#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
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सौ तरीकों से, सौ बार सोचने के बाद भी एक ही निष्कर्ष है विद्यालय मर्जर निकट भविष्य में एक बड़ा ब्लंडर साबित होगा।
फिर वह सरकार के दृष्टिकोण से हो, शिक्षा के दृष्टिकोण से अथवा राज्य की छवि के दृष्टिकोण से।
#school_merger
विद्यालय विलय को लेकर जो भी मंशा रही हो सरकार की परंतु जो बात इतिहास में दर्ज हो गई वह ये कि
"शिक्षा के अधिकार मांगने के लिए 51 नन्हें छात्र कोर्ट रूम में खड़े रहे।"
पहले कभी किसी कालखंड में या किसी राज्य में हुआ हो तो मुझे जानकारी नहीं है।
#Justiceforschoolschildren
भारतीय संविधान में नागरिकों को छह मूलभूत अधिकार दिए गए हैं। उनमें से एक अहम अधिकार है "शिक्षा" और संस्कृति का अधिकार।
जिन गांव में जनसंख्या कम है इसलिए वहां छात्रांकन कम है। पुरानी कुरीतियों के कारण वैसे ही वह अलग थलग हैं। इसलिए छोटे छोटे मजरों में रहते हैं।
तो क्या वहां के बच्चों को शिक्षा के लिए बाकियों की अपेक्षा खासी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
अगर गांव में जनसंख्या कम है तो क्या वहां वोटिंग के लिए बूथ भी नहीं बनेगा ? उसके लिए भी पास के गांव जाना पड़ेगा?
आज़ादी के बाद से कितने प्रयासों, कितनी योजनाओं के बाद उस गांव/मजरे में स्कूल पहुंचा है। शिक्षा की लौ जली।
सभी छोटे- बड़े पक्ष- विपक्ष के सम्माननीय राजनैतिक नेताओं से आग्रह है कि
इस अलख को जलाए रखिए ,संरक्षित कीजिए इन्हें।
भविष्य में गांव के लोग आपसे सवाल करेंगे कि जब आपके गांव का विद्यालय दूसरे गांव में स्थानांतरित हो रहा था तब आप किस समाजसेवा में व्यस्त थे?
यकीन मानिए सरकार को इस मर्जर से रत्ती भर भी लाभ नहीं होगा ...
🙏
- विपिन बिहारी
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921
#Justiceforschoolschildren
आजादी से अब तक तमाम सरकारों, जनसेवकों, माननीयों की कोशिशों और बड़ी मुश्किल से गांव- गांव तक विद्यालय पहुंचें हैं। अब कुछ संसाधन बचाने, कुछ धन बचाने के चक्कर में इन्हें बंद मत कीजिए। एक बार बंद हुए विद्यालय फिर दुबारा खोलने में बहुत मशक्कत होगी। बच्चे आज कम है उस गांव में, कल को हो सकता है बढ़ जाए।
इतना भीषण कदम मत उठाइए।
विद्यालय बंद करना कहीं से कोई समाधान नहीं है, समस्या का। ग्रामीणों, छात्रों और शिक्षकों के लिए यह विद्यालय एक स्थान नहीं बल्कि हजारों बाल स्मृतियों का कल्प- वृक्ष है। इसे न काटिए।
🙏
बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर नष्ट किया था।
उत्तरप्रदेश प्रदेश की सरकार 27000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को बंद कर रही।
अंतर क्या है?
#Justiceforschoolschildren
भारत के तेलंगाना में सिर्फ़ एक बच्ची के लिए चलता है ये स्कूल। इस एक स्कूल को चलाने में सरकार सालाना 12 लाख रुपए खर्च करती है। अर्थात एक बच्ची को पढ़ाने के लिए 12 लाख सालाना।
वीडियो साभार : बीबीसी न्यूज हिंदी
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921#Justiceforschoolschildren