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बिहार की बाघिन ने भरी ‘संरक्षण की उड़ान’
भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर से बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंची वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन
बिहार के इतिहास में पहली बार बाघ का अंतर्राज्यीय स्थानांतरण
पटना/वाल्मीकिनगर, 30 सितंबर। बिहार के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। वाल्मीकि ट��इगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर हवाई अड्डे से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया है। संरक्षण के उद्देश्य से बिहार से किसी बाघ को पहली बार दूसरे राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। यह बिहार के लिए गौरव का क्षण है और राज्य की बढ़ती संरक्षण क्षमता तथा देश के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्रयासों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
बाघिन को 29 सितंबर की शाम करीब 5 बजे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बेहोश कर रेडियो-कॉलर लगाया गया। आवश्यक पशु चिकित्सा एवं वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया गया। बाघिन को 30 सितंबर की सुबह लगभग 8 बजे बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। इस प्रकार बाघिन को बेहोश किए जाने से लेकर उसके नए संरक्षण क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई।
बक्स��� टाइगर रिजर्व में बाघिन को फिलहाल विशेष रूप से तैयार किए गए एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उसके स्वा��्थ्य, व्यवहार एवं नए वातावरण के अनुकूलन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। 2 अक्टूबर को उसे एनक्लोजर से बड़े वन क्षेत्र में छोड़े जाने की योजना है।
इस ऐतिहासिक अभियान को बिहार एवं पश्चिम बंगाल वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वायु सेना के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अभियान में वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों तथा दोनों राज्यों के मैदानी वनकर्���ियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाघिन के सुरक्षित पकड़ने, रेडियो-कॉलर लगाने, सड़क मार्ग से गोरखपुर तक पहुंचाने, विशेष विमान से परिवहन तथा बक्सा टाइगर रिजर्व में सुरक्षित स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन एवं पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप की गई।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा टाइगर रिजर्व तक बाघिन का यह स्थानांतरण बिहार की संरक्षण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण तराई वन परिदृश्य का हिस्सा है और बिहार में बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से बिहार ने पहली बार अपने यहां के बाघ को दूसरे राज्य के संरक्षण कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण ��ें अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत किया है।
यह अभियान अंतर्राज्यीय सहयोग, वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन और संस्थागत समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। बिहार से पश्चिम बंगाल तक बाघिन की यह यात्रा केवल एक वन्यजीव के स्थानांतरण की कहानी नहीं, बल्कि बिहार के बदलते संरक्षण परिदृश्य और देश के व्यापक बाघ संरक्षण प्रयासों में राज्य की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है।
बिहार के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि गर्व का विषय है—वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ने पहली बार अपने बाघ को दूसरे राज्य के बाघ संरक्षण प्रयास में योगदान के लिए भेजा है।
@muskanpratyush1@Nishantjdu81@Jduonline तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुमने अभी कुछ भी, सिखा नहीं है।
बेकार लब है भूसा है मन में, तुम्हारी पत्रकारिता नयी नयी है।।
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Finally found a girl from Bihar who actually teaches English with clear, accurate pronunciation. Even some famous teachers, don’t teach pronunciation this well. 👏
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@mithunmishrabwn@DM_Muzaffarpur महोदया @ramanishadbjp कृपया इसपर संज्ञान ले पहली बार में ही जीत कर मंत्री बनी है आप और हाजीपुर नगर परिषद अध्यक्ष रहते हुए कार्यों का भी अनुभव है। अपने क्षेत्र की प्रशासनिक समस्याओं पर भी ध्यान दे।
@mithunmishrabwn@DM_Muzaffarpur महोदया @ramanishadbjp कृपया इसपर संज्ञान ले पहली बार में ही जीत कर मंत्री बनी है आप और हाजीपुर नगर परिषद अध्यक्ष रहते हुए कार्यों का भी अनुभव है। ��पने क्षेत्र की प्रशासनिक समस्याओं पर भी ध्यान दे।
पूर्णिया से गया जाने में कुल 615 रुपए का टोल लगा जो नीचे दिखाया है इसमें मरंगा पूर्णिया में 70 रूपये का टोल शामिल नहीं है।
350 किमी की यात्रा में बिहार में इतना टोल देना पड़ रहा है।
गया शहर में कुछ सड़कों की स्थिति बेहद खराब है बड़े गड्ढे है रेलवे फाटक से पहले दो घंटे जाम में फंसे रहे जिससे कल कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया।
पूर्णिया से गया जाने में कुल 615 रुपए का टोल लगा जो नीचे दिखाया है इसमें मरंगा पूर्णिया में 70 रूपये का टोल शामिल नहीं है।
350 किमी क�� यात्रा में बिहार में इतना टोल देना पड़ रहा है।
गया शहर में कुछ सड़कों की स्थिति बेहद खराब है बड़े गड्ढे है रेलवे फाटक से पहले दो घंटे जाम में फंसे रहे जिससे कल कोई कार्यक्रम नहीं हो पाया।