तमाम सवर्ण, लिबरल साथियों को यह कहते देखता हूं कि वह तो जाति नहीं मानते। सबको बराबर समझते हैं, साथ बैठते, खाते पीते हँसते हैँ।
पर अगर यह प्रश्न करो - कि क्या किसी अपने भाई, बहन, बेटा, बेटी का किसी दलित लड़के/लड़की से विवाह करेंगे??
वे प्रश्न का बुरा मान जाते हैं।
पर सत्य यह है कि उनके साथ खाने पीने पीने, बैठने, हंसने बोलने लेने से, जातिगत विभाजन खत्म नहीं होगा। यहाँ तो युवाओं मे प्रेम भी, जाति देखकर होता है।
ऊंच-नीच की आदत, उसकी विरासत, पीढ़ी दर पीढ़ी कायम रहती है।
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वह गाँधी के प्रयास के 90 साल बाद भी समाज मे इतनी मज़बूत है, की कोई अजीत, अपनी बहन के किसी दलित से ब्याह जाने की मांग पर, गालियां दे देता है।
औऱ यह गुस्सा हमें जस्टिफाइड भी लगता है।
पर यह बात समझिये कि,प्रोग्रेसिव होने का दम वहीं तक सीमित है, ज़ब तक उनकी शुद्धता और उच्चता कायम रहे। औऱ जब तक ये शुद्धता/ उच्चता का भाव कायम है,
आरक्षण एक जरूरी उपाय है।
उसे जारी रहना चाहिए।
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ताकि दलित औऱ शोषित जब कभी थाने, कचहरी, कोर्ट, सरकारी ऑफिस, अस्पताल, या स्कूल मे जाये। तो उसे सम्मान औऱ बराबरी से - न्याय- इलाज- शिक्षा देने वाले, उसके अपने समाज के लोग का पर्याप्त संख्या में मौजूद हो।
भले ही एंट्रेंस एग्जाम में उन्हें कम नंबर मिले थे।
आरक्षण का परपज अलग है। वह गरीबी उन्मूलन की योजना नहीं है। यह एक कंपनसेशन है। आर्थिक आधार पर आरक्षण अपने आप में बकवास है।
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आप या तो गांधी के रास्ते पर चलकर दलितों को बराबरी का स्पेस देंगे, रोटी बेटी का संबंध रखेंगे। आने वाले 100 साल मे समाज होमोजिनस बना देंगे।
या फिर ऐसा न करने का कंपनसेशन, संविधान अंबेडकर के रास्ते चलकर देगा। आरक्षण के रूप में देगा।
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लेकिन अजीत भारती,औऱ आरक्षण के खिलाफ लड़ रहे युवा दोनों हाथों में लड्डू चाहते हैं।
सो क्या आश्चर्य कि उनपर एट्रोसिटी एक्ट मे FIR हुई है।
अगर वाकई में आरक्षण को समझना है और अपनी बात रखने का इतना ही दम है, तो इधर-उधर की बातें छोड़ो। किसी पढ़े-लिखे स्कॉलर या प्रोफेसर को सामने लाओ, मंच तैयार करो और सीधे संवाद के मैदान में मुकाबला कर लो, सच सामने आ जाएगा!" 🧠🔥#SocialJustice#Reservation#FactsMatter@VivekkumarProf
साथियों मुझे बताते हुए अतयंत हर्ष हो रहा है की मेरी किताब का दक्षिण एशिया संस्करण प्रकाशित हो गया है। यह भारत, नेपाल, बंदलादेश, श्रीलंका एवं भूटान में सस्ते दाम पर मिलेगी। अभी अमेज़ॉन पर लन्दन/अमरीकी संस्करण रूपए 22000/-का बिक रही है. अब यह 1100/- में भारत में बिकेगी।
कांचा इलैया शेफर्ड अपनी महान रचना Why I am Not a Hindu में सवाल उठाते हैं
किसान, पशुपालक, कारीगर, मजदूर और अन्य श्रम से जुड़े लोग शूद्र या अस्पृश्य कैसे हो सकते हैं ?
जो समाज प्रोडक्शन कर रहा है. लोहा काट रहा है, धरती से अनाज उगा रहा है. मेहनत मजदूरी कर रहा है उन्हें निम्न स्तर कहना किसी बदमाश की साजिश है.
जो समाज पूरे समुदाय के लिए भोजन पैदा और वस्तुएं पैदा करता है वो Productive Class हैं.
जो कुछ नही करने का दावा करता है वो Non Productive क्लास है.
सीना तानकर कर कहो, हम Productive Class हैं. जय कांचा इलैया शेफर्ड.
दिल्ली एलीट स्कूलो में 95 % से भी ज़्यादा तथाकथित उपरी जाति के बच्चे के पढ़ते है और लगभग यही हाल पूरे देश के एलीट स्कूल का हाल है।
अब सोचे बहुजनों के प्रतिनिधित्व हटाने की माँग कौन कर रहा ?
सुदामा कोठा कौन सी जाति का उठा रहा?
दिल्ली एलीट स्कूल में
OBC - 1.37%
SC - 2.7%
ST - 0.72%
फ्रांस में बिकने वाली Fanta और भारत में बिकने वाली Fanta में जमीन आसमान का खतरा है।
•फ्रेंच फैंटा में लगभग 4 चम्मच चीनी होती है। •भारतीय फैंटा में लगभग 10 चम्मच चीनी होती है।
•फ्रेंच फैंटा में असली संतरे होते हैं।
•भारतीय फैंटा में संतरे नहीं होते और इसमें "संतरे के स्वाद" का उपयोग किया जाता है।
•फ्रेंच फैंटा में लगभग 69 कैलोरी होती हैं। •भारतीय फैंटा में लगभग 168 कैलोरी होती हैं।
एक ही ब्रांड के दोनों पेय पदार्थ हैं लेकिन विदेश में स्वास्थ्यवर्धक लेकिन भारत में हानिकारक ऐसा क्यों?
क्या भारत के लोगों को ये कम्पनियां जानवर समझती हैं??
संविधान सभा की बहस
सदन का ध्यान आकृष्ट करते हुए *कृष्णाम्माचारी* ने कहा, “सदन को शायद यह मालूम नहीं होगा कि आपके चुने हुए सात सदस्यों में से एक ने इस्तीफा दे दिया, उनकी जगह रिक्त ही रही। एक सदस्य की मृत्यु हो गई, उनकी जगह भी रिक्त ही रही। एक सदस्य अमेरिका चले गए, अतः उनकी भी जगह खाली रही। चौथे सदस्य रियासतदारों संबंधी काम-काज में व्यस्त रहे, इसलिए वे सदस्य होकर भी नहीं के बराबर थे। दो-एक सदस्य दिल्ली से दूरी पर थे। उनका स्वास्थ्य बिगड़ने से वे भी उपस्थित नहीं रह सके। आखिरकार यह हुआ कि संविधान बनाने का सारा बोझ अकेले डॉ. आंबेडकर पर ही पड़ा। इस स्थिति में उन्होंने जिस पद्धति से यह काम पूरा किया, उसके लिए वे निस्संदेह आदर के पात्र हैं। मैं निश्चय के साथ आपको यह बताना चाहता हूं कि डॉ. आंबेडकर ने अनेक कठिनाइयों के बाद भी मार्ग निकालकर यह कार्य पूरा किया, जिसके लिए हम उनके हमेशा ऋणी रहेंगे।”
(संविधान सभा की बहस, खंड-7, पृष्ठ-231)
🔥 बड़ी ख़बर 🔥
सुप्रीम कोर्ट ने https://t.co/vF3ZPjPdx5. की डिग्री पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
https://t.co/vF3ZPjPdx5. डिग्री धारक इंजीनियरों को जूनियर इंजीनियर पद के लिए आवेदन करने से रोक दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि https://t.co/vF3ZPjPdx5. डिग्री धारक GATE और अन्य परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
अब जूनियर रैंकिंग के इंजीनियर पदों पर सिर्फ डिप्लोमा धारक इंजीनियर ही आवेदन कर सकेंगे।
https://t.co/vF3ZPjPdx5. धारक इंजीनियर अब छोटी नौकरियों पर आवेदन ही नहीं कर सकेंगे।
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विजय थलापति का बड़ा ऐलान बाबा साहेब के मूर्ति तोड़ने वालों के लिए 10 लाख का जुर्माना 1 साल की जेल सरकारी नौकरी से पूरे परिवार को बेदखल इस पर आप लोगों की क्या राय है कमेंट में जवाब जरूर दें
अमेरिका में होगा पहले महाबोधि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र का उद्घाटन, 4 जुलाई को होगा महाबोधि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र का उद्घाटन #usa#MahabodhiMandir#buddhism @abatdalls
भगवन तथागत के ज्ञान से आपको परिचित कराने के लिए हमने ये YouTube Channel बनाया है
यहाँ आपको मिलेगा— बुद्ध के उपदेश, ध्यान, माया और दुःख से मुक्ति की शिक्षा,, जो हर इंसान के जीवन को बेहतर बना सकती है
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कुएँ का मेंढक कुएँ में मर जाएगा, लेकिन पास बहती मीठे पानी की नदी तक नहीं जाएगा।
हमें अपनी संस्कृति पर बहुत नाज़ है, जिसमें इंसानों को बांटा जाता है...धर्म, जाति, रंग और हैसियत से।
जहाँ इंसान के साथ इंसानियत निभाई जाए, वही सबसे अच्छा घर है।
#IndianSociety#JaatInMood
निराशाओं के भंवर से निकालकर उम्मीदों के आसमान तक पहुंचाने वाली शॉर्ट फिल्म “नये-नये तारे” को 29th May को Super Infinity Official YouTube Channel पर ज़रूर देखें। यकीन मानिये इस कहानी को आप सिर्फ देखेंगें नहीं बल्कि महसूस करेगें |
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आपलोगों के प्यार, विश्वास और सलाह पर मैंने “Super Infinity” के रूप में एक नई पहल की शुरुआत की है।इसी क्रम में मैंने एक YouTube चैनल भी बनाया है, ताकि गणित की रोचक और जीवन से जुड़ी सीख को मैं सीधे आप तक पहुँचा सकूँ। मेरा विश्वास है कि आप इस नए सफर में भी मेरा उत्साहवर्धन ज़रूर करेंगे और चैनल को Subscribe और Share करके इस मिशन का हिस्सा बनेंगे।
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