भारतीय जनता पार्टी
पूर्व जिला सोशल मीडिया प्रभारी अल्मोडा ,भाजयु मोर्चा पूर्व जिला संयोजक,पूर्व जालली मंडल प्रभारी, पूर्व विधानसभा द्वाराहाट सोशल मीडिया प्रभारी
आप सभी को पावन श्रावण मास के प्रथम मंगला गौरी व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं।
जगत जननी माँ मंगला गौरी की असीम कृपा से प्रत्येक घर में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का वास हो। माँ का आशीर्वाद सभी के जीवन को आनंद, सौभाग्य और नई ऊर्जा से आलोकित करे।
करोड़ों विद्यार्थियों की मेहनत और उनके अभिभावकों के विश्वास की रक्षा आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की गारंटी है।
संसद से पारित पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 इसी संकल्प को और सशक्त करते हुए देश के हर विद्यार्थी की ईमानदार मेहनत, हर युवा के सपनों और हर अभिभावक के विश्वास की रक्षा को नई मजबूती देता है।
#PublicExaminationBill2026
'मिसाइल मैन', पूर्व राष्ट्रपति, 'भारत रत्न' डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
रक्षा व अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ ही राष्ट्र को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने में उनका योगदान अभूतपूर्व है।
उनकी दूरदर्शिता, सादगी एवं राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के स्थापना दिवस पर सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
विद्यार्थी जीवन में राष्ट्रवाद, अनुशासन और सेवा की भावना जागृत करने में एबीवीपी की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। 'ज्ञान, शील और एकता' के मंत्र के साथ संगठन निरंतर युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित कर रहा है। परिषद् से मिले संस्कार मेरे सार्वजनिक जीवन की अमूल्य पूंजी हैं।
एबीवीपी के कार्यकर्ता अपनी ऊर्जा, समर्पण और प्रतिबद्धता से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। परिषद् की यह गौरवशाली परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर दिशा देती रहेगी।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में भारत अपनी सनातन सांस्कृतिक विरासत से जुड़े वैश्विक संबंधों को नई ऊर्जा दे रहा है।
इंडोनेशिया के यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा।
प्रम्बानन मंदिर में गूंजता “ॐ नमः शिवाय” सनातन की शाश्वत चेतना का दिव्य स्वर है।
#PMModiInIndonesia
रामायण काल में जब लंका विजय के बाद भगवान श्री राम ने अयोध्या में अश्वमेध यज्ञ किया, तो यज्ञ का चमत्कारी घोड़ा (श्यामकर्ण घोड़ा) चारों दिशाओं को जीतने के लिए छोड़ा गया। उस घोड़े की रक्षा के लिए प्रभु श्री राम के भाई शत्रुघ्न, हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज और पूरी वानर सेना साथ चल रही थी।
घोड़ा कई राज्यों को पार करता हुआ अचानक एक ऐसी चमत्कारी नगरी में प्रवेश कर गया, जहाँ की दीवारों से भी 'ॐ नमः शिवाय' की गूंज आ रही थी। वह थी—'देवपुर नगरी'।
आइए जानते हैं इस रहस्यमयी नगरी और वहाँ हुए महा-संग्राम की गाथा:
देवपुर नगरी के राजा थे 'वीरमणि'। वे साक्षात भगवान शिव के इतने बड़े और अनन्य भक्त थे कि उन्होंने अपनी पूरी प्रजा को केवल शिव की आराधना में लगा रखा था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि—"राजन! इस पूरी नगरी की रक्षा का भार स्वयं मेरा और मेरे गणों का है। जब तक तुम धर्म पर रहोगे, साक्षात काल (यमराज) भी तुम्हारी नगरी में किसी के प्राण नहीं ले सकता।"
जब श्री राम के यज्ञ का घोड़ा देवपुर की सीमा में पहुँचा, तो राजा वीरमणि के पुत्र 'रुक्मांगद' ने उस घोड़े को पकड़कर अपने अस्तबल में बांध दिया। इसका सीधा मतलब था अयोध्या की सत्ता को चुनौती।
जब शत्रुघ्न को पता चला कि घोड़ा राजा वीरमणि के राज्य में बांधा गया है, तो उन्होंने दूत भेजकर संदेश भिजवाया कि या तो घोड़ा लौटा दो और श्रीराम की अधीनता स्वीकार करो, या युद्ध के लिए तैयार रहो।
राजा वीरमणि ने कहलाया—"मैं केवल महादेव के सामने झुकता हूँ, किसी अन्य राजा के सामने नहीं। यदि अयोध्या की सेना में दम है, तो आकर अपना घोड़ा छुड़ा ले।
युद्ध निश्चित हो गया। एक तरफ श्री राम की प्रलयंकारी वानर सेना थी, और दूसरी तरफ शिवभक्त राजा वीरमणि की विशाल चतुरंगिणी सेना। युद्ध शुरू होते ही चारों तरफ हाहाकार मच गया।
राजा वीरमणि की सेना जब हारने लगी, तो उन्होंने अपने आराध्य भगवान शिव को पुकारा। अपने भक्त पर संकट आया देख महादेव ने वैकुंठ और अयोध्या की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, स्वयं सामने आने के बजाय अपने परम शक्तिशाली गण 'वीरभद्र' और 'नंदी' को अपनी महासेना के साथ वीरमणि की रक्षा के लिए भेज दिया।
एक तरफ श्री राम के भाई शत्रुघ्न और वीर हनुमान के पुत्र मकरध्वज थे।दूसरी तरफ साक्षात शिव के गण वीरभद्र और नंदीश्वर थे।
वीरभद्र के एक-एक प्रहार से वानर सेना हवा में उड़ने लगी मकरध्वज ने वीरभद्र को रोकने का प्रयास किया, लेकिन शिव के गणों का बल असीम था। शत्रुघ्न भी वीरभद्र के दिव्य अस्त्रों के सामने असहाय होने लगे।
जब अयोध्या की सेना पूरी तरह परास्त होने की कगार पर पहुँच गई, तब शत्रुघ्न ने हाथ जोड़कर अपने बड़े भाई, साक्षात नारायण के अवतार भगवान श्री राम का स्मरण किया।
भक्त की करुण पुकार सुनकर, युद्धभूमि के बीचों-बीच अचानक एक दिव्य प्रकाश फैला और साक्षात भगवान श्री राम वहाँ प्रकट हो गए! जैसे ही श्री राम युद्धभूमि में आए, भगवान शिव भी अपनी समाधि छोड़कर साक्षात वहाँ प्रकट हो गए।
पूरी युद्धभूमि शांत हो गई। देवता आकाश से कांपते हुए यह दृश्य देख रहे थे कि आज ब्रह्मांड के दो सबसे बड़े तत्व—'हर' (शिव) और 'हरि' (राम) आमने-सामने खड़े थे।
राजा वीरमणि और शत्रुघ्न दोनों डर गए कि कहीं उनके कारण शिव और राम के बीच युद्ध न हो जाए। लेकिन लीलाधारी भगवान श्री राम ने मुस्कुराते हुए धनुष नीचे रख दिया और भगवान शिव के चरणों में प्रणाम किया।
भगवान शिव ने श्री राम को गले लगाया और कहा "हे राघव! आप तो भली-भांति जानते हैं कि 'शिव ही राम हैं, और राम ही शिव हैं।' मेरे इस भक्त वीरमणि ने आपके यज्ञ का घोड़ा पकड़कर भूल की थी, लेकिन अपने भक्त को दिए वचन के कारण मुझे अपने गणों को भेजना पड़ा।"
श्री राम ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "हे महादेव! आपकी महिमा अपरंपार है। आपका भक्त वीरमणि धन्य है, जिसकी रक्षा के लिए स्वयं आपके गण पहरेदार बनकर खड़े हो गए। इस युद्ध का उद्देश्य किसी को हराना नहीं, बल्कि संसार को यह दिखाना था कि जो राम का भक्त है, वही शिव का भक्त है और दोनों में कोई भेद नहीं है।
!! जय श्री कृष्णा!!