हर वो मुल्क जहाँ पर
अत्याचार है-
कवि हर उस मुल्क का बाशिन्दा है।
कविता मुल्क लौटा तो नहीं सकती
मेरे बच्चे!
पर तुम्हारे मुस्कुराने तक
वो साथ तुम्हारे रो जरूर सकती है।
(��़ोटो: https://t.co/boZ9iKG58V)
भारत का ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) में 105वें स्थान पर होना, जो कि 2024 में 127 देशों में से हासिल किया गया है, गंभीर चिंताओं को जन्म देता है।
यह स्थिति न केवल खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण ���ै, बल्कि यह देश की राजनीतिक और सामाजिक संरचना के स्वास्थ्य का भी संकेत है।
1. कुपोषण और खाद्य सुरक्षा की गंभीर समस्या
भारत में 16.6% जनसंख्या कुपोषित है, जिसमें बच्चे विशेष रूप से प्रभावित हैं; 18.7% बच्चों का कुपोषण विश्व में सबसे अधिक है। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि सरकार की खाद्य सुरक्षा नीतियां न केवल अपर्याप्त हैं, बल्कि उनका कार्यान्वयन भी कमजोर है(
2. सरकारी योजनाओं की असफलता
प्रधान�����त्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के तहत अनाज वितरण में गंभीर अनियमितताएं देखी गई हैं, जहां 27% लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता से कम अनाज मिल रहा है। यह न केवल सरकारी प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच रहा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
मिड-डे मील योजना भी विफलता का शिकार है, क्योंकि बच्चों को पोषण के मामले में बहुत कम लाभ म���ल रहा है। इससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
3. आर्थिक असमानता और बेरोजगारी
भारत की बेरोजगारी दर 2023 में 8.1% रही है, जो कि खाद्य असुरक्षा और कुपोषण के लिए एक प्रमुख कारक है। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई ने खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिससे गरीब तबके को और भी ज्यादा परेशानी हो रही है(
4. स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
भारत का स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश केवल 1.28% जीडीपी है, जो अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। रिपोर्टों के अनुसार, 60% ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जो कि स्वास्थ्य और पोषण के लिए आवश्यक सेवाओं को प्रभावित कर रही हैं(
5. भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की समस्या भी आम है। पिछले वर्ष, लगभग 80% राज्यों में खाद्य सुरक्षा के तहत वितरण में अनियमितता के मामले सामने आए। ये गड़बड़ियां असल में जरूरतमंदों तक सहायता नहीं पहुंचने का कारण बन रही हैं, और यह सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
भारत का 105वां स्थान न केवल भूख और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक कल्याण की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। केवल बड़े दावों से कुछ नहीं होगा; सरकार को इन समस्याओं की जड़ों तक पहुंचकर उन्हें हल करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है। क्या हमारी सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई करेगी?
घास फैल रही है हर जगह
जंगल में, समतल म��ं,
खेत और खलिहान में,
महलों तक और कारखानों में
घास का बढ़ता जाएगा दायरा
वह जड़ से उखाड़ फेंकेगी,
खतपतवारों को, कीड़ों को
इसी घास के बीच
फूटेगा एक नया अंकुर
मेहनतकशों को बल देगा,
इससे जनवादी समाज पनपेगा।
#GNSaibaba #Struggle
तुम्हारा जाना....
घास को और फैलना था
बन जाना था उसे जंगल
जिसका हर पत्ता, हर कली
जिंदादिली से लहराता रहे।
जेल की यातनाएं भी,
तोड़ ना सकी तुम्हारे
मजबूत इरादों को, संघर्षों को
इसलिए मौत के सामने झुकने से
हमेशा किया तुमने इंकार
पर मौत ने तुम्हें,
समेट ही लिया आगोश में..
1/3
उसका चूर-चूर हो गया भ्रम,
तुम्हारे सामने हार ही गई
वह नहीं मार सकी
तुम्हारे विचारों को, ख्यालों को
वह नहीं मार सकेगी
विचारों - सी परछाई को
जो समा गई है हमारे अंदर।
इस हत्यारी व्यवस्था ने
छीन लिया हो तुमको हमसे,
वह घास को रौंद ना सकेगी..
2/3
एक दिव्याँग शिक्षक-बुद्धिजीवी को अपनी माँ को आख़िरी बार देखने के लिए भी पैरोल नहीं दी गयी...जबकि एक बलात्कारी-हत्यारे को हर महीने जेल से बाहर छोड़ दिया जाता है...क्योंकि ये 'नया भारत' है, जिसे एक मूरख-सनकी-नफ़रती हत्यारे ने बनाया है...
#GNSaibaba आख़िरी सलाम 🫡✊
प्रो. जी.एन. साईबाबा के निधन पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका जीवन संघर्ष और साहस का प्रतीक रहा। उन्होंने वंचित वर्गों के हक, अधिकारों के लिए आवाज उठाई और लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी कमी को भर पाना संभव नहीं है। अंतिम विदाई, कॉमरेड।
First Father Stan Swamy & now Prof. Saibaba ! It’s criminal what the Indian State gets away with !! This man with 90% disabilities was wrongly imprisoned & spent 10 years in prison despite being acquitted by the Bombay High Court! Honestly, shame on every single cowardly member of India’s rotten judicial system!
The brave revolutionary Prof G N Saibaba passed away today at a hospital in Hyderabad. Farewell comrade, this news is heartbreaking because you could not even taste a year of freedom.
Incarcerated by the Indian state on charges of being a Maoist sympathizer, Prof Saibaba, with 90 percent disabilities, spent close to a decade in prison, and was often kept under the harshest solitary confinement. Housed in prison, his radical poetry addressed the colonial nature of the Indian legal system even as it addressed the many social evils that plague us as a nation.
It feels unreal, even unthinkable to exercise the past tense to write of you, comrade. You are a living flame. Your spirited fight, your strong will that did not shatter under the most cruel state oppression, your faith in the power of the working people -- this will remain your indelible legacy.
When I met you earlier this year in April, it felt like I was meeting a friend from forever. We discussed literature, IWE, the postcolonial novel, and what it means to be Bahujan within Indian academia. You laughed at how little I ate. You wore your suffering incredibly lightly--so casually that we felt doubly enraged at what the Indian state had inflicted upon you. Never did I realise that this was going to be my last ever meeting with you.
My deepest condolences to my friend and sister comrade AS Vasantha Kumari.
I'm left with no words to console you or Manjiri.
💔
बहुत पहले इस लंबी लडाई का हिस्सा बने और हमारे लिए मिसाल!
सालों जेल मे रखने के बाद भी लड़ने की हिम्मत नही तोड़ पाया ये ��ंत्र! दुख है कि आपके साथ बहुत थोड़ा समय मिल पाया, बहुत बड़े सदमें में छोड़ गए सबको!
ये लडाई जारी रहेगी कामरेड!
लाल सलाम कॉमरेड जी एन साई बाबा!!
@IndLabSol
एक ही देश में दो तरह से मरते लोग और इनपर उमड़ती संवेदनाएं
एक तरफ रतन टाटा जो मजदूरों और आदिवासियों के खून को चूसकर बड़ा हुआ उसकी प्राकृतिक मौत
दूसरी तरफ सीवर में दम तोड़ते दलित और बेमौत जाती जानें!!
#RIPRatanTata#RatanTataPassedAway#RatanTataSir#KARINA_UP#RatanTata
साथी अनिरुद्ध को रिहा करो!
मानव अधिकार कार्यकर्ता अजय कुमार को रिहा करो!
सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करो!
ठेकेदारी प्रथा खत्म करो!
नई लेबर कोडों को रद्द करो!
Uapa और NIA को भी खत्म करो!
We strongly condemn the arrest of human rights defender and trade union leader Anirudh Rajan under baseless anti-terror charges. His detention is a blatant act of repression aimed at silencing voices advocating for the rights of vulnerable workers.
https://t.co/nlwG4bq4qy
2021 की प्रस्तावित जाति आधारित जनगणना को 2024 तक पूरा न करना यह दर्शाता है कि सरकार दलित और आदिवासी वर्गों की समस्याओं को उजागर करने से बच रही है। यह जनगणना इन वर्गों की वास्तविक स्थिति को सामने लाकर सरकार प�� उनकी बेहतरी के लिए ठोस नीतियां बनाने का दबाव डालती। पिछले एक दशक में, इन समुदायों ने भूख, बेरोजगारी, कुपोषण और भूमि लूट जैसी गंभीर समस्याओं का सामना किया है, जो उनकी जीवनशैली और अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
#कॉमरेड अन���रूद्ध राजन को रिहा करो।
#मानव अधिकार कार्यकर्ता और वकील अजय कुमार को भी रिहा करो।
#UAPA जैसे जन विरोधी कानूनों को रद्द करो।
#NIA को रद्द करो।
#इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।
एक आंकड़े के अनुसार 2015 से 2020 के बीच UAPA के तहत कुल 8,371 लोग गिरफ्तार किए गए। लेकिन महज 235 लोगों को सजा हुई। यानी conviction rate 3% से भी कम।
UAPA के तहत प्रक्रिया ही सजा है।
(जनचौक)
सोचिए फिर राज्य का दमन इसीलिए है ताकि लोग चुप हो जाएं।
#HaryanaElections