@shashank_ssj Protest which Create Problem for General Public is only Political & Foreigners Agenda.
Protest is no Solution, Positive constructive work is the Solution.
@MeghUpdates विदेशी गुलामों का उपचार चाहिए,
जिस हेतु कृष्ण-चाणक्य नीति चाहिए,
जिसकी पूर्ति शिवाजीसी सोच चाहिए,
चींटी के तो जब पर निकल जाते हैं तो,
हाथी के नहीं,चींटी के परही कतरते हैं!
मुफ्तखोर-कुटिल की तृष्णा कभी तृप्त नहीं हो सकती!
🪳बीमारीघर,हमलों में अविनाशी,उपचार,युक्तिसंगत प्रहार!
@aravind श्रीराम नीति के पहले
श्रीहनुमान से बलवान,
विभीषण जैसे चाहिए,
अन्यथा श्रीकृष्ण नीति!
एक पाप संचित पुण्य को प्रभावहीन कर देता,
एक भूल पूर्व के अच्छे कार्यों को विस्मरण कर देता,
जैसे जातिवादी UGC नियम,अन्य अच्छे कर्मों पर भारी,
विरोध प्रदर्शन में समर्थकों को,विरोधियों साथ जोड़ दिया!
@memenist_ श्रीराम नीति के पहले
श्रीहनुमान से बलवान,
विभीषण जैसे चाहिए,
अन्यथा श्रीकृष्ण नीति
कुटिल अधर्म साथी, देवव्रत-द्रोण-कर्ण-दुर्योधन आदि,
के अंत को सुलभ बनाने हेतु श्रीकृष्ण द्वारा अभिमन्यु की बलि,
हनुमानजी ने रावण को शिक्षा देने, लंका को जलाने के लिए पुंछ जलवायी थी!
@talk2anuradha इतिहास/कहावत की पुनरावृत्ति होती है,
एक मछली पूरे तालाब को गन्दा करती है,
एक सडा सेव पूरी टोकरी को खराब करती!
एक पाप जीव के सम्पूर्ण पुण्य नष्ट कर देता!
श्रीराम नीति के पहले
श्रीहनुमान से बलवान,
विभीषण जैसे चाहिए,
अन्यथा श्रीकृष्ण नीति!
@ajeetbharti दुर्योधन-शिशुपाल-समर्थक सुधर नहीं सकते,
युक्तिपूर्वक अंत बचाव का उचित उपचार!
अपराध में बढ़ोतरी हेतु कानून जिम्मेदार,
नेता अपराधी अधिकारों की रक्षा करता,
आम जनता अधिकार-न्याय रक्षा नहीं!
श्रीराम नीति के पहले
श्रीहनुमान से बलवान,
विभीषण जैसे चाहिए,
अन्यथा श्रीकृष्ण नीति!
@OfficeOfDGP@RahulGandhi दुर्योधन-शिशुपाल व उसके समर्थक सुधर नहीं सकते,
उनका युक्तिपूर्वक अंत ही बचाव का उचित उपचार!
Protest which Create Problem for General Public is only Political & Foreigners Agenda.
Protest is no Solution, Positive constructive work is the Solution.
@iamsum80 आंदोलन इतिहास-परिणाम साक्षी है,
आंदोलन देश-धर्म-संस्कृति हेतु विनाशकारी,
जयप्रकाश आंदोलन का परिणाम-उत्पाद, लालू,
अन्नाहज़ारे आंदोलन का परिणाम-उत्पाद, केजरीवाल,
यह तो मात्र कुटिल अराजक स्वार्थपूर्ति का साधन बन गए,
समस्या-अत्याचार का समाधान उचित धर्म-संगत कर्मशीलता,
अर्जुन,चाणक्य